- बिहान की मदद से आत्मनिर्भर हो रही महिलाएं,कई महिलाएं और महिला समूह बने सफल उदाहरण
- मेहनत से सही दिशा में
- प्रयास कर लखपति बन रही ग्रामीण महिलाएं
- कही पानी,तो कही चक्की,कही समूह के माध्यम से लघु उद्योगों का संचालन कर रही महिलाएं
- डुमरिया में पानी की बोतल से समृद्धि की राह, 3 माह में कमाए 12 लाख
-राजन पाण्डेय-
कोरिया,23 सितंबर 2025 (घटती-घटना)। कौन कहता है आसमान में सुराख नही हो सकता एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों, कवि दुष्यंत कुमार की इन पंक्तियों को ग्रामीण महिलाओं ने साकार करके दिखाया है,कहते हैं मेहनत और सही दिशा में किया गया प्रयास ही किसी भी व्यक्ति की सफलता का मूल कारण होता है। ग्राम पंचायत सरभोका की रहने वाली शशिकला इसका जीवंत उदाहरण हैं। बिहान योजना से जुड़कर उन्होंने आत्मनिर्भरता की नई राह बनाई और आज ग्रामीण अंचल में सशक्त व्यवसायी महिला के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं।
बिहान से मिला संबल
शशिकला वर्ष 2018 में ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़ीं और मोहल्ले की 10 महिलाओं के साथ मिलकर चमेली स्व-सहायता समूह बनाया। पहले उन्हें समूह कोष से 15 हजार रुपये का आरएफ मिला, फिर 60 हजार रुपये का सीआईएफ और बाद में 1.50 लाख रुपये का व्यक्तिगत ऋण प्राप्त हुआ। इन्हीं संसाधनों से उन्होंने अपने छोटे-छोटे व्यवसाय खड़े किए और आय को लगातार बढ़ाया। जहां समूह से जुड़ने से पहले उनके परिवार की सालाना आय मात्र 50-60 हजार रुपये थी, वहीं अब वह लगभग 3 लाख रुपये सालाना लाभ अर्जित कर रही हैं। केवल अपने परिवार तक सीमित न रहते हुए शशिकला अब अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बनी हैं। वर्तमान में वह नारी शक्ति संकुल स्तरीय संगठन, बुड़ार की अध्यक्ष हैं और सैकड़ों महिलाओं को आजीविका गतिविधियों से जुड़ने हेतु प्रेरित कर रही हैं। आज शशिकला ’’लखपति दीदी’’ बनकर न केवल अपने परिवार को संबल दे रही हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी मिसाल बन चुकी हैं।
क्या है बिहान योजना
बिहान योजना,छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन का एक कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य ग्रामीण गरीब परिवारों को सशक्त बनाना और उनके जीवन स्तर में सुधार लाना है,उन्हें लाभप्रद स्वरोजगार के अवसर प्रदान करना और स्थायी संस्थाएं बनाकर गरीबी कम करना है। यह राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और राज्य के सभी ब्लॉकों में लागू किया जा रहा है। बिहान योजना के मुख्य उद्देश्य ग्रामीण गरीब परिवारों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाना और गरीबी कम करना। ग्रामीण गरीबों को सशक्त और स्थायी संस्थाओं में संगठित करना। लाभदायक स्वरोजगार और कुशल मजदूरी वाले रोजगार के अवसर प्रदान करना।
फर्श से अर्श तक का सफर
शशिकला का जीवन भी एक सामान्य ग्रामीण महिला की तरह ही शुरू हुआ। परिवार की आय का एकमात्र साधन आटा चक्की थी, जिससे मात्र 5-6 हजार रुपये मासिक आमदनी होती थी। आर्थिक तंगी हमेशा बनी रहती थी। लेकिन आत्मनिर्भर बनने की सोच और मेहनत के दम पर उन्होंने बिहान के सहारे अपने जीवन की दिशा बदल दी। आज उनके पास आटा चक्की के साथ-साथ किराना दुकान, मसाला पैकेजिंग यूनिट और डीजे व्यवसाय भी है। इन चार आजीविका गतिविधियों से उनकी मासिक आय 25 से 30 हजार रुपये तक पहुँच गई है।
डुमरिया में पानी की बोतल से समृद्धि की राह
कोरिया जिले में ‘लखपति दीदी योजना‘ महिलाओं के जीवन में परिवर्तन की बड़ी कहानी लिख रही है। इसी योजना के अंतर्गत बैकुंठपुर ब्लॉक के डूमरिया गाँव का महालक्ष्मी स्व-सहायता समूह पूरे जिले के लिए प्रेरणा बन गया है।
पैक्ड वाटर प्लांट से मिली नई पहचान
समूह की अध्यक्ष मुन्नी बाई को प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम और बिहान योजना के तहत एम प्लस नाम से पैक्ड बोटल वाटर प्लांट स्थापित करने का अवसर मिला। इसकी कुल लागत 35 लाख रुपए हैं।पीएमईजीपी से 30 लाख रुपए की सहायता प्राप्त हुई। इसके अलावा बिहान से 5 लाख रुपए का ऋण प्राप्त किया। सिर्फ तीन महीनों में ही इस प्लांट ने 12 लाख रुपए से अधिक का कारोबार कर लिया है।
आत्मनिर्भरता की राह पर ग्रामीण महिलाएँ
आज समूह की पाँच से अधिक महिलाएं लखपति बनने की ओर तेजी से अग्रसर हैं। मुन्नी बाई दीदी कहती हैं। ‘लखपति दीदी योजना ने हमें नया जीवन दिया है। अब हम दूसरों को भी रोजगार देने की स्थिति में हैं।‘ महालक्ष्मी समूह की महिलाएँ अब अपने परिवार की जरूरतें पूरी करने के साथ बच्चों की शिक्षा और सामाजिक कार्यों में योगदान दे रही हैं। यह पहल साबित करती है कि अगर अवसर और सही दिशा मिले तो गाँव की महिलाएँ किसी भी क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकती हैं।
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