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रायपुर@शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में राज्य सरकार का एक और बड़ा कदम

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रायपुर,25 अगस्त 2025 । छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। स्कूली शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने सोमवार को नवा रायपुर स्थित महानदी भवन में विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। बैठक का मूल उद्देश्य था…शिक्षा ही प्रगति की सबसे मजबूत नींव है। इसी सोच के साथ प्रदेश के शासकीय विद्यालयों की स्थिति का गहन आकलन किया गया। विद्यालयों के उन्नयन पर चर्चा बैठक में प्रदेश भर के शासकीय विद्यालयों की शिक्षकीय व्यवस्था,उन्नयन, और आवश्यक संसाधनों की उपलधता पर विशेष रूप से चर्चा हुई। मंत्री यादव ने स्पष्ट कहा कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए संसाधनों का न्यायपूर्ण वितरण और शिक्षकों की उपलधता सुनिश्चित की जाएगी। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर जोर मंत्री यादव ने बैठक में कहा- छत्तीसगढ़ का उज्ज्वल भविष्य तभी संभव है जब बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसी भी विद्यालय में शिक्षकों की कमी न रहे और जहां आवश्यकता है, वहां तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। डिजिटल शिक्षा, पुस्तकालय, प्रयोगशाला और खेलकूद जैसी सुविधाओं को सुदृढ़ करने पर भी चर्चा की गई।
रणनीतियाँ और सुधारात्मक कदम बैठक में यह तय किया गया कि स्कूलों के आधारभूत ढांचे में सुधार के लिए विशेष योजना बनाई जाएगी। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच शिक्षा की गुणवत्ता की खाई को पाटने के लिए समान अवसर उपलध कराए जाएंगे। शिक्षकों के प्रशिक्षण और क्षमता विकास पर बल दिया जाएगा ताकि विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा पद्धति से जोड़ा जा सके। शिक्षा में सरकार की प्राथमिकता मंत्री यादव ने कहा कि राज्य सरकार लगातार यह सुनिश्चित करने में जुटी है कि शिक्षा व्यवस्था नई ऊँचाइयों तक पहुंचे। उनका मानना है कि अगर बच्चों की नींव मजबूत होगी तो प्रदेश हर क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर सकेगा। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि विद्यालयों की नियमित मॉनिटरिंग और मूल्यांकन की व्यवस्था को और मजबूत किया जाए।
भविष्य की रूपरेखा बैठक से यह संकेत स्पष्ट मिला कि सरकार आने वाले समय में शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलाव लाने की तैयारी कर रही है। न केवल अधोसंरचना बल्कि शिक्षण पद्धति में भी सुधार किए जाएंगे। विशेष रूप से ग्रामीण और आदिवासी अंचलों में शिक्षा की पहुंच और गुणवत्ता बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।


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