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कोरिया@महाविद्यालय के सेवानिवृत्त प्राचार्य का जीपीएफ फंड भुगतान लिए वर्तमान व प्राचार्य हुए एक मत

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-रवि सिंह-
कोरिया,19 सितंबर 2025 (घटती-घटना)। कोरिया जिले के अग्रणी महाविद्यालय शासकीय रामानुज प्रताप सिंहदेव महाविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रभारी प्राचार्य अखिलेश चंद्र गुप्ता के भ्रष्टाचार की शिकायत जब सामने आई और जब शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय भारत सरकार तक की गई और जब वहां से जांच के लिए निर्देश प्राप्त हुआ जिसके आधार पर कलेक्टर कोरिया ने आयुक्त उच्च शिक्षा रायपुर को पत्र लिखा तब सेवानिवृत्त प्राचार्य हरकत में आए और उन्होंने अपने जीपीएफ फंड के जल्द भुगतान के लिए पुराने सानिध्य का फायदा उठाने का निर्णय लिया और वर्तमान प्रभारी प्राचार्य जो उनके कार्यालय में उनके अधीनस्थ थे से उन्होंने सांठगांठ कर ली और अब वह अपने जीपीएफ फंड के भुगतान के लिए तेजी से प्रयास कर रहे हैं जिसमें वर्तमान प्रभारी प्राचार्य का उन्हें सहयोग मिल रहा है,सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सेवानिवृत्त प्रभारी प्राचार्य अखिलेश चंद्र गुप्ता वर्तमान प्रभारी प्राचार्य को विश्वास में ले चुके हैं और जिसके बाद अब तथ्य छिपाते हुए जीपीएफ फंड के भुगतान की प्रक्रिया चालू कर दी गई है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सेवानिवृत्त प्रभारी प्राचार्य अखिलेश चंद्र गुप्ता वर्तमान प्रभारी प्राचार्य को पूरी तरह विश्वास में ले चुके हैं और जिसके बाद उनके जीपीएफ फंड के भुगतान की प्रकिया आरंभ करने के लिए वर्तमान प्रभारी प्राचार्य तैयार हो गए हैं। वैसे सूत्रों के द्वारा दी गई जानकारी यदि सही है तो क्या जांच जो सेवानिवृत्त प्रभारी प्राचार्य के विरुद्ध तय हो चुकी है क्या उसकी जानकारी छिपाते हुए वर्तमान प्रभारी प्राचार्य सेवानिवृत्त प्रभारी प्राचार्य के जीपीएफ फंड के भुगतान को हरि झंडी दे रहे हैं। नियमानुसार किसी शासकीय सेवक के विरुद्ध यदि जांच की प्रकिया जारी है खासकर आर्थिक अनियमिताओं के संबंध में जांच यदि होनी है उसके सेवानिवृत्ति संबधी स्वत्व भुगतान तब तक नहीं किया जाना है जबतक जांच पूरी न हो जाए। अखिलेश चंद्र गुप्ता जिन्होंने दो दशकों से ज्यादा समय के अपने कार्यकाल में जमकर भ्रष्टाचार किया जमकर अपनी जेब महाविद्यालय उपयोग की राशि से भरने का काम किया वहीं केवल एक नहीं इस बीच जिले में खुलने वाले प्रत्येक नवीन महाविद्यालय का भी प्रभारी प्राचार्य बनकर इन्होंने भ्रष्टाचार किया के खिलाफ तब पहली बार शिकायत सामने आई जब इन्होंने सेवानिवृत्त होने के छः माह बाद महाविद्यालय पहुंचकर ढेर सारे दस्तावेजों को आग के हवाले कर दिया था और जिसकी तस्वीर भी सामने आई थी।
माना जाता है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के सम्पूर्ण उन दस्तावेजों को आग के हवाले किया जो उन्हें आर्थिक अनियमितता का दोषी साबित कर सकते थे। वैसे अखिलेश चंद्र गुप्ता के सम्पूर्ण कार्यकाल की जांच किए जाने पर बहुत बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा होना तय है और यह भ्रष्टाचार महाविद्यालय आवश्यकताओं सहित महाविद्यालय में अध्यनरत छात्र छात्राओं के लिए सुविधा मुहैया कराने के नाम पर किया गया है और कहीं न कहीं यह घोर आर्थिक अनियमितता है। अब वर्तमान प्रभारी प्राचार्य जैसा कि सूत्रों का दावा है यदि सच में सेवानिवृत्त प्रभारी प्राचार्य अखिलेश चंद्र गुप्ता का सहयोग कर रहे हैं उनके जीपीएफ फंड के भुगतान का वह प्रयास आरंभ कर रहे हैं तो यह भी कहना गलत नहीं होगा यह सहयोग मिलीभगत से किया जा रहा सहयोग है जिसमें वर्षों का आपसी साथ कारण बन रहा है।
जांच के दौरान सेवानिवृत्त होने फलस्वरूप मिलने वाले भुगतान को रोकने का है प्रावधानःजानकार
शासकीय सेवा से सेवा निवृत्त होने के फलस्वरूप किसी शासकीय कर्मचारी को जो भी भुगतान किया जाना होता है वह तब रोके जाने का प्रावधान है जब किसी शासकीय सेवक पर गंभीर आर्थिक अनियमितता का आरोप है और जिसकी जांच चल रही हो,सेवानिवृत्त प्रभारी प्राचार्य अखिलेश चंद्र गुप्ता को जीपीएफ फंड का भुगतान किया जाना है जो जांच के दायरे में होने के कारण उन्हें भुगतान नहीं किया जाना चाहिए, इस संबंध में कम से कम विभागीय अनुमति प्राप्त कर ही कोई अग्रिम कार्यवाही की जाए ऐसा होना चाहिए ऐसा जानकार बताते हैं, लेकिन अखिलेश चंद्र गुप्ता वर्तमान प्राचार्य से सांठगांठ कर अपने जीपीएफ फंड का भुगतान कराने की फिराक में हैं ऐसा सूत्रों का दावा है,अब वर्तमान प्राचार्य केवल पुराने संबंध निभाने ऐसा कर रहे हैं या किसी प्रलोभन में वह ऐसा कर रहे हैं।
कई वर्षों के आय व्यय रजिस्टर का नहीं हुआ है ऑडिट,जीपीएफ फंड का भुगतान करने क्यों है जल्दबाजी
अखिलेश चंद्र गुप्ता के कार्यकाल के आय व्यय का कई वर्षों तक ऑडिट नहीं हुआ है,यह सूचना के अधिकार से प्राप्त कैशबुक पंजी साबित करती है,अब जब आय व्यय का ऑडिट नहीं हुआ है वह भी वर्षों तक क्यों अखिलेश चंद्र गुप्ता के जीपीएफ फंड के भुगतान में जल्दबाजी दिखा रहे हैं वर्तमान प्रभारी प्राचार्य,अखिलेश चंद्र गुप्ता के कार्यकाल में आय व्यय पंजीयों का कोई मतलब नहीं हुआ करता था और वह केवल कहने मात्र के लिए आय व्यय पंजी हैं और जो भ्रष्ट्राचार का असल नमूना है।
सेवानिवृत्त प्राचार्य प्रभारी प्राचार्यों के सेवानिवृत्त होने उपरांत होने वाले स्वत्व भुगतान के लिए क्या है उच्च शिक्षा विभाग का नियम
उच्च शिक्षा विभाग छत्तीसगढ़ के द्वारा 27 फरवरी 2024 का वह आदेश निरस्त कर दिया गया है जिसमें सेवानिवृत्त प्राचार्य
प्रभारी प्राचार्य को सेवानिवृत्त होते ही सेवानिवृत्त समय के सभी सेवा स्वत्व भुगतान कर दिए जाने चाहिए,नए आदेश दिनांक 4 जुलाई 2025 के अनुसार अब पुनः सेवानिवृत्त होने वाले प्राचार्य और प्रभारी प्राचार्य को बिना ऑडिट किसी तरह का सेवानिवृत्त समय होने वाला भुगतान नहीं किया जाना है,अखिलेश चंद्र गुप्ता ने तो कई वर्षों का ऑडिट नहीं कराया है ऐसे में उन्हें जीपीएफ फंड का भुगतान किया जाना अपने ही विभाग के नियम को झुठलाना है। क्या वर्तमान प्राचार्य अपने ही विभाग से नियम से अनजान हैं इसलिए वह भुगतान के लिए प्रयास कर रहे है या उन्हें कोई लालच है?
जांच में दोषी साबित होने पर कहां से होगी वसूली यदि जीपीएफ फंड का हो जाता है भुगतान?
अखिलेश चंद्र गुप्ता के सम्पूर्ण कार्यकाल के दौरान के आय व्यय की अनियमितताओं को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय भारत सरकार को शिकायत की गई है,जिसके बाद अब जांच आयुक्त उच्च शिक्षा रायपुर को करने पत्र लिखा गया है,यदि जांच में वह दोषी पाए जाते हैं मामला आर्थिक अनियमितता का तय हो जाएगा,ऐसे में वसूली की बात सामने आएगी,अब सवाल यह है कि यदि वसूली की बात सामने आई वसूली कहां से होगी यदि उनके जीपीएफ फंड का भुगतान कर दिया जाएगा,वर्तमान प्राचार्य क्या खुद भरपाई करेंगे अखिलेश चंद्र गुप्ता के आर्थिक भ्रष्टाचार से हुए महाविद्यालय के नुकसान का?
क्या वर्तमान प्रभारी प्राचार्य खेलना चाहते हैं अखिलेश चंद्र गुप्ता की तरह की पारी इसलिए चल रहे हैं उनके निर्देश पर?
अखिलेश चंद्र गुप्ता के ऊपर विभागीय जांच की अनुशंसा के बावजूद वर्तमान प्रभारी प्राचार्य उनके जीपीएफ का भुगतान करने जा रहे हैं,वैसे क्या वह अखिलेश चंद्र गुप्ता की तरह लंबी पारी खेलना चाहते हैं इसलिए ही वह अखिलेश चंद्र गुप्ता के निर्देश पर ऐसा करने की हिम्मत मंशा करने जा रहे हैं,अखिलेश चंद्र गुप्ता भ्रष्टाचार के 26 साल बिना किसी रोक टोक बीता चुके हैं,अब क्या उनसे प्रेरणा लेकर वर्तमान प्रभारी प्राचार्य भी ऐसा ही करना चाहते हैं।


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