- अब छत्तीसगढ़ सरकार लेगी बर्खास्तगी का बड़ा निर्णय
- मोदी की गारंटी के नाम पर अपने वादों से मुक¸री सरकार:गुलाब कमरो
- पूर्व विधायक का आरोप एनएचएम कर्मचारियों को दमनकारी नीति दिखाकर बर्खास्तगी की धमकी दी जा रही है…

-राजन पाण्डेय-
कोरिया,17 सितंबर 2025 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ के 16 हजार एनएचएम कर्मचारी हड़ताल पर हैं, जिससे सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं ठप पड़ी हैं। सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत बेकार रही। अब सरकार ने 16 सितंबर तक काम पर न लौटने वाले कर्मचारियों को सेवा समाप्ति की चेतावनी दी है। 26 दिनों से हड़ताल पर चल रहे प्रदेशभर के एनएचएम कर्मचारियों पर सरकार के अल्टीमेटम का कोई असर नहीं हुआ। छत्तीसगढ़ सरकार ने हड़ताली कर्मचारियों को मंगलवार तक काम पर लौटने का अल्टीमेटम दिया था, लेकिन मंगलवार शाम तक कोई भी कर्मचारी अपने काम पर नहीं लौटा। अपने अल्टीमेटम में सरकार ने कहा था कि मंगलवार तक काम पर नहीं लौटने वाले कर्मचारियों को एक महीने का नोटिस देकर नौकरी से निकाल दिया जाएगा, साथ ही उनके पद को रिक्त मानकर नई भर्तियों की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी जाएगी। इधर, इस अल्टीमेटम का समय खत्म हो जाने के बाद भी स्वास्थ्य कर्मचारी लगातार अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। इन कर्मचारियों का कहना है कि सरकार ने अभी तक उनकी एक भी मांग को लिखित रूप से स्वीकार नहीं किया है। यह कर्मचारी अपनी दस सूत्रीय मांगों को लेकर पिछले 26 दिनों से हड़ताल पर हैं, मंगलवार को इस हड़ताल का 27वां दिन था। इधर, कांग्रेस ने सरकार के अल्टीमेटम को दमनकारी नीति बताते हुए वादाखिलाफी का आरोप लगाया है।
एनएचएम कर्मचारी संघ ने अपनी हड़ताल के दौरान सरकार से निम्नलिखित प्रमुख मांगों को पूरा करने की मांग की हैं…
- संविलियन और स्थायीकरण
- पब्लिक हेल्थ कैडर की स्थापना
- ग्रेड पे निर्धारण
- कार्य मूल्यांकन में पारदर्शिता
- 27 प्रतिशत लंबित वेतन वृद्धि
- नियमित भर्ती में सीटों का आरक्षण
- अनुकंपा नियुक्ति
- मेडिकल अवकाश की सुविधा
- स्थानांतरण नीति का प्रावधान
- न्यूनतम 10 लाख रुपये का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा
चेतावनी से बढ़ सकता है संघर्ष
स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को दी गई बर्खास्तगी की चेतावनी से कर्मचारियों और सरकार के बीच संघर्ष और बढ़ सकता है। जानकारों के मुताबिक, कर्मचारी लंबे समय से अपनी दस सूत्री मांगों को लेकर संघर्षरत हैं। इस बार कर्मचारियों ने दबाव बनाने के लिए अनिश्चितकालीन हड़ताल का सहारा लिया है। इधर,बिगड़ती स्वास्थ्य सेवाओं के चलते सरकार भी दबाव में है और वह लोगों को हो रही परेशानियों को जल्द ठीक करना चाहती है। इस अल्टीमेटम के चलते दोनों पक्षों के बीच संघर्ष बढ़ने की संभावनाएं जताई जा रही हैं।
कर्मचारियों की हड़ताल का असर
एनएचएम कर्मचारी हड़ताल छग के चलते स्वास्थ्य विभाग का सिस्टम बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। खासकर,डेटा एंट्री और डेली रिपोर्टिंग में भारी कमी आई है। इससे राज्य के स्वास्थ्य आंकड़ों पर असर पड़ा है, और विभागीय कामकाजी प्रक्रिया में भी रुकावट आई है। केवल 38 प्रतिशत कर्मचारियों की उपस्थिति स्वास्थ्य केंद्रों में दर्ज की गई है,जबकि 60 प्रतिशत से ज्यादा संविदा कर्मचारी हड़ताल पर हैं।
हड़ताल से प्रभावित सेवाएं
एनएचएम के तहत कर्मचारियों का मुख्य कार्य शिशु मृत्यु दर,मातृ मृत्यु दर,मलेरिया और टीबी की रोकथाम करना,और ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों में किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है। इस हड़ताल के कारण प्रदेश में इन सभी कार्यों का संचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। विशेषकर,ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह से ठप पड़ी हैं।
बर्खास्तगी और इस्तीफे की स्थिति
एनएचएम संविदा कर्मचारी द्वारा हड़ताल से पीछे न हटने पर,राज्य सरकार ने 25 कर्मचारियों को बर्खास्ति कर दिया था। इसके बाद पूरे प्रदेश के एनएचएम कर्मचारियों ने अपनी इस्तीफे की प्रतियां जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को सौंप दी। यह कदम कर्मचारियों के बीच गहरे असंतोष का प्रतीक था।
मोदी की गारंटी के नाम पर अपने वादों से मुक¸री सरकार:गुलाब कमरो
एनएचएम के कर्मचारियों के खिलाफ बर्खास्तगी आदेश जारी किए जाने को लेकर पुर्व विधायक गुलाब कमरो ने हल्ला बोला है कमरो ने जारी बयान में कहा कि मोदी की गारंटी के नाम पर वोट मांगने वाली पार्टी अब अपने वादों से मुकर रही। एनएचएम कर्मचारियों को दमनकारी नीति दिखाकर बर्खास्तगी की धमकी दी जा रही है। एनएचएम कर्मचारियों की मांगों को पूरा किया जाए ताकि वे जल्द से जल्द अपने कार्यों पर वापस जाएं जिससे आम जनता को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ प्राप्त हो सके। कमरो ने कहा कि मोदी की गारंटी का अर्थ अब जुमलों की पैकेजिंग! हो गया है 10 लाख का इलाज कहा अब छत्तीसगढ़ में आयुष्मान से प्राइवेट अस्पतालों में इलाज नही हो पा रहा है निजी अस्पताल इस कार्ड को नकार रहे है तो बताइए ये गारंटी है या गरीबों के साथ धोखाधड़ी,पूर्व विधायक ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि सरकार कर्मचारियों की मांग को शीघ्र पूरा करे।
विभाग ने कई बिंदुओं का जारी किया है आदेश
ज्ञात हो कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संविदा कर्मचारी संघ के द्वारा प्रस्तुत मांगों के संबंध में दिनांक 13/9/25 को आयोजित राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की कार्यकारी समिति द्वारा सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए सकारात्मक रूप से समाधान किये जाने की बात कहते हुए कई बिंदुओं का आदेश जारी किया गया है जिसका विवरण निम्नानुसार है…
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अंतर्गत प्रचलित मानव संसाधन नीति 2018 की कंडिका क्रमांक-35.8 अंतर्गत दुर्घटना अवकाश में प्रावधानित तीस दिन के अवैतनिक अवकाश को दुर्घटना/गंभीर बीमारी की चिकित्सकीय आवश्यकता को दृष्टिगत रखते हुए मानवीय आधार पर सवैतनिक अवकाश किया गया है।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अन्तर्गत किसी भी संविदा कर्मचारी के वार्षिक कार्य मूल्यांकन में पारदर्शिता सुनिश्चित किये जाने हेतु प्रतिकूल टिप्पणी की स्थिति में कार्य सुधार नोटिस/सेवा समाप्ति के पूर्व नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत के तहत सुनवाई का पर्याप्त अवसर दिए जाने हेतु समिति द्वारा राज्य,जिला एवं विकासखण्ड कर्मचारियों हेतु स्वीकारकर्ता एवं अपीलीय अधिकारी के सबंध में निर्देश जारी कर दिए गये है तथा इस हेतु ऑनलाइन पोर्टल आधारित व्यवस्था भी की जा रही है।
- माह जुलाई 2023 की स्थिति में कार्यरत संविदा कर्मचारियों को 5 प्रतिशत अतिरिक्त वेतन वृद्धि प्रदान किये जाने हेतु राज्य कार्यकारिणी कार्य समिति द्वारा सैद्धांतिक सहमति दी गई तथा निर्णय लिया गया कि वित्त विभाग,छत्तीसगढ़ शासन से सहमति प्राप्ति उपरांत वेतन वृद्धि प्रदान की जाए जिस सम्बन्ध में कार्यवाही भी प्रचलन में है।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अन्तर्गत समस्त संविदा मानव संसाधन को स्वास्थ्य बीमा की सुविधा दिए जाने की प्रक्रिया प्रारंभ करने का निर्णय भी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की कार्यकारिणी समिति की बैठक में लिया गया। इस हेतु एचआरएमआईएस पोर्टल में कर्मचारी परिवार विवरण प्रविष्टि की कार्यवाही पूर्व से ही प्रक्रियाधीन है।
- येड पे,अनुकम्पा नियुक्ति इत्यादि जैसे मानव संसाधन नीति से जुड़े अन्य विषयों के सम्बन्ध में संयुक्त संचालक एनएचएम की अध्यक्षता में सात सदस्यीय राज्य स्तरीय समिति गठित की गयी है जो विभिन्न राज्यों के साथ ही छत्तीसगढ़ राज्य के विभिन्न विभागों में इस सम्बन्ध में प्रचलित प्रावधानों,पूर्व में गठित समिति के प्रस्तावों,राज्य में पूर्व से प्रचलित नियमों इत्यादि का अध्ययन कर निश्चित समय सीमा (गठन के तीन माह) के भीतर अपना प्रतिवेदन शासन को प्रस्तुत करेगी ।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मानव संसाधन नीति-2018 की कंडिका-42 के अंतर्गत स्थानांतरण नीति पहले से प्रावधानित है, जिसमें एनएचएम कर्मियों की मांग अनुसार वांछित बदलाव के सम्बन्ध में भी यह समिति अपनी सुझाव देगी। जिलों से सुझाव आमंत्रित किये जाने हेतु समिति द्वारा पत्र भी प्रेषित किया जा चुका है। दुःखद है कि कर्मचारियों के हित में इतने निर्णय लिए जाने के उपरान्त भी एनएचएम कर्मचारी आज दिनांक तक अनाधिकृत रूप से अपने कार्य से अनुपस्थित हैं, यह न केवल एक लोक-सेवक के रूप में अपने कर्तव्यों के प्रति अवहेलना है बल्कि आमजन के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के महत्व को देखते हुए मानवीय आधार पर भी पूर्णतः अस्वीकार्य है। अतः लोकहितार्थ उक्त सम्बन्ध में आप सभी को निर्देशित किया जाता है कि 1. दिनांक 18 अगस्त 2025 से जिला के सभी अनुपस्थित अधिकारी कर्मचारियों को प्राकृतिक न्याय के तहत दिनांक 29.08.2025 को कारण बताओं नोटिस जारी कर स्पष्ट रूप से अपने कार्यालय में उपस्थिति दिये जाने के सम्बन्ध में सूचित किया गया था कि उपस्थित नहीं होने की स्थिति में उनके विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्यवाही की जायेगी तथा उन्हे सेवा से पृथक किया जा सकता है,पुनः निर्देश जारी किया जाए कि जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू रूप से संपादित किये जाने हेतु दिनांक 16 सितम्बर 2025 तक कार्यालयीन समय के अंतर्गत अपने कार्यालय में उपस्थिति देवें। इसके बावजूद भी उपस्थिति नहीं देने वाले सभी अधिकारी/कर्मचारी को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मानव संसाधन नीति-2018 के खंड 34.2 के अनुसार एक माह का नोटिस देते हुए सेवा समाप्ति की कार्यवाही करें,तथा इससे होने वाले रिक्तियों पर नियमानुसार नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की जाए। एनएचएम संविदा कर्मचारियों की अनाधिकृत अनुपस्थिति छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम,1965 एवं मानव संसाधन नीति-2018 के खंड 34.3 का उल्लंघन है एवं कदाचार की श्रेणी में आता है। अतः पूर्व में प्रेषित निर्देशानुसार कार्य नहीं वेतन नहीं के सिद्धांत का पालन करते हुए अनाधिकृत अनुपस्थिति अवधि के वेतन/मानदेय का भुगतान किसी भी कर्मचारी/अधिकारी को नहीं किया जाये।
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur