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कोरिया@कोरिया जिले के सोनहत एसडीएम सोनहत के प्रभार से हटा दिए गए

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कोरिया/सोनहत,11 अक्टूबर 2025 (घटती-घटना)। यह आनन-फानन में हुआ और उनके हटाए जाने से बाद से ही एक सवाल खड़ा हो गया कि क्या एक समाज विशेष का टाइटल उनके प्रभार का दुश्मन बन गया,सूत्रों की मानें तो पूरा मामला रावण दहन से खड़ा हुआ मामला है जहां रावण दहन के मुख्य कार्यक्रम में विधायक की गैरमौजूदगी में रावण दहन कार्यक्रम संपन्न हो गया था और विधायक के पहुंचने पर केवल रावण के पुतले के अवशेष मात्र बचे थे जिससे विधायक नाराज हुईं थीं और उन्होंने बयान भी नाराजगी में दिया था।
मामले में पुलिस प्राथमिकी की बात भी विधायक ने की थी जिसके बाद पूर्व विधायक या कहें विपक्ष की भी एंट्री हुई थी और पुलिस प्राथमिकी तो दर्ज नहीं हो सकी लेकिन एसडीएम सोनहत निपटा दिए गए। एसडीएम ऐसे समाज से आते हैं जैसा बताया जा रहा है जिसकी भूमिका सोनहत में काफी प्रमुख रहती है और उसी समाज के लोगों ने रावण दहन विधायक के पहुंचने से पूर्व किया और एसडीएम ने रोकने का प्रयास नहीं किया इसलिए एसडीएम हटाए गए ऐसा सूत्रों का दावा है। अब सच चाहे जो भी हो लेकिन भाजपा जिलाध्यक्ष का एक सोशल मीडिया बयान भी सामने आया जो एसडीएम सोनहत के हटाए जाते ही आया जिसमें उन्होंने एसडीएम को कर्तव्यनिष्ठ,व्यवहार कुशल और क्षेत्र के लिए समर्पित बताया है, जिलाध्यक्ष भाजपा का सोशल मीडिया बयान वैसे लोग समझ नहीं पा रहे हैं लेकिन एसडीएम क्यों हटाए गए इसके पीछे की वजह लोग एक ही मान रहे हैं जो रावण दहन का ही मामला लोग मान रहे हैं।
एसडीएम भी हुए मात्र अहंकार का शिकार,अहंकार मिटाने वालों के सत्कार की थी जिम्मेदारी,खुद ही अहंकार की भेंट चढ़ गए…
सोनहत एसडीएम भी अहंकार के शिकार हो गए,जिस कार्यक्रम में वह अहंकार को मिटाने वाले के सत्कार के लिए जिम्मेदार थे उसी कार्यक्रम में हुई चूक से उपजे अहंकार ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया,एसडीएम गलत थे भी तो यदि कार्यक्रम अहंकार के पराजय का था तो कम से कम एसडीएम को ऐसी एकमात्र किसी चूक के लिए ऐसे दिवस माफ किया जाना था जब अहंकार ही मिटाना दिवस उद्देश्य था,एसडीएम को अपने अहंकार के लिए हटाना कम से कम दिवस विशेष के हिसाब से सही नहीं कहा जा सकता और इसे धर्म आधारित न्याय भी नहीं कहा जा सकता,कुल मिलाकर अहंकार का रावण सोनहत में जला ही नहीं बल्कि वह और अधिक ताकतवर हुआ मजबूत हुआ।
समाज विशेष का टाइटल न होता एसडीएम सोनहत बने रहते पद पर
सोनहत एसडीएम पर बताया जाता है कि आरोप मात्र एक समाज विशेष के टाइटल के कारण लगा,सोनहत में सक्रिय एक जाति समुदाय के कुछ लोगों पर आरोप लगा कि उन्होंने जल्दबाजी में रावण दहन कार्यक्रम संपन्न कर दिया विधायक का इंतजार नहीं किया,एसडीएम साहब के नाम के आगे का भी टाइटल उसी समाज से जुड़ा पाया गया और उन्हें ही सहयोगी मानकर हटा दिया गया,बताया जा रहा है कि एसडीएम साहब का टाइटल दूसरा कुछ होता वह पद पर बने रहते उन्हें नहीं हटाया जाता। वैसे जिस समाज का टाइटल एसडीएम साहब अपने नाम के आगे लगाते हैं वह जिले सहित प्रदेश में अपनी निर्णायक भूमिका के लिए जानी जाती है चुनावों में।
रावण दहन कार्यक्रम का सिर्फ मनोरंजन ही रह गया है उद्देश्य
रावण दहन कार्यक्रम का उद्देश्य सिर्फ मनोरंजन रह गया है, असत्य पर सत्य के विजय के प्रतीक स्वरूप मनाया जाना वाला पर्व अब मनोरंजन मात्र उद्देश्य से मनाया जाने लगा है,कहीं फूहड़ नृत्य और कहीं आयोजकों का हुडदंग यही अमूमन रावण दहन के दिन नजर आने वाला दृश्य होता है,दशहरा पर्व जहां अहंकार के नाश का पर्व माना जाता है वहां अब अहंकार ही इस पर्व की पहचान बन गई है,सोनहत में भी रावण दहन का कार्यक्रम अहंकार की भेंट चढ़ गया, जिस कार्यक्रम में अहंकार के प्रतीक रावण को जलाया जाना था वहीं अहंकार इतना हावी हो गया कि मामला पुलिस थाने तक पहुंचा और बाद में एक बेहतर कार्य कर रहे क्षेत्र के अधिकारी को भी पद से हटना पड़ा,कुल मिलाकर व्यतिगत अहम नेताओं का इस कदर हावी है कि अब आम इंसान या व्यवस्था कुछ ऐसा नहीं कर सकती कि नेता हमेशा खुश रहें,नेताओं को खुश रखने के लिए अब केवल हर पल उनकी मंशा के अनुसार कार्य करना ही केवल एक तरीका रह गया है।
रावण से भी अहंकारी हैं आज  सत्ता में बैठ रहे लोग भी?
रावण बुराई का प्रतीक है लेकिन वह कभी अपनी सत्ता से और अपने लोगों से विरोध नहीं लेता नजर आया,जब रावण पर संकट आया उसके राज्य और उसके परिवार ने उसका साथ दिया भले ही सभी ने अपनी जान गंवाई,आज ऐसी स्थिति नहीं है,आज सत्ता पाते ही सत्ताधारी इतने अहंकारी हो जाते हैं कि वह सबसे पहले अपने ही लोगों की जड़े काटते हैं,सत्ता अहंकार का प्रतीक अब बन चुका है जो अब रावण के अहंकार से कहीं बड़ा अहंकार है,इस अहंकार में नफा नुकसान अपनो का भी स्वीकार है,कुल मिलाकर रावण आज के सत्ताधारियों से अच्छा था ऐसा आगे लोग कहेंगे और हो सकता है कि आगे कुछ और देखने को मिले दशहरा के दिन।
क्या रावण दहन सिर्फ रावण के अहंकार के लिए हो रहा है,रावण दहन करने वालों का अहंकार क्यों नहीं जलता?
रावण का दहन प्रतिवर्ष हो रहा है लेकिन जो रावण दहन करने जा रहे हैं राम बन रहे हैं उनका अहंकार खत्म नहीं हो पा रहा हैं।राम बनकर रावण दहन करने पहुंचने वालों का अहंकार आज रावण के अहंकार से ऊपर हो चुका है,अब नफा नुकसान भूलकर किसी को होने वाली क्षति भूलकर लोग व्यवहार कर रहे हैं और अपनी वाहवाही और अपनी जयजयकार सुनना पसंद कर रहे हैं। रावण आदिकाल से जलता आ रहा है क्योंकि इस तरह लोग बुराई समाप्त करने की बात करते है लेकिन न बुराई खत्म हो रही है और न अहंकार।


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