- हितग्राही बोले महंगाई तीन गुना बढ़ गई,अनुदान की राशि का फिर से करना चाहिए आंकलन,मापदंड के हिसाब से मकान बनाने पर खर्च करने होंगे करीब दो लाख
- 2016 में पीएम आवास शुरू होने के बाद से ग्रामीण इलाकों में मिल रहे सिर्फ एक लाख बीस हजार रुपए,दूरी के हिसाब से बने स्टीमेट

-राजन पाण्डेय-
कोरिया,22 सितंबर 2025 (घटती-घटना)। सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाय),जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराना है, आर्थिक बाधाओं के कारण गंभीर संकट का सामना कर रही है। वर्ष 2016 में शुरू हुई इस योजना के तहत दी जाने वाली 1 लाख 20 हजार रुपए की अनुदान राशि मौजूदा महंगाई और निर्माण लागत के सामने नाकाफी साबित हो रही है। परिणामस्वरूप,जिले में सैकड़ो लाभार्थियों के मकान अधूरे पड़े हैं,क्योंकि उनके पास निर्माण पूरा करने के लिए पर्याप्त धनराशि नहीं है। लाभार्थियों और स्थानीय लोगों ने सरकार से अनुदान राशि का पुनर्मूल्यांकन करने की मांग की है, ताकि बढ़ती महंगाई के बीच उनका पक्के मकान का सपना पूरा हो सके।
दो कमरे बनाना भी मुश्किल
योजना के तहत मिल रही राशि से दो कमरे बनाना भी मुश्किल हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में दो कमरा बनाने के लिए 1 लाख 20 हजार रुपए की राशि दी जाती है। साथ ही 17 हजार 300 रुपए मनरेगा के तहत मजदूरी मिलती है यानि कुल राशि 1 लाख 37 हजार 300 रुपए है। इतनी कम राशि में लोगों को मकान बनाना मुश्किल हो रहा है। साथ ही कुछ हितग्राही ऐसे हैं, जिनके पास स्वयं की पूंजी भी नहीं हैं, जिससे मकान अधूरे भी पड़े हैं। जबकि शहरी क्षेत्र में यह राशि 2 लाख 50 हजार रुपए के लग्भग है ।
निर्माण लागत और अनुदान राशि में भारी अंतर
एक प्राइवेट इंजीनियर से बात करने पर उन्होंने बताया की योजना के तहत बनने वाले 270 वर्ग फीट के दो कमरे के मकान की लागत का ब्योरा साझा किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान बाजार मूल्यों के आधार पर एक स्लैब वाले मकान के निर्माण में कम से कम 2 लाख रुपये से अधिक का खर्च आता है।
उच्च गुणवत्ता युक्त आवास का अनुमानित खर्च
1 सीमेंट – 100 बोरी 32000 रु
2 छड़ – 4 क्विंटल 24 हजार रु
3 बालू पर खर्च लगभग- 8000 रु
4 गिट्टी – 4 से 5 सौ फीट -24000
5 ईंट 9,000 नग = 45,000
6 खिड़की दरवाजा रोशनदान-10000 रु
7 मजदूरी = 40,000-45,000 रुपए
कुल राशि एक लाख पचासी हजार लगभग
इस प्रकार, चुना और इमल्सन या डिस्टेम्पर बिजली फिटिंग मिला कर कुल लागत 2 लाख रुपये से अधिक हो जाती है। सामग्री की कीमतों में और वृद्धि होने पर यह लागत और भी बढ़ सकती है। इसके विपरीत, सरकार द्वारा दी जाने वाली 1.20 लाख रुपये की अनुदान राशि इस खर्च का आधा भी पूरा नहीं कर पाती।
अनुदान राशि का हो पुनर्मूल्यांकन
लाभार्थियों का कहना है कि 2016 में शुरू हुई इस योजना में अनुदान राशि उस समय की कीमतों के हिसाब से तय की गई थी। लेकिन, पिछले नौ वर्षों में महंगाई तीन गुना बढ़ चुकी है, जिसके कारण 1.20 लाख रुपये में मकान का निर्माण असंभव हो गया है। लाभार्थियों ने मांग की है कि सरकार अनुदान राशि का पुनर्मूल्यांकन करे और इसे वर्तमान निर्माण लागत के अनुरूप बढ़ाए।
स्थिति चिंताजनक
कोरिया में कई पीएम आवास अधूरे पड़े हैं, जो इस योजना की सफलता पर सवाल उठाते हैं। अधूरे मकानों की वजह से लाभार्थी परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार को इस समस्या का तत्काल समाधान करना चाहिए। वे चाहते हैं कि अनुदान राशि को बढ़ाने के साथ-साथ निर्माण प्रक्रिया में पारदर्शिता और सहायता प्रदान की जाए।
हितग्राही बोले, किश्त में राशि कम पड़ रही इस वजह से हालत खराब
आवास योजना में इतनी कम राशि मिलने के बाद हितग्राही मकान बनाने में खुद को असहाय महसूस करने लगे है। हितग्राही ऐसे में अब इस योजना में देने वाली राशि की रकम बढ़ाने की मांग करने लगे है। किसी को एक किश्त मिली है तो किसी को दो किश्त मिली है। इससे उनके आवास निर्माण अधूरे हैं। वानांचल क्षेत्रो में प्रधानमंत्री आवास योजना का हाल बेहाल है। यहां भी मकान अधूरे पड़े हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शासन से किश्त की राशि कम मिल रही है। इसके चलते वे अपने सपने के घरों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं और कार्य रुक गए हैं।
रेत भी हो गई महंगी
अवैध रेत उत्खनन पर लगातार लगाम लगाने के असफल प्रयासों ने रेत के दाम बढ़ा दिए हैं । बारिश में रेत की उपलब्धता भी कम हो गई है। इसके कारण शहरी क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना में तेजी नहीं आ पा रही है। इसका मुख्य कारण यह है कि लोगों तक रेत नहीं पहुंच पा रहे। अगर पहुंच भी पा रही है तो मनमाने रेट के कारण हितग्राही रेत लेने से मना कर रहे हैं। वहीं अब कड़े कानून आ जाने के कारण रेत माफिया भी रेत ढोने में डर रहे हैं। इसके कारण रेत के दामों में लगातार बढोतरी हो रही हैं, जिससे आम लोगों के जेब में गहरा असर पड़ रहा है।
पहले से 10 हजार और घट गई राशि
ग्रामीणों का कहना है कि पूर्ववर्ती सरकार में आवास निर्माण में कुल 1 लाख 50 हजार रुपए मिलते थे जिसमें एक लाख 30 हजार मटेरियल और 20 हजार मजदूरी का मिलता था लेकिन वर्तमान में मटेरियल की राशि 10 हजार और कम हो गई अभी सिर्फ 1 लाख 20 हजार और मजदूरी के लिए लग्भग 20 हजार मनरेगा से दिए जा रहे हैं कुल मिला कर आवास निर्माण हेतु 1 लाख 40 हजार रुपए की राशि प्रदान की जा रही है।
दूरी के हिसाब से परिवहन मद बढ़ाने की आवश्यकता
प्रबुद्ध वर्ग का कहना है स्टीमेट में परिवहन व्यय का ख्याल रखना चाहिए क्योंकि जिला या ब्लॉक मुख्यालय में जो चीज जिस दाम में मिल रही है वही चीज 80 किलोमीटर वनांचल में उस दाम पर नही मिलेगी, वहां समान लेजाने में ही परिवहन खर्च बहुत अधिक आ जाता है जिससे हितग्राही की आर्थिक स्थिति खराब हो जाती है, और शायद यही कारण है कि आवास अधूरे रह जाते हैं।
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