बिलासपुर,05 सितम्बर 2025। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग,विशेषकर दंतेवाड़ा और आसपास के इलाकों में स्कूली बच्चों की जिंदगी खतरे में है। इन क्षेत्रों में छात्र-छात्राएं टूटी हुई पुलिया और उफनती नदियाँ पार कर स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं। बच्चों की इस दयनीय स्थिति को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने खुद पहल करते हुए स्वत: संज्ञान लिया है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति विभू दत्त गुरु की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि यह मामला बच्चों की जान और शिक्षा से जुड़ा है और ऐसी स्थिति को लंबे समय तक नजऱअंदाज़ नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने राज्य सरकार को सख्त निर्देश देते हुए पूरी स्थिति पर विस्तृत जानकारी पेश करने को कहा है।
अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी। यह मामला तब उजागर हुआ जब मीडिया रिपोर्ट्स में बच्चों की तस्वीरें और वीडियो सामने आए, जिनमें वे जान जोखिम में डालकर पानी भरी नदियाँ पार करते दिखाई दे रहे थे। इसके बाद कोर्ट ने इस गंभीर मुद्दे को स्वतः संज्ञान में लिया। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल ने कोर्ट को बताया कि प्रभावित क्षेत्र में स्थायी पुल निर्माण के लिए प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है। पहले तकनीकी जांच में 12 बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा गया था।
जिसके बाद कांकेर कलेक्टर ने जवाब भेजकर प्रस्ताव में जरूरी संशोधन किए। यह संशोधित डीपीआर 20 अगस्त 2025 को गृह मंत्रालय को भेज दी गई है। मंजूरी मिलने के बाद निविदा प्रक्रिया शुरू कर निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
कोर्ट ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्हें जोखिम में डालकर शिक्षा के लिए मजबूर करना किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं है। कोर्ट ने राज्य सरकार से केंद्र सरकार के साथ हुई बातचीत और अब तक की पूरी कार्रवाई का नया हलफनामा पेश करने का आदेश दिया है।
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