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कोरिया/पटना@गजब सीएमओ साहब! अपने ही नगर पंचायत अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के कक्ष में बिना टाइल्स लगाए ही निकाल लिया पैसा?

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-रवि सिंह-
कोरिया/पटना,18 सितंबर 2025 (घटती-घटना)। अक्सर लोग इस कहावत को कहते हैं की डायन भी एक घर छोड़ देती है यह कहावत तब कही जाती है जब कोई अपनों को भी ना छोड़ता हो नुकसान पहुंचाने की मामले में, कुछ ऐसा ही मामला और इस कहावत से जुड़ा हुआ मामला सामने आया है वह है पटना नगर पंचायत के प्रथम सीएमओ सिकंदर सिदार की जो अपने अध्यक्ष व उपाध्यक्ष को भी नहीं छोड़ रहे हैं, उनके कक्ष में टाइल्स व रंग रोगन के नाम पर भी लाखों रुपए उन्होंने निकाल और दोनों के कक्ष में टाइल्स लगाने की भी वह बात करते हुए बिल लगा दिए लेकिन टाइल्स का पता ही नहीं है, सवाल तो तब उत्पन्न होता है कि जब टाइल्स लगी नहीं तो फिर बिल किसने दिया कहां से उन्होंने फर्जी बिल बनवाया बिना टाइल्स लगाए? क्या यह अपने अध्यक्ष व उपाध्यक्ष को भी पैसे कमाने के चक्कर में नहीं छोड़ रहे हैं, क्या यह नगर पंचायत पटना को प्रथम साल में ही भ्रष्टाचार के दलदल में धकेल कर पैसा कमाना चाह रहे हैं, यह बात सिर्फ इसलिए हो रही है क्योंकि अब उनके ऊपर लाखों रुपए के भ्रष्टाचार का आरोप लगने लगा है, जो दस्तावेज व जानकारी दैनिक घटती घटना को मिली है उसके अनुसार अभी तक वह 65 लाख रुपए से अधिक का भ्रष्टाचार कर चुके हैं, यदि इसकी जांच हो जाए तो इन्हें जेल जाने से कोई नहीं रोक सकता, लेकिन जांच करेगा कौन इतनी खबरें छपने के बाद अध्यक्ष उपाध्यक्ष का मंत्रियों के दरवाजा खटखटाने के बाद भी कार्यवाही करने की हिम्मत कोई भी नहीं जुटा पा रहा है, कलेक्टर के हटाने के बाद भी नहीं हटाए गए, जिसे लेकर यह सवाल उठता है कि आखिर किस मंत्री से इनकी रिश्तेदारी है जिस वजह इन्हें हटाना तो दूर उनके ऊपर कार्यवाही करने तक से लोग घबरा रहे हैं?
कलेक्टर द्वारा शिकायतों की जांच के लिए गठित जांच दल पहुंचता तो है पर बैरंग लौट जाता है
ज्ञात हो कि नव गठित नगर पंचायत पटना के सीएमओ ने एक बार फिर साबित किया है कि वह भ्रष्टाचार के लिए ही प्रथम नगर अधिकारी बनकर आए हैं,नगर विकास की राशि अपनी जेब में डालने के अलावा कोई ऐसी उपलब्धि वह अपने नाम नहीं कर पाए जिससे यह कहा जा सके कि वह विकास उद्देश्यों के साथ नगर आए थे प्रथम अधिकारी बनकर, चुनाव पूर्व पदस्थापना करवाकर नवगठित नगर पंचायत के प्रथम अधिकारी बनने का गौरव प्राप्त करने वाले सीएमओ सिकंदर सिदार की कार्यप्रणाली जब उजागर होने लगी उनकी ऐसी छवि सामने आने लगी जिसमें वह केवल स्वहित इंसान मात्र नजर आते हैं। नगर का विकास जहां उनका जिम्मा था वह केवल अपनी जेब का विकास करते नजर आ रहे हैं जिसमें हस्तक्षेप उन्हें बर्दाश्त भी नहीं, नगर के प्रथम चुनाव से पूर्व ही नगर में पदस्थ हुए सिकंदर सिदार किस तरह नगर विकास की राशि अपनी जेब में डाल रहे हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सुशासन तिहार जो शासन की महत्वाकांक्षी एक अभियान बतौर प्रदेश में गर्मियों के दिनों में जारी था जहां आमजनों की समस्या शिकायत सुनने आदर सत्कार से उन्हें आमंत्रित करना था उनके लिए कई व्यवस्थाएं करनी थीं उसमें भी इस अधिकारी ने भ्रष्टाचार को अंजाम दिया और जितनी राशि खर्च किया जाना बताया उसके एक भाग की भी राशि खर्च नहीं की,न अतिथियों के सत्कार के लिए कोई अच्छी व्यवस्था नहीं रही न ही आमजनों के लिए ही व्यवस्था बेहतर रही केवल खुद के लिए इसने जुगाड बनाया और पैसे निकालकर लम्बा चौड़ा बिल लगा दिया जो खर्च कम से कम कार्यक्रम में नहीं किया गया,अभी एक नई जानकारी के अनुसार सिकंदर सिदार ने अध्यक्ष,उपाध्यक्ष के कक्ष में टाइल्स लगाने के नाम पर लाखों रुपए निकाल लिए हैं, अध्यक्ष के कक्ष में जहां टाइल्स लगाया ही नहीं गया वहीं उपाध्यक्ष के कक्ष में पंचायत कार्यकाल के दौरान लगाए गए टाइल्स की ही मौजूदगी है,अब सिकंदर सिदार ने टाइल्स कहां लगाया किस अध्यक्ष के कक्ष में लगाया गया वही बता सकते हैं क्योंकि अध्यक्ष उपाध्यक्ष के कक्ष में टाइल्स नहीं लगाया गया है जबकि इस नाम से लाखों रुपए निकाले जा चुके हैं।
पीआईसी के बैठक से भी भाग रहे…
सीएमओ सिकंदर सिदार की कार्यप्रणाली को लेकर बताया जाता है कि आज तक पीआईसी सदस्यों से किसी भी मामले में अनुमोदन नहीं लिया गया है उसके द्वारा, यहां तक की पीआईसी सदस्यों की बैठक बुलाकर नगर से खुद भाग जाने की बात जरूर सामने आती रही है। आज नव गठित नगर पंचायत की स्थिति यह है कि यह एक मात्र अधिकारी सीएमओ के लिए एटीएम मशीन मात्र बनकर रह गई है और वह जब चाहे तब नगर विकास की राशि किसी भी खर्च के नाम से अपनी जेब में डाल सकता है। अध्यक्ष उपाध्यक्ष सहित पीआईसी सदस्य अब तक सीएमओ की कार्यप्रणाली को लेकर धैर्य ही बनाए नजर आ रहे हैं जबकि सीएमओ पीआईसी पर भी आरोप लगा रहा है और वह इसके लिए समाचारों में बयान दे रहा है,आज नव गठित नगर पंचायत में बयान देकर सीएमओ खुद को ही निर्वाचित भी साबित कर रहा है और वह मनमानी करता चला जा रहा है।।नगर की जनता ने ग्राम को नगर बनाकर विकास की कल्पना की थी लेकिन उन्हें क्या पता था कि उनकी कल्पना को बर्बाद करने उन्हें एक स्वेच्छाचारी अधिकारी मिल जाएगा जो अपने लिए ही केवल सोच रखने वाला होगा जो इंसानी सुविधा में ही सेंध लगाएगा। पीआईसी पर आरोप लगाने के लिए सिकन्दर सिदार समाचारों में जो बयान दे रहा है उसमें वह कह रहा है कि पीआईसी के अनुमोदन के अभाव में टेंडर निरस्त हो रहे हैं और विकास अवरुद्ध हो रहा है नगर का जबकि जब सिकंदर सिदार को जेब में अपने पैसा डालना होता है वह पीआईसी अनुमोदन की बात नहीं करता वह अपने अनुसार पैसा आहरण कर लेता है। पीआईसी से एक भी अनुमोदन नहीं लेने वाला अधिकारी अब अनुमोदन न मिलने की बात कह रहा है।
अपने ही अध्यक्ष उपाध्यक्ष से नहीं बन रही पर विपक्षी पार्षदों से संबंध मधुर हैं, क्यों?
पटना नगर पंचायत के सीएमओ का अपने निर्वाचित जनप्रतिनिधियों से सामंजस्य नहीं बैठ पा रहा है, भाजपा की सरकार में भाजपा के ही जनप्रतिनिधियों से संबंध ना बैठाना कहीं ना कहीं एक घटिया कार्यप्रणाली को प्रदर्शित करता है, नगर पंचायत के निर्वाचित अधिकाशं जनप्रतिनिधि आज सीएमओ को लेकर आक्रोशित हैं और वह सीएमओ को नगर के लिए घातक मान रहे हैं और वह इसकी सम्पूर्ण कार्यप्रणाली संपूर्ण कार्यकाल के जांच की भी बात करते सुने जाते हैं। पर वही पटना नगर पंचायत में भाजपा की सरकार है और भाजपा के ही अध्यक्ष उपाध्यक्ष हैं पर उनके साथ संबंध बिल्कुल भी अधिकारी का ठीक नहीं है पर वहीं विपक्षी पार्षदों के साथ घंटों बैठना है और उनके मन मुताबिक काम करने सिकंदर सिदार की वह दिलचस्पी है जो यह बताती है कि वह कांग्रेस विचारधारा से नगर पंचायत पटना को चलाना चाह रहे हैं, जिसमें सिर्फ भ्रष्टाचार ही प्रथम दृष्टि या देखने को मिल रहा है।
कोरिया जिले में बैठकर बलरामपुर जिले से किस बात का मोह?
सीएमओ नगर विकास की राशि जेब में डालने के लिए अपने गृह क्षेत्र बलरामपुर तक के फर्म का उपयोग करते हैं ऐसा बताया जाता है जिस फर्म के खाते में केवल भ्रष्टाचार का पैसा वह भेजते हैं उस फर्म से कोई लेना देना नगर पंचायत का नहीं होता वह पूर्ण रूप से सीएमओ के हाथों की कठपुतली फर्म मात्र है। जिले से काफी दूर संभागीय मुख्यालय से भी दूर के एक फर्म के नाम के बिल से भी सीएमओ नगर विकास की राशि आहरित करता है,बताया जाता है उक्त फर्म बलरामपुर के किसी व्यक्ति का है जो सीएमओ के करीबी व्यक्ति का फर्म है जो बिल वाउचर सिकंदर सिदार को भ्रष्टाचार के लिए उपलब्ध कराता है,अब सोचने वाली बात है कि जो सामान कोरिया जिले एमसीबी जिले सूरजपुर जिले या अंबिकापुर जिले में नहीं मिल पा रहा है वह सामान दूरस्थ जिले बलरामपुर में मिल रहा है। यह भ्रष्टाचार नहीं तो और क्या है समझना होगा।
कलेक्टर भी सीएमओ के सामने आदेश निकालने के बाद बौना साबित हो गई
कलेक्टर कोरिया सीएमओ की भ्रष्टाचार से अवगत हुईं और उन्होंने इसे हटाने का भी प्रयास किया लेकिन किसी बड़े मंत्री का रिश्तेदार होने का धौंस दिखाकर यह बच निकला या कहीं न कहीं कलेक्टर कोरिया को ही अपने आदेश को वापस लेने वह मजबूर कर ले गया जो वह कहता भी सुना जाता है कि यदि मुझे हटाया गया हटाने वाला भी हटेगा वह जानता है,कुल मिलाकर नगर पंचायत पटना में केवल भ्रष्टाचार का ही राज कायम है जो केवल सीएमओ कर पा रहा है जिसे रोकने में सक्षम निर्वाचित जनप्रतिनिधि भी नहीं क्योंकि मंत्री से जुड़ा व्यक्ति सीएमओ है जो अध्यक्ष उपाध्यक्ष पीआईसी से ऊपर है जिसे किसी अनुमोदन या किसी सहमति की जरूरत नहीं किसी मामले में। सीएमओ सत्ताधारी दल के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को ही चुनौती दे रहा है लगातार जिसे रोकने की हिम्मत न जिला प्रशासन जुटा पा रहा है और न ही भाजपा ही मामले में कुछ कर पा रही है,आज स्थिति यह है कि सीएमओ को जब मन तब नगर विकास की राशि जेब में डाल रहा है और नगर को वह आर्थिक रूप से खोखला करता चला जा रहा है।
यदि किसी मंत्री का इन पर आशीर्वाद नहीं है तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है?
सिकंदर सिदार नव गठित नगर पंचायत पटना के लिए किसी अभिशाप से कम नहीं है, प्रथम अधिकारी बनने का गौरव पाने वाले सीएमओ ने नव गठित नगर पंचायत को अपने लिए भ्रष्टाचार का अड्डा बना लिया है और जो जानकारियां सामने आ रही हैं उसके अनुसार सीएमओ नगर विकास की राशि कभी मंत्री सत्कार,कभी तीर्थ यात्रियों के लिए वाहन व्यवस्था कभी तिरंगा यात्रा के नाम से निकाल रहा है और अपने जेब में डाल रहा है,सीएमओ किसी मंत्री का खास है यह रिश्तेदार है वह ऐसा कहता है और एक भय भी उत्पन्न करता है इस मामले में वहीं वह किस मंत्री का खास है किसका उसे संरक्षण है यह सामने आना बाकी है, वैसे वह यदि किसी मंत्री का रिश्तेदार नहीं है तो क्यों उसके ऊपर कार्यवाही नहीं हो रही है,सिकन्दर सिदार को क्यों नव गठित नगर पंचायत को आर्थिक रूप से खोखला करने का अधिकार मिला हुआ है,वैसे यह अधिकार उसे केवल भ्रष्टाचार के लिए मिला हुआ है और विकास विषय में जनप्रतिनिधियों के सम्मान के विषय में उसे कोई निर्देश या आदेश नहीं मिला है यह आश्चर्य का विषय है।
नगर में भाजपा की सरकार और भाजपा के ही अध्यक्ष उपाध्यक्ष परेशान फिर भी ऐसे अधिकारियों को संरक्षण किसका?
नव गठित नगर पंचायत में भाजपा की पहली बार सरकार बनती देखी गई,सरकार भाजपा की बनी तो ऐसा लगा कि यह ट्रिपल इंजन वाली सरकार होगी नव गठित नगर का अच्छा विकास होगा लेकिन जब प्रथम सीएमओ की कार्यप्रणालियों को देखा सुना जाने लगा यह साफ हो गया नगर विकास की जगह नगर बर्बाद करके मानेगा सीएमओ,अध्यक्ष उपाध्यक्ष आज सीएमओ द्वारा उपेक्षित हैं और जिन्हें वह कुछ नहीं समझता न पीआईसी से उसे कोई लेना देना होता है वह खुद निर्णय लेता है पैसा निकालता है और जेब में डालता है। अध्यक्ष उपाध्यक्ष जिस अधिकारी से परेशान हैं उसे किस नेता या अधिकारी का संरक्षण है यह एक बड़ा सवाल है,वैसे संरक्षण बिना वह इतने बड़े स्तर का भ्रष्टाचार नहीं कर सकता जिसमें वह अध्यक्ष उपाध्यक्ष के कक्ष के नाम पर ही लाखों डकार जाए।
भ्रष्टाचार के कई प्रमाण सिर्फ इंतजार जांच का ,जो करेगा कौन?
सिकंदर सिदार के अब तक के कार्यकाल की यदि जांच की जाए तो यह साबित होना तय बताया जा रहा है कि उसने नवगठित नगर पंचायत के विकास की राशि को केवल जेब में डालने का काम किया है,सीएमओ लगातार भ्रष्टाचार करते हुए ऐसे ऐसे आहरण कर चुका है जिसमें वह कभी भी दोषी साबित हो जाएगा,कभी अलाव के नाम पर पैसा डकारना,कभी होर्डिंग,कभी मंत्री अंबिकापुर आए और पटना से खर्च कभी सुशासन तिहार के नाम पर खर्च कभी तिरंगा यात्रा पर खर्च कभी कुछ कभी कुछ प्रतिदिन केवल पैसा निकालर जेब में डालना ही सीएमओ का काम है और जांच होने पर निश्चित यह दोषी साबित होगा जो बताया जाता है,वैसे यह जांच कौन करेगा क्योंकि कलेक्टर को सिकंदर सिदार कुछ नहीं समझता उनके द्वारा गठित जांच दल को देखकर पिछले दरवाजे से भाग जाता है वहीं जब कलेक्टर उसे हटाए जाने की कार्यवाही करती हैं वह अपनी धौंस दिखाकर कलेक्टर को भी दबा ले जाता है जिसके बाद बड़ा सवाल है कि जांच करेगा कौन।


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