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कोरिया/पटना@पटना नगर पंचायत सीएमओ भाग रहे हैं कभी कलेक्टर के जांच से तो कभी सामान्य सभा की बैठक से

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-रवि सिंह-
कोरिया/पटना,16 सितंबर 2025 (घटती-घटना)। कोरिया जिले में एक ऐसे अधिकारी को लेकर काफी कुछ सुनने देखने को मिल रहा है जिसे इंसानों से जुड़ी बड़ी जिम्मेदारी दी गई है जहां प्रतिदिन उसे इंसानी समुदाय के बीच रहना है उनके दुःख-सुख आवश्यकताओं को सुन समझकर निर्णय लेना है लेकिन वह इंसानों से ही भाग रहा है और कुछ चापलूसों और जी हुजूरी वाले लोगों को छोड़कर वह किसी और से न मिलना पसंद करता है न ही वह किसी की सहायता सहूलियत के लिए काम कर रहा है,यह अधिकारी ऐसा है जिससे अब जिले की जिलाधीश भी हार मान चुकी हैं और उनके निर्देश भी मानना यह आवश्यक नहीं समझता उनके निर्देशों में भी पलायन को यह सही रास्ता मानता है,थक हारकर सब कुछ जानकर कलेक्टर ने अधिकारी को इंसानी जिम्मेदारी से मुक्त करने का भी प्रयास किया था लेकिन ऊंची पकड़ पहुंच वाला यह अधिकारी कलेक्टर के आदेश को भी अमान्य करा ले गया और लगातार वह पद पर बना हुआ है लगातार वह इंसानी समुदाय के लिए परेशानी बन रहा है।
यह सुर्खियां कोई और नहीं नवगठित नगर पंचायत पटना का मुख्य नगर पालिका अधिकारी बटोर रहा है और वह नवगठित नगर पंचायत को एक निराश,निराश और संवेदनहीन नगर बनाने में लगा है, सिकंदर सिदार नाम के उक्त अधिकारी को नव गठित नगर पंचायत का जिम्मा यह सोचकर प्रदान किया गया था कि वह नगर के नव गठित नगर के विकास को नया आयाम देंगे लेकिन स्थिति यह है कि एक तरफ नगर के निर्वाचित जनप्रतिनिधि उनसे परेशान हैं वहीं नगर की जनता से वह इतने दूर हैं कि वह उनसे मिलने की भी सोच नहीं सकते,एक दो चापलूसों के साथ नगर को नव गठित नगर को केवल और केवल आर्थिक रूप से अपने लिए सिकंदर सिदार धनार्जन उद्देश्य से उपयोग कर रहे हैं जहां आय व्यय की जानकारी वह साझा भी नहीं करना चाहते न ही वह नियमानुसार पीआईसी से अनुमोदन लेना चाहते हैं,एक तरफ विपक्ष जहां नगर की अव्यवस्थाओं को लेकर आंदोलन कर रहा है दूसरी तरफ नगर को एक नगर विकास के लिए प्राप्त राशि को सिकन्दर सिदार अपने हित उद्देश्यों की पूर्ति लिए खर्च कर रहा है। अधिकारी के मनमाने और स्वेच्छाचारिता पूर्ण कार्यप्रणाली को लेकर जहां निर्वाचित जनप्रतिनिधि परेशान हैं वहीं अधिकारी की मनमानी ऐसी है कि वह निर्वाचित जनप्रतिनिधियों सहित पीआईसी को भी महत्व नहीं देते हैं और बैठक खुद बुलाकर भाग जाते हैं,बताया जा रहा है कि बकायदा निंदा भी पीआईसी बैठक की हुई लेकिन सिकंदर सिदार पर कोई असर नहीं पड़ा क्योंकि वह पहुंच पकड़ से पद पर है उसे हटाना नामुमकिन है उसका लोगों से ही कहना है खासकर अपने चापलूसों से। अधिकारी की मनमानी और स्वेच्छाचारिता पूर्ण कार्यप्रणाली का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि जब 15 सितम्बर को अध्यक्ष द्वारा सामान्य सभा की बैठक बुलाई गई एक दिन पूर्व सभी निर्वाचित सदस्यों को साथ ही अधिकारी को सूचना दी गई फिर भी सिकंदर सिदार नहीं पहुंचा बैठक में वह नगर में रहते हुए बैठक का बहिष्कार कर गया। वैसे इस तरह की स्वेक्षाचारिता क्षमा योग्य नहीं होनी चाहिए निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का यह अपमान जनता का अपमान है नगर की लेकिन ऐसा क्या अधिकारी को आश्वासन मिला हुआ है की वह लगातार जनता और जनप्रतिनिधियों का अनादर कर रहा है और पद पर बना हुआ है। बताया जा रहा है कि अध्यक्ष काफी निराश हैं और वह पूरे मामले में केवल इसलिए शांति से धैर्य कायम किए हुए हैं क्योंकि सत्ताधारी दल का होने के कारण वह किसी आंदोलन या धरना का विचार मन में लाएं यह अनुचित होगा और इसका गलत संदेश भी जाएगा वरना नगर अध्यक्ष की तेज तर्रार छवि से लोग अवगत हैं ऐसा बताया जाता है और लोगों का मानना है कि वह एक दिन में ऐसे अधिकारी को नियम कायदों से उसकी हद समझा सकती हैं जिससे उनके पास स्वयं सहित पारिवारिक 15 वर्षों का इतिहास है।
पहले खुद पीआईसी बैठक बुलाकर नदारद रहा अधिकारी,अब अध्यक्ष की बुलाई सामान्य सभा से भी नदारद रहा सिकंदर सिदार
मुख्य नगर पालिका अधिकारी की स्वेच्छाचारिता पूर्ण कार्यप्रणाली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह खुद पीआईसी की बैठक बुलाता है और बैठक में आए जनप्रतिनिधियों को छोड़कर बैठक से भाग जाता है,पीआईसी नगर पंचायत की वह समिति होती है जो नगर विकास के निर्णय लेती है एक तरह से यह नगर पंचायत का मंत्रिमंडल होता है,मंत्रिमंडल की बैठक से अधिकारी बिना बताए चला जाए और फिर न आए ऐसा किया जाना जनप्रतिनिधियों का भी अनादर है साथ ही यह नगर की उस जनता का अनादर है जिस जनता ने अपना प्रतिनिधि सम्मान से चुनकर अपने साथ ही नगर विकास के लिए भेजा है। बताया जाता है कि सिकन्दर सिदार यह व्यवहार जानबूझकर करता है और ऐसा वह अपमानित करने के हिसाब से करता है और इसे वह अपने चापलूसों के साथ उत्साह से साझा भी करता है।
पदस्थ होने से लेकर अब तक करोड़ों रूपये का वारा न्यारा कर चुका है सिकंदर सिदार,पीआईसी का अनुमोदन भी नहीं उसके पास
बताया जाता है कि सिकन्दर सिदार जबसे मुख्य नगर पालिका अधिकारी पटना बना है तबसे वह करोड़ों रुपए नगर विकास मद सहित अन्य मद से निकाल चुका है,उसके द्वारा पीआईसी का अनुमोदन भी प्राप्त नहीं किया गया है,बताया जाता है कि उसने जिस तरह आहरण किए हैं वह सीधे तौर पर भ्रष्टाचार है और वह विभिन्न फर्मों से सेटिंग करके पैसा निकालता है और अपने निजी खर्च और बचत में उपयोग करता है। माना जा रहा है कि अब तक के जितने भी आहरण हैं वह बड़ा भ्रष्टाचार साबित हो सकते हैं और वह इसलिए भी लगातार भाग रहा है छिप रहा है। जिन फर्मों के नाम से आहरण किया जाता है उसमें पटना से लेकर बलरामपुर तक के फर्म शामिल हैं जहां का वह निवासी है,अब समझा जा सकता है कि आखिर बलरामपुर से वह क्या ऐसा मंगवा रहा है जिसकी उपलब्धता कोरिया सरगुजा में नहीं है,यह सीधा भ्रष्टचार है।
भाजपा की नगर सरकार फिर भी अध्यक्ष उपाध्यक्ष अपमानित तिरस्कृत एक अधिकारी से
यह एक विडंबना है कि सुशासन वाली सरकार नव गठित नगर पंचायत पटना में भ्रष्ट अधिकारी के भरोसे सुशासन स्थापित करना चाह रही है,सिकंदर सिदार ऐसा अधिकारी है जिसने सुशासन तिहार शिविर आयोजन में भी लम्बा चौड़ा भ्रष्टाचार किया है और सुशासन को ही धता बताने का काम किया है,टेंट पंडाल सहित अन्य खर्चों की यदि बानगी देखी जाए तो सिकंदर सिदार ऐसे ऐसे खर्चों के साथ भ्रष्टाचार कर चुका है कि जिसे यदि देखा जाए यदि सार्वजनिक किया जाए नगर की जनता ही आक्रोशित हो जाएगी की बिना निर्वाचित नगर के जनप्रतिनिधियों की जानकारी के उसने नगर विकास के पैसे को स्व विकास में लगा दिया है। पूरा आहरण और खर्च केवल अपनी जेब भरने के लिए उसने किया है यह आसानी से हिसाब किताब देखकर समझा जा सकता है।
कभी भी हो सकता है आंदोलन,कभी भी स्थिति हो सकती है बेकाबू
सिकंदर सिदार की मनमानी उसकी स्वेच्छाचारिता पूर्ण कार्यप्रणाली साथ ही नगर विकास के पैसे से ऐशो आराम का उसका तरीका निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को रास नहीं आ रहा है,उसने नगर विकास के पैसे को केवल जेब में डाला है यह अंदर खाने चर्चा है,वैसे अब स्थिति नगर पंचायत की ऐसी है कि कभी भी आंदोलन या बड़ा विद्रोह संभव है और अधिकारी के खिलाफ यह आक्रोश कभी भी विपरीत स्थिति उत्पन्न नगर पंचायत में खड़ी कर सकती है।


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