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अम्बिकापुर@सरगुजा के अधिवक्ताओं ने धरना देकर जताया विरोध

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राजस्व न्यायालय का बहिष्कार

अम्बिकापुर,18 फरवरी 2022(घटती-घटना)। रायगढ़ मैं राजस्व कर्मचारियों व अधिवक्ताओं के बीच हुआ विवाद बढ़ता जा रहा है। सरगुजा अधिवक्ता संघ ने भी राजस्व न्यायालयों का तब तक बहिष्कार करने का निर्णय लिया है जब तक की रायगढ़ में अधिवक्ताओं पर दर्ज मामले वापस ना हो जाएं। इसी मांग को लेकर शुक्रवार को अधिवक्ताओं ने धरना देकत राजस्व न्यायालयों को भ्रष्टाचार का अड्डा बताते हुए यहां पारदर्शी व्यवस्था बनाए जाने की मांग की है। शुक्रवार को जिला अधिवक्ता संघ द्वारा न्यायालय के पास गांधी स्टेडियम के गेट के सामने धरना भी दिया गया जिसमें अधिवक्तओं ने राजस्व न्यायालय में जड़ जमा चुके भ्रष्टाचार के बारे में कई बातें भी कही। अधिवक्ताओं ने भ्रष्टाचार के विरूद्ध प्रदेश व्यापी आंदोलन का समर्थन करते हुए चरणबद्ध तरीकें से आंदोलन करने की भी बात कही। वहीं प्रदेश में एव्होकेट प्रोटेक्शन बिल तत्काल प्रभाव से लागू किये जाने को लेकर भी आवाज उठाई। अपने उक्त प्रस्तावों, सुझावों व मांगों को लेकर संघ द्वारा धरना उपरांत कलेक्ट्रेट पहुंच कर कलेक्टर के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन भी प्रेषित किया गया है। संघ ने रायगढ़ के अधिवक्ताओं पर दर्ज प्रकरणों को तत्काल वापस लिए जाने व घटना में शामिल प्रशासनिक अधिकारी व कर्मचारियों पर तत्काल अपराध पंजीबद्ध कर गिरफ्तारी सुनिश्चित करने की मांग की है। संघ ने मामले मे कार्यवाही ना होने तक राजस्व न्यायालयों के बहिष्कार का निर्णय भी लिया गया है। आज के धरने में काफी संख्या में अधिवक्तागण उपस्थित थे।
अधिवक्ताओं नेसंघर्ष समिति का किया गठन
सरगुजा अधिवक्ता संघ ने इस मुद्दे पर संघर्ष समिति का भी गठन कर लिया है। इसमें ऐसे प्रशासनिक अधिकारी को न्यायालयीन प्रक्रियाओं के लिए पीठासीन अधिकारी ना बनाए जाने का सुझाव दिया गया है जिसे कि विधी का ज्ञान ही ना हो तथा जिसपर अपराध पंजीबद्ध हो या विचारित हो, वहीं राजस्व न्यायालयों में अराजकता कम करने के लिए दो वर्ष से अधिक समय से पदस्थ समस्त राजस्व अधिकारियों व तृतीय वर्ग कर्मचारियों का स्थानांतरण संभागस्तर करने, राजस्व प्रकरणों का निराकरण सिटीजन चार्टर के अनुरूप ना कर पाने वाले अधिकारियों पर जुर्माना लगाने का भी सुझाव संघ ने दिया है। इसके अलावा राजस्व न्यालयों में प्रकरण प्रस्तुत होने पर उसे तत्काल पंजीबद्ध करने, लम्बे समय से लंबित प्रकरण जिन्हें मात्र औपचारिक अवलोकन अथवा आदेश हेतु नियत कर रखा गया है, ऐसे प्रकरणों में क्यों आदेश पारित नहीं किया जा रहा है उसकी जांच कराने की मांग भी की गई है।


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