दिव्यांग आरक्षण पर हाई कोर्ट ने सुनाया फैसला
बिलासपुर,01 सितम्बर 2025। हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच के फैसले से राज्य सरकार और सीजीपीएससी को राहत मिली है। दिव्यांग कैटेगरी से युवक ने ष्टत्रक्कस्ष्ट के माध्यम से कॉमर्स फैकल्टी में असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए रिटर्न टेस्ट पास किया था। रिटर्न टेस्ट के बाद सीजीपीएससी ने इंटरव्यू कॉल किया था। उसने इंटरव्यू से बाहर होने के बाद याचिका दायर की थी। बेंच ने अपने फैसले में कहा कि दिव्यांगजन श्रेणी में नियुक्ति देने का अधिकार राज्य सरकार को है। सहायक प्राध्यापक भर्ती में दृष्टिहीन व कम दृष्टि वाले उम्मीदवारों के लिए आरक्षण की मांग को लेकर याचिका दायर की गई थी। याचिका की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच में हुई। मामले की सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने कहा कि किस पद के लिए और किस कैटेगरी के दिव्यांग को नियुक्ति देनी है यह नियोक्ता बेहतर ढंग से तय करता है। बेंच ने यह भी कहा कि चयन प्रक्रिया पूरी होने की स्थिति में असफल होने की स्थिति में कोई उम्मीदवार रोस्टर या आरक्षण प्रक्रिया को चुनौती नहीं दे सकता। इस महत्वपूर्ण व्यवस्था के साथ डिवीजन बेंच ने याचिका को खारिज कर दिया है।
याचिकाकर्ता ने कहा, दृष्टिहीनों
को दो फीसदी आरक्षण का है प्रावधान
रायगढ़ निवासी सरोज क्षेमनिधि ने नवंबर 2020 में आयोजित लिखित परीक्षा पास की। रिटर्न टेस्ट क्लीयर करने के बाद इंटरव्यू के लिए कॉल किया। अंतिम चयन सूची में उनका नाम नहीं आया। हाई कोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि सीजीपीएससी ने कॉमर्स विषय में दृष्टिहीन और अल्प दृष्टि वाले अभ्यर्थियों को 2 प्रतिशत आरक्षण उपलध का प्रावधान किया था। प्रावधान के अनुसार सीजीपीएससी ने सुविधा का लाभ नहीं दिया।
असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती के लिए जारी किया था विज्ञापन
सीजीपीएससी ने वर्ष 2019 में सहायक प्राध्यापक के 1384 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था। अन्य विषयों के साथ ही वाणिज्य विषय के लिए 184 पद जारी किया था। ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तारीख 5 मार्च 2019 तय की गई थी। 23 फरवरी 2019 को आयोग ने एक शुद्धिपत्र जारी कर शारीरिक रूप से दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए पदों की संख्या में संशोधन कर दिया।
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