- महाविद्यालय की भूमि पर पुलिस अधीक्षक कार्यालय का निर्माण अब राजनीतिज्ञों के लिए राजनीतिक मुद्दा बन गया
- कांग्रेस ने किया विरोध,भाजपा विधायक के बाद अब भाजपा जिलाध्यक्ष आए पुलिस अधीक्षक कार्यालय निर्माण के पक्ष में
- क्या महाविद्यालय परिसर में एसपी ऑफिस बनाना जिला प्रशासन की मजबूरी,जबकि नालंदा परिसर के लिए उपयुक्त है जगह?
- क्या जिला प्रशासन ने गुपचुप तरीके से किया जमीन का आबंटन,अब हो रहा विरोध?
- भूमिपूजन के बाद उठ रहे सवाल,महाविद्यालय प्रशासन समेत जनप्रतिनिधि,छात्र.छात्राओं समेत छात्र संगठन भी हुए लामबंद
- सत्ता पक्ष के भी जनप्रतिनिधि उठा रहे सवाल,लेकिन विधायक ने कहा सही है जगह का चयन
- वर्तमान में नालंदा परिसर के लिए मानस भवन के आगे रिक्त शासकीय जमीन का किया गया है चयन जबकि जिस जगह पर एसपी ऑफिस बनना है उस जगह पर बनाया जा सकता है नालंदा परिसर
- वर्तमान में सिविल लाइन पर स्थित है एसपी ऑफिस,उस जगह पर भी किया जा सकता है नवनिर्माण लेकिन प्रशासन कॉलेज के पास बनाने के लिए परेशान


-रवि सिंह-
कोरिया,02 सितंबर 2025 (घटती-घटना)। कोरिया जिले में नए पुलिस अधीक्षक कार्यालय के निर्माण का मामला अब राजनीतिज्ञों के लिए राजनीतिक मुद्दा बन गया है। विपक्ष अब मामले में सामने से आकर महाविद्यालय परिसर में पुलिस अधीक्षक कार्यालय निर्माण का विरोध करने लगा है वहीं अब सत्तापक्ष मामले में पुलिस अधीक्षक कार्यालय निर्माण के पक्ष में खड़ा है और वह नए किसी निर्माण में बाधक बनने की बजाए निर्माण में सहयोगी बनकर साथ निभाने की बात कर रहा है। एक तरफ दो-दो महाविद्यालय प्रबंधन मामले में महाविद्यालय परिसर में पुलिस अधीक्षक कार्यालय निर्माण का विरोध कर चुके हैं,एबीवीपी छात्र संघ विरोध दर्ज कर चुका है छात्र-छात्राओं का उन्हें समर्थन है विपक्षी दल कांग्रेस भी विरोध में ताल ठोक रही है वहीं सत्तापक्ष खुलकर निर्माण के पक्ष में और वह कई तर्क और तथ्यों के साथ इसे एक विकास से जुड़ा मामला बता रहा है। अब पूरे मामले में विरोध और समर्थन की राजनीति से इतर यदि बात की जाए समीक्षा की जाए तो पुलिस अधीक्षक कार्यालय के लिए महाविद्यालय परिसर का चयन सही है यह कहना बेहद जल्दबाजी होगी और यदि इस हिसाब से भी यदि इस निर्णय को समर्थन देने की बात की जाए जैसा भाजपा जिलाध्यक्ष का एक बयान सामने आया है जिसमें उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को पुराने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में व्यवस्थित किए जाने की बात की है तब भी महाविद्यालय परिसर में पुलिस अधीक्षक कार्यालय के निर्माण का पक्ष कमजोर नजर आयेगा क्योंकि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय भी शिक्षा से जुड़ा एक कार्यालय है जिसकी पहचान जिला बनने से पहले की है और तब यह कार्यालय बैकुंठपुर को शैक्षणिक जिले की मान्यता देने स्थापित था और संयुक्त कोरिया जिले के लिए तब का एक जिला कार्यालय था जब सरगुजा से भी जिले का विभाजन नहीं हुआ था यह कार्यालय महाविद्यालय भवन निर्माण के पहले का कार्यालय होने का भी गौरव रखता है जिससे हजारों शिक्षकों की एक आस्था जुड़ती है जिले की यह कहना भी कहीं से अतिश्योक्तिपूर्ण नहीं होगा। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के लिए भवन और स्थान तलाश या चयन के विकल्प की तलाश कहीं से सही निर्णय नहीं कहा जाएगा। वैसे बात विकास और निर्माण के जोड़कर कही गई है यह एकमात्र विषय को ही महत्व देते हुए यदि निर्णय हो जाता है तो सही गलत कहना सही होगा। पुलिस अधीक्षक कार्यालय के लिए भूमि तलाश का विषय इतना गंभीर होगा यह लगता नहीं था जो अब लगने लगा जब भवन के लिए भूमिपूजन होते ही उत्पन्न जन विरोध से सामने आ रहा है। वैसे मामले में सत्ता पक्ष और प्रशासन अडिग है और बात अब अहम की है ऐसा समझ में आने लगा है वहीं विपक्ष भी राजनीतिक रोटी सेंकने सामने आ चुका है और छात्र और शिक्षा हित सर्वोपरि का नारा देकर वह अपना विरोध दर्ज कर चुका है वैसे अंतिम निर्णय निर्माण का होगा या फिर निर्णय परिवर्तित होगा यह देखने वाली बात होगी।

विधायक ने महाविद्यालय परिसर में पुलिस अधीक्षक कार्यालय के निर्माण के निर्णय को जायज ठहराया
बैकुंठपुर के भाजपा विधायक ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय के लिए भूमि चयन और कार्यालय निर्माण को सही बताया है,उन्होंने कहा है कि बात विकास की है और जिला प्रशासन का निर्णय कहीं से गलत नहीं है,पुलिस अधीक्षक कार्यालय का निर्माण जिला प्रशासन का एक विकास से जुड़ा निर्णय है जिले के और इसका विरोध अनुचित है। विधायक के बयान से और उनके भूमिपूजन अवसर पर दिए वक्तव्य से जिसमें उन्होंने जिले के कलेक्टर की तारीफ करते हुए विकास की पर्याय उन्हें बताया था यह तय है कि विधायक मामले में अडिग हैं और वह पुलिस अधीक्षक कार्यालय निर्माण के पक्ष में हैं जो महाविद्यालय परिसर में बन रहा है।
विपक्ष ने कहा हम न्यायालय तक की लड़ाई में छात्रों के रहेंगे साथ
पूरे मामले में राजनीति भी शुरू हो चुकी है,कांग्रेस ने पूरे मामले में प्रेस कॉन्फ्रेंस की और एक बयान जारी करते हुए पूर्व विधायक सहित जिलाध्यक्ष ने कहा कि यह निर्णय सही नहीं है,पूर्व विधायक ने कहा कि महाविद्यालय की भूमि पर जिला चिकित्सालय बनाए जाने का प्रस्ताव उनके कार्यकाल में सामने आया था तब उन्होंने उसे कंचनपुर में स्थापित करने का निर्णय केवल छात्र और शिक्षा हित में लिया था। महाविद्यालय के भवन जिसमें आज कक्षाएं संचालित हैं उन भवनों को तोड़कर पुलिस अधीक्षक कार्यालय बनाया जाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले में कांग्रेस पार्टी छात्रों के साथ है और वह छात्रों के साथ राज्यपाल,मुख्यमंत्री और न्यायालय तक जाने के मामले में साथ हैं और वह एक स्वर में इस निर्णय का विरोध करते हैं। प्रमुख विपक्षी दल के सामने आते ही मामला राजनीतिक हो चुका है और यह मामला अब कहीं न कहीं राजनीतिक मुद्दा भी बनेगा जो तय है।
जिला प्रशासन निर्णय मामले में अडिग
पूरे मामले में जिला प्रशासन अपने निर्णय को बदलने के विचार में नहीं है,ऐसा सूत्रों से पता चल रहा है कि जिला प्रशासन निर्णय को लेकर अडिग रहने वाला है क्योंकि लिया जा चुका निर्णय बदले जाने पर जिला प्रशासन की छवि धूमिल होगी। जिला प्रशासन के अडिग रहने की स्थिति में महाविद्यालय परिसर में बनने जा रहे नए पुलिस अधीक्षक कार्यालय के विरोध का मामला और जोर पकड़ सकता है और यह यदि जोर पकड़ने वाला विषय बनता है और और भी आगे राजनीति इसमें देखने को मिल सकती है।
महाविद्यालय की स्थापना और जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय का अस्तित्व पर एक नजर…
शासकीय रामानुज प्रताप सिंहदेव महाविद्यालय की स्थापना बैकुंठपुर में सन 1982 को हुई थी और इसे बीटीआई के पुराने भवन में इसे सबसे पहले स्थापित किया गया था, बैकुंठपुर का जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय जैसा लोग बताते हैं यह 1978 के आसपास बैकुंठपुर को शैक्षणिक जिले का दर्जा देने स्थापित किया गया था और तभी से इसका कार्यालय है वहीं था। कुल मिलाकर महाविद्यालय और जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में से पुराना अस्तित्व जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय का है उसके बाद यहां महाविद्यालय का अस्तित्व सामने आया। अब यदि महाविद्यालय के लिए जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय केवल इसलिए स्थानांतरित किया जाता है अन्यत्र की वहां पुलिस अधीक्षक कार्यालय बनाया जाएगा तो इसको लेकर भी आगे विरोध दर्ज होता नजर आयेगा जो शिक्षा विभाग के अस्तित्व और उसकी पहचान से जुड़ा विषय होगा।
प्रशासन ने आबंटन के पूर्व यह भी नहीं सोचा कि भविष्य में उच्च शिक्षा की बढ़ोतरी कैसे होगी
कोरिया जिले के 27 वर्ष बाद बनने जा रहे पुलिस अधीक्षक कार्यालय के लिए आबंटित जमीन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है, विवाद इसलिए की जिला प्रशासन ने आंख मूंदकर महाविद्यालय के पास की जमीन को पुलिस अधीक्षक कार्यालय के लिए आवंटित कर दिया है। ज्ञात हो कि पिछले दिनों जनप्रतिनिधियों समेत आला अधिकारियों की मौजूदगी में बैकुंठपुर शहर के ओड़गी नाका स्थित शासकीय रामानुज प्रताप सिंहदेव स्नातकोत्तर महाविद्यालय परिसर के एक हिस्से में रिक्त भूखंड पर नए पुलिस अधीक्षक कार्यालय निर्माण के लिए भूमिपूजन किया गया है भूमिपूजन के बाद से ही जगह को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया है। इस जगह को जिला प्रशासन ने आवंटित किया है ऐसा बतलाया जाता है, विडंबना है कि प्रशासन ने आबंटन के पूर्व यह भी नहीं सोचा कि भविष्य के उच्च शिक्षा की बढ़ोत्तरी की दृष्टि से यह जगह पुलिस अधीक्षक कार्यालय के लिए सही नहीं है।
भूमिपूजन के बाद शुरू हुआ विवाद,होने लगा विरोध
पुलिस अधीक्षक कार्यालय के लिए भूमिपूजन के बाद जैसे ही यह खबर लोगो को लगी सभी ने एक स्वर से विरोध करना शुरू कर दिया,छात्र छात्राओं समेत महाविद्यालय प्रबंधन ने भी जगह को लेकर एतराज जताया है तो वहीं अलग अलग छात्र संगठनों से लेकर भूतपूर्व छात्र छात्राओं,शहरवासियों एवं जनप्रतिनिधि भी इसके खिलाफ हो गए हैं।
नालंदा परिसर के लिए उपयुक्त है जगह
जिस जगह पर पुलिस अधीक्षक बनाया है वह जगह वास्तव में किसी भी रूप में उपयुक्त नहीं है,जबकि जैसी जानकारी मिली है कि शहर में मानस भवन के बगल में खाली पड़े जमीन को नालंदा परिसर के लिए चिन्हित किया गया है उस जगह पर भी पुलिस अधीक्षक कार्यालय बनाया जा सकता है और कॉलेज के बगल में जिस जमीन को पुलिस अधीक्षक कार्यालय के लिए आबंटित किया गया है वहां पर नालंदा परिसर बनकर एजुकेशन हब के रूप में विकसित किया जा सकता है।
जन विरोध में विधायक गुट की जिला पंचायत सदस्य सौभाग्यवती सिंह ने भी समर्थन दिया
महाविद्यालय परिसर में पुलिस अधीक्षक कार्यालय का विरोध अब जन विरोध बन चुका है, इस विरोध में जिले के साथ ही जिला मुख्यालय के अधिकांश लोग शामिल हो चुके हैं जिसमें अब निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का भी विरोध शामिल नजर आ रहा है, इस विरोध में अब बैकुंठपुर विधायक के गुट की जिला पंचायत सदस्य सौभाग्यवती सिंह भी शामिल हो गई हैं और उन्होंने कलेक्टर कोरिया को पत्र लिखकर इस विषय में निर्णय बदलने का अनुरोध किया है, सौभाग्यवती सिंह का विरोध में शामिल होना एक तरह से बड़ा आश्चर्य भी है क्योंकि वह विधायक गुट की एक प्रबल सदस्य मानी जाती हैं और वह तब इस विरोध में शामिल हो रही हैं जब विधायक निर्णय को दूसरी बार सही ठहरा चुके हैं। कुल मिलाकर अब विरोध बढ़ता ही नजर आ रहा है और विधायक गुट भी इसमें शामिल होकर छात्र हित में आवाज उठा रहा है।
दो महाविद्यालय प्राचार्यों ने भी पुलिस अधीक्षक कार्यालय निर्माण का किया विरोध
जिले के दो शासकीय महाविद्यालय के प्राचार्यों ने सार्वजनिक रूप से यह मांग की है कि जिले के अग्रणी महाविद्यालय परिसर में पुलिस अधीक्षक कार्यालय न बनाया जाए,यह अनुरोध उन्होंने जनभागीदारी अध्यक्षों से भी किया है और साथ ही उन्होंने जिला प्रशासन से भी ऐसी ही अपेक्षा जाहिर की है वहीं महाविद्यालय परिसर में पुलिस अधीक्षक कार्यालय बनाए जाने का विरोध एक जन विरोध स्वरूप भी नजर आ रहा है और जिले के साथ ही जिला मुख्यालय के अधिकांश लोग इस विरोध में शामिल हैं वहीं एबीवीपी छात्र संघ ने तो ऐसा होने पर उग्र आंदोलन की भी चेतावनी दे डाली है,इन विरोधों और अनुरोध के बावजूद जिले के जिम्मेदार जनप्रतिनिधि और जिला प्रशासन अभी भी इस बात पर अड़ा है कि पुलिस अधीक्षक कार्यालय के लिए जो भूमि चुनी गई है वह सही निर्णय है और महाविद्यालय परिसर में ही पुलिस अधीक्षक कार्यालय का निर्माण तय है। जनविरोधी साथ ही प्राचार्यों का अनुरोध वहीं एबीवीपी द्वारा दी गई उग्र आंदोलन की चेतावनी को नजर अंदाज किए जाने के पीछे की वजह शायद सम्मान खुद के निर्णय का बचाया जाना कहा जा सकता है और इसी प्रयास में जिला प्रशासन और निर्वाचित जनप्रतिनिधि लगे हुए हैं। वैसे कोरिया जिले में नालंदा परिसर की भी घोषणा हुई है,नालंदा परिसर एक शैक्षणिक सुविधाओं खेल सहित विभिन्न शिक्षण सहयोगी गतिविधियों की सुविधा प्रदान करने वाली संस्था होगी जो जिले को पहले स्वास्थ्य मंत्री बाद में मुख्यमंत्री की घोषणा उपरांत एक उपलब्धि बतौर मिली है और क्यों नहीं नालंदा परिसर की ही स्थापना महाविद्यालय परिसर में कर दी जा रही है यह बड़ा सवाल है। नालंदा परिसर जिले में यदि महाविद्यालय परिसर में स्थापित किया जाए वहीं उसका भवन बनाया जाए यह एक बेहतर निर्णय लेकर आखिर क्यों नहीं जिला प्रशासन और निर्वाचित जनप्रतिनिधि पूरे मामले का पटाक्षेप कर देते हैं। पुलिस अधीक्षक कार्यालय के लिए वह भूमि भी दी जा सकती है जो नालंदा परिसर के लिए चिन्हांकित की गई है,पूरे मामले में यह निर्णय ही बेहतर निर्णय माना जाएगा। महाविद्यालय परिसर में पुलिस अधीक्षक कार्यालय का निर्माण न हो यह एक जन आवाज का विषय बन चुकी है और यह निर्णय कहीं न कहीं लोगों के लिए शिक्षा क्षेत्र की सुविधाओं में उसे प्राप्त सहूलियतों में एक रुकावट मानी जा रही है जिस मानसिकता को दूर करने की लिए यही अच्छा होगा कि नालंदा परिसर महाविद्यालय परिसर में बना दिया जाए।

भाजयुमो ने कलेक्टर कोरिया को दिया ज्ञापन,पुलिस अधीक्षक कार्यालय के नवीन भवन निर्माण को गति देने की मांग
भाजयुमो कोरिया ने इस मामले में कलेक्टर कोरिया को ज्ञापन सौंपकर नए पुलिस अधीक्षक कार्यालय के निर्माण को गति देने की मांग की है,उन्होंने महाविद्यालय परिसर में बनने जा रहे नए पुलिस अधीक्षक कार्यालय का समर्थन किया है और उन्होंने यह भी कहा है कि जिलाध्यक्ष भाजपा ने निर्देश पर जिला प्रशासन के इस निर्णय के साथ हैं वह और वह चाहते हैं कि जल्द से जल्द नए पुलिस अधीक्षक कार्यालय का निर्माण आरंभ किया जाए।
निर्माण के विरुद्ध जाना सही नहीं, महाविद्यालय को मिलेगी जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की भूमि,जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय होगा अन्यत्र स्थानांतरित:देवेंद्र तिवारी जिलाध्यक्ष भाजपा
मामले में भाजपा जिलाध्यक्ष देवेंद्र तिवारी का भी बयान सामने आया है,उन्होंने एक सोशल मीडिया बयान जारी किया है और उन्होंने इसके माध्यम से एक अपील जारी की है जिसमें वह किसी नव निर्माण को सहयोग देने अपील कर रहे हैं और इसे विकास से जुड़ा मामला बता रहे हैं। उन्होंने बयान में कहा है कि कांग्रेस शासनकाल में जिले का विभाजन हुआ जो एक जिले के हिसाब से बेहद नुकसानदायक निर्णय साबित हुआ अब नए पुलिस अधीक्षक कार्यालय के निर्माण का मामला विरोध में नहीं जाना चाहिए,विकास में बाधक नहीं साधक सहयोगी बनना चाहिए उन्होंने कहा कि महाविद्यालय परिसर की भूमि पर बनने वाला पुलिस अधीक्षक कार्यालय कतई महाविद्यालय विस्तार को प्रभावित नहीं करेगा महाविद्यालय की आवश्यकताओं के लिए जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के भवन की भूमि उपलब्ध कराई जाएगी क्योंकि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय भी भविष्य में नए कार्यालय में स्थानांतरित होगा जो पुराने पुलिस अधीक्षक कार्यालय के समीप या उसी भूमि के भवन की जगह बनाया जाएगा। भाजपा जिलाध्यक्ष ने बैकुंठपुर विधायक और जिला प्रशासन के निर्णय को उचित और विकास से प्रेरित बताते हुए नव निर्माण में सहयोग की अपेक्षा सामने रखी।

छात्र विरोध में अब उग्र आंदोलन की तैयारी में…विरोध दर्ज करने जुटे छात्र-छात्रा
महाविद्यालय परिसर में पुलिस अधीक्षक कार्यालय निर्माण का विरोध छात्र संघ एबीवीपी ने भी किया है ज्ञापन देकर निर्णय नहीं बदले जाने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी भी उन्होंने दी है,इसी क्रम में छात्र छात्राओं ने एकजुट होकर नारेबाजी करते हुए पुनः जिला प्रशासन को चेताया है कि यदि निर्णय नहीं बदला जाता है तो शांत नहीं बैठने वाले छात्र और उग्र आंदोलन वह करने बाध्य होंगे,छात्रों ने शिक्षक दिवस सहित महाविद्यालय की कक्षाओं के बहिष्कार का भी निर्णय लिया है। पूरे मामला अब एक आंदोलन को जन्म देता नजर आ रहा है जिसमें छात्रों सहित जिला मुख्यालय के लोग शामिल होते नजर आ रहे हैं।
जिला प्रशासन क्या इस मामले में अडिग रहने वाले निर्णय पर अटल रहेगा या छात्र और महाविद्यालय हित में निर्णय बदलेगा?
पूरे मामले में जिला प्रशासन क्या निर्णय आगे लेता है वह देखने वाली बात होगी,जिला प्रशासन क्या अपने निर्णय पर अडिग रहकर इस आंदोलन को जन्म लेने देगा जो महाविद्यालय परिसर की भूमि पर पुलिस अधीक्षक कार्यालय निर्माण के विरुद्ध जन्म लेने तैयार है यह अपना हठी रवैया छोड़कर वह निर्णय बदल देगा और महाविद्यालय परिसर में पुलिस अधीक्षक कार्यालय के निर्माण के निर्णय में वह बदलाव करेगा। माना जा रहा है जिला प्रकाशन अडिग ही रहने वाला है क्योंकि यह निर्णय बदलने से उन्हें खुद की हार नजर आ रही है और वह हार स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं।
छात्र संघ द्वारा ज्ञापन सौंपने के दौरान ही तहसीलदार ने प्रशासन के रुख से अवगत कराने का किया है प्रयास
पूरे मामले में जिला प्रशासन अडिग रहने वाला है यह आभास तहसीलदार बैकुंठपुर ने पहले ही करा दिया है छात्र संघ एबीवीपी सहित छात्र छात्राओं को उन्होंने ज्ञापन दिवस ही जिस तरह का व्यवहार छात्र छात्राओं से जिला कार्यालय के सामने किया वह बताता है कि प्रशासन कितना नाराज है विरोध से,छात्र छात्राओं को कानून का ही पाठ पढ़ाने लगी थीं तहसीलदार और एक तरह से उन्होंने धमकी देने और छात्रों को डराने का भी प्रयास किया था। बाद में भले उन्होंने ज्ञापन स्वीकार किया लेकिन उनकी आलोचना छात्र छात्रा करते सुने गए और उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक अधिकारी के इस रवैए के प्रति नाराजगी जाहिर करते हुए यह भी कहा कि क्या शांतिपूर्ण ढंग से छात्र अपनी बात भी जिलाधीश के समक्ष नहीं रख सकते क्या तहसीलदार की नजर में छात्र अपराधी हैं।

विधायक के बयान के बाद उग्र हो रहे लोग
बैकुंठपुर विधायक ने विरोध जारी होने उपरांत एक बयान दिया जिसमें उन्होंने निर्णय को सही ठहराया,अब उनके बयान की निंदा हो रही है,लोग विधायक के बयान को यह कहकर गलत बता रहे हैं कि आने वाली पीढ़ी के छात्र छात्राओं के भविष्य के हिसाब से यह निर्णय सही नहीं है,लोग महाविद्यालय परिसर में अध्ययन अध्यापन सम्बंधी ही किसी निर्माण की आवश्यकता समझते हैं उनके अनुसार विधायक अपने निर्णय को थोपना चाहते हैं और वह केवल इसलिए ऐसे बयान दे रहे हैं जिससे उन्हें जिला प्रशासन से विरोध न लेना पड़े।
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