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रायपुर@एसीबी-ईओडब्ल्यू ने की पहली बड़ी कार्रवाई..

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सौम्या चौरसिया की 8 करोड़ की संपत्ति कुर्क
रायपुर,23 सितम्बर 2025। छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार पर नकेल कसने की कवायद तेज हो गई है। कोयला घोटाला मामले में जेल में बंद निलंबित राज्य सेवा की अफसर सौम्या चौरसिया को एक और बड़ा झटका लगा है। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (एसीबी-ईओडब्ल्यू) ने उनकी 8 करोड़ रुपये की 16 बेनामी संपत्तियों को कुर्क कर दिया है। यह एसीबी-ईओडब्ल्यू द्वारा आय से अधिक संपत्ति मामले में की गई पहली बड़ी कार्रवाई है, जो भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का साफ संकेत देती है।
क्या है पूरा मामला…
सौम्या चौरसिया के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का केस दर्ज है। जांच में पता चला कि उन्होंने करीब 47 करोड़ रुपये की 45 अचल संपत्तियां अपने करीबी रिश्तेदारों, जैसे सौरभ मोदी और अनुराग चौरसिया, के नाम से खरीदी थीं। ये संपत्तियां कोयला लेवी और अन्य भ्रष्ट तरीकों से जुटाई गई थीं। इससे पहले, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इसी मामले में 39 करोड़ रुपये की 29 संपत्तियों को कुर्क किया था। बाकी बची 16 संपत्तियों को लेकर एसीबी-ईओडब्ल्यू ने जांच की। पुख्ता सबूत मिलने के बाद 16 जून 2025 को विशेष न्यायालय में कुर्की के लिए आवेदन दिया गया। 22 सितंबर 2025 को सुनवाई के बाद कोर्ट ने 8 करोड़ रुपये की इन 16 संपत्तियों को अंतरिम रूप से कुर्क करने का आदेश पारित कर दिया। एक समय था जब सौम्या चौरसिया की गिनती राज्य के सबसे ताकतवर अफसरों में होती थी। वह तत्कालीन मुख्यमंत्री की उपसचिव थीं और उनकी तूती बोलती थी। लेकिन, कहते हैं न कि सत्ता का सूरज ढलते ही सितारे भी गर्दिश में आ जाते हैं। ईडी की जांच के बाद उनका करियर, जो कभी बुलंदियों पर था, धड़ाम से नीचे आ गिरा। अब एसीबी-ईओडब्ल्यू की इस कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि भ्रष्टाचार चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, कानून का शिकंजा कसना तय है। यह कार्रवाई सिर्फ एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि उन सभी लोकसेवकों के लिए एक चेतावनी है, जो पद का दुरुपयोग कर अवैध संपत्ति बना रहे हैं।
एसीबी-ईओडब्ल्यू के अधिकारियों का कहना है कि यह तो बस शुरुआत है। भविष्य में अन्य लोकसेवकों के खिलाफ भी अनुपातहीन संपत्ति के मामलों में इसी तरह की कुर्की की कार्रवाई की जाएगी। यह कदम दिखाता है कि सरकार अब केवल एफआईआर दर्ज कर चुप नहीं बैठेगी, बल्कि भ्रष्ट अफसरों की कमाई हुई संपत्ति को भी जब्त कर सरकारी खजाने में वापस लाने की कोशिश करेगी।


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