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कोरिया@राशन के लिए भारी जद्दोजहद, कही 30 तो कही 40 किलोमीटर का सफर

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-राजन पाण्डेय-
कोरिया,26 सितंबर 2025 (घटती-घटना)। सोनहत ब्लॉक की ग्राम पंचायत कुशहा का अजब-गजब सीमांकन से करीब 500 आबादी के लिए परेशानी खड़ी हो गई है। पंचायत मुयालय में संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकान से राशन लेने के लिए पंचायत के दूसरे छोर में बसे आश्रित गांव केवराबहरा के ग्रामीणों को 3 पंचायत पार कर 35 किलोमीटर दूर दुकान पहुंचना पड़ता है। केवराबहरा के ग्रामीण बड़ी संख्या में किराए की गाड़ी बुक कर कलेक्टर कार्यालय पहुचे और राशन आवंटन की वैकल्पिक व्यवस्था कराने गुहार लगाई। ग्रामीणों ने आवेदन सौंपकर बताया कि ग्राम पंचायत कुशहा के आश्रित गांव केवराबहरा के निवासी हैं। गांव में राशन दुकान ग्राम पंचायत मुयालय कुशहा में संचालित है। जिसकी दूरी करीब 4 से 5 किलोमीटर होगी। लेकिन कुशहा और केवराबहरा के बीच कोई पहुंच मार्ग नहीं है। पगडंडी और जंगल के बीच से होकर ग्रामीण आवागमन करते हैं। केवराबहरा की आबादी करीब 500 है। हर महीने राशन उठाव करने पंचायत मुयालय कुशहा जाना पड़ता है। क्योंकि राशन दुकान कुशहा में संचालित है। केवराबहरा के हितग्राहियों को राशन लेने के लिए ग्राम पंचायत विक्रमपुर-बुडार, भैंसवार, अकलासरई से होकर कुशहा पहुंचना पड़ता है। जिसकी दूसरी 30 से 35 किलोमीटर होगी। गांव में बुजुर्ग, महिला और गरीब हितग्राही हैं। जिनको हर महीने राशन के लिए दिनभर समय लगता है। इसलिए हमारे गांव केवराबहरा में राशन वितरण कराने वैकल्पिक व्यवस्थाएं बनाएं।
कुशहा में 520 राशन कार्ड धारक,इसमें 200 से अधिक केवराबहरा निवासी
ग्राम पंचायत मुख्यालय कुशहा में संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकान में 520 राशन कार्ड धारक हैं। जिसमें 200 से अधिक ग्राम केवराबहरा निवासी हैं। जनगणना 2011 में केवराबहरा की जनसंख्या 188 और 40 से अधिक परिवार निवासरत थे। जिनकी अब 13-14 साल में आबादी बढ़ चुकी है। वर्तमान में केवराबहरा तक पक्की सड़क है और ग्राम पंचायत अकलासरई से जुड़ा हुआ है। लेकिन ग्राम पंचायत का सीमांकन के समय पहुंच मार्ग को ध्यान नहीं दिया गया। जिससे ग्राम केवराबहरा को कुशहा में शामिल कर लिया गया। जबकि केवराबहरा को अकलासरई में शामिल करने से बेहतर सुविधाएं मिल सकती है। ग्रामीण अभी भी किसी चीज की खरीदारी के लिए अकलासरई पर आश्रित हैं।
सोनहत के वनांचलों में राशन लेने 20 से 40 किलोमीटर तक का सफर
सोनहत विकासखण्ड के वानांचल ग्रामो में कई ऐसे गांव हैं जहां राशन लेने ग्रामीणों को भारी जद्दोजहद करनी पड़ती है, बात करें तो सोनहत विकासखण्ड का ग्राम कांटो जो कि नव गठित पँचायत कचोहर का हिस्सा है कांटो के ग्रमीणों को राशन लेने कचोहर आना पड़ता है कचोहर से कांटो की दूरी लगभग 40 किलोमीटर है,पहले यह बंशीपुर ग्राम पँचायत का हिस्सा था तब इसकी दूरी लगभग 50 किलोमीटर थी। जबकि इसी ग्राम पंचायत का एक और ग्राम निग्नोहर है जहां से सोसायटी 10 किलोमीटर दूर है , सोनहत विकासखण्ड के वानांचल ग्राम गिधेर की बात करें तो यहां के लोग राशन लेने 10 किलोमीटर दूर चंदहा ग्राम पंचायत में राशन लेने जाते हैं
रामगढ़ के क्षेत्रो में स्थिति भयावह
सोनहत के वानांचल रामगढ़ उपतहसील क्षेत्र की बात करें तो यहां का सबसे दुरस्त ग्राम कछुवाखोह है यहां के लोगो को राशन लेने ग्राम दसेर जाना पड़ता है जिसकी दूरी लगभग 35 से 40 किलोमीटर दूर है। वही ग्राम कुर्थी के ग्रामीण लगभग 25 किलोमीटर की दूरी तय कर ग्राम पंचायत नटवाही राशन लेने आते हैं। जबकि ग्राम गरनई और तुर्री पानी के ग्रामीण राशन लेने क्रमशः 15 और 10 किलोमीटर का सफर कर रामगढ़ पहुचते हैं,
रेवला के ग्रामीण राशन के लिए 40 किमी का सफर तय करते है
सोनहत के रेवला ग्राम के ग्रामीणों को कछाड़ी पँचायत से राशन मिलता है इसके लिए रेवला के ग्रामीण पहले सोनहत आते हैं और सोनहत से कछाड़ी जाते हैं कुल मिलाकर एक साइड का सफर लगभग 40 किमी का होता है यदि दोनों साइड का सफर जोड़े तो यह 80 किलोमीटर हो जाएगा, जबकि ग्राम सेमरिया सुखतरा और बघवार के ग्रामीण 15 किलोमीटर का सफर कर ग्राम पंचायत अमृतपुर से राशन ले जाते हैं।
पहले और अधिक थी दूरी पिछली सरकार ने कुछ नजदीक किया
पहले इन ग्रामो से शासकीय उचित मूल्य की दुकान की दूरी और अधिक थी उस दौरान लोगो को राशन लेने में और असुविधा होती थी लेकिन पिछली सरकार में पूर्व विधायक से मांग के बाद उन्होंने सोनहत में 10 नए ग्राम पंचायतों का सृजन कराया जिसमे पंचायत भवन के साथ राशन गोदाम की भी सौगात मिली । इससे लोगों को राशन के लिए बहुत फायदा तो नहीं हुआ पर पहले से दूरी जरूर काफी कम हो गई जिसके बाद ग्रामीणों को पहले से काफी राहत हुई है लेकिन आज के हिसाब से यह राहत पर्याप्त नहीं है।


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