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कोरिया/सरगुजा/एमसीबी@क्या विश्व आदिवासी दिवस पर वर्तमान सरकार आदिवासियों की ख़ुशी में नहीं हुई शामिल ?

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-न्यूज डेस्क-
कोरिया/सरगुजा/एमसीबी 11 अगस्त 2025 (घटती-घटना)। विश्व आदिवासी दिवस छत्तीसगढ़ में काफी धूमधाम से मनाया जाता था, सरकार भी इसमें आदिवासियों के खुशी में शामिल होती थी,उनके लिए आयोजन करती थी प्रशासन इस कार्यक्रम को लेकर तैयारी में जुड़ता था, पर इस बार ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला,जिसे लेकर विपक्ष ने आलोचना भी की और सत्ता पर सीधे निशाना भी साध है यहां तक कह दिया गया कि आदिवासी मुख्यमंत्री के प्रदेश में आदिवासी दिवस पर ही सरकार का पीछे हटना बहुत बड़ा आदिवासियों के लिए गंभीर मुद्दा बन गया, ऐसा लगा कि आदिवासियों के साथ सरकार नहीं है उनकी खुशी में सरकार शामिल नहीं होना चाह रही थी या फिर आदिवासियों कि सिर्फ फिक्र भाषणों में होता है असल में स्थित कुछ और है? इस वर्ष आदिवासी दिवस के कार्यक्रम में सरगुजा सम्भाग में अधिकांश स्थानों जिला व ब्लॉक मुख्यालयों में सत्ता पक्ष के बड़े जनप्रतिनिधि नही पहुचे जिसकी चर्चा सभी ओर है। पूर्व की कांग्रेस सरकार के समय जहां भव्य आयोजन एक मंच पर किया जाता था वही इस साल अलग अलग जगहों पर समाज ने अपनी सुविधानुसार कार्यक्रम किया । विपक्ष के जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि विश्व आदिवासी दिवस के कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ सरकार और जिला प्रशासन की तरफ से अपेक्षित सहयोग उन्हें नही मिला। सरगुजा सम्भाग के अलग अलग जिला मुख्यालयों में आयोजित कार्यक्रमो से सत्ता पक्ष के बड़े नेता विधायक नही पहुचे या जानबूझ कर दूरी बना कर रखा, ये अहम सवाल होता जा रहा है।
बिहार दिवस मना सकते है तो आदिवासी दिवस क्यों नही : गुलाब कमरो
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने भी इस मुद्दे पर बड़ा हमला बोला है विधायक गुलाब कमरो ने सोशल मीडिया पर लिखा जय जोहार अब सवाल भाजपा के आदिवासी सी एम से , बिहार स्थापना दिवस मना सकते हो,लेकिन विश्व आदिवासी
दिवस से क्यों भाग रहे हो? लगातार दूसरे साल न आयोजन,न बधाई,न सम्मान क्या आदिवासी मुख्यमंत्री मुखौटा बराबर ही रहेंगे,असली मकसद हसदेव अरण्य काटना,जल-जंगल-जमीन अदानी को बेचना,विरोध करने वालों पर लाठियां,जेल,दमनभाजपा का दोहरा चेहरा वोट के समय आदिवासी याद आते हैं,सत्ता में आते ही आदिवासी भूल जाते हैं,विश्व आदिवासी दिवस जिला एम सी बी के कार्यक्रम में पूर्व विधायक गुलाब कमरो मुख्य अतिथि रहे, उन्होंने कहा कि जनता द्वारा चुने हुए सत्ता पक्ष के बड़े जनप्रतिनिधियों कार्यक्रम में न आना बेहद दुर्भाग्य जनक है, विश्व आदिवासी दिवस किसी पार्टी का कार्यक्रम नही बल्कि पूरे आदिवासी समाज का कार्यक्रम है, पूर्व वर्ती सरकार में यहां भव्य कार्यक्रम हुए सभी का सम्मान किया गया लेकिन सरकार ने कार्यक्रम से ही दूरी बना ली जो खेद का विषय है।
भाजपा राज में आदिवासी दिवस भी उपेक्षित : अमरजीत
पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने भी नाराजगी जताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी अमर जीत भगत ने अपने सोशल मीडिया पर लिखा कि कांग्रेस शासन में हर जिले में आदिवासी दिवस का जश्न होता था, भाजपा आई तो पर्व भी बंद, स्कूल भी बंद, जंगल भी उजड़ गए। ये है भाजपा का विकास मॉडल आदिवासियों के लिए। अमर जीत ने एक और पोस्ट के जरिये लिखा कि भाजपा राज में आदिवासी दिवस भी उपेक्षित! विश्व आदिवासी दिवस पर सरकारी कार्यक्रमों की कमी ने साबित कर दिया कि भाजपा की सोच आदिवासी विरोधी है। हमारे समाज के जल, जंगल, जमीन और अधिकारों को बचाना ही हमारी असली पहचान है और इसे खत्म करने की हर कोशिश का डटकर मुकाबला होगा।भाजपा राज में आदिवासी दिवस भी राजनीति की भेंट चढ़ गया, न आयोजन, न सम्मान बस उपेक्षा और हमला जल, जंगल, जमीन पर। ये ही है भाजपा का असली आदिवासी विरोधी चेहरा। शिक्षा, जल, जंगल, जमीन पर हमला पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने कहा कि भाजपा सरकार लगातार आदिवासी क्षेत्रों के स्कूल बंद कर रही है। आज अकेले छत्तीसगढ़ में 10,000 से अधिक स्कूल बंद किए जा रहे हैं। यह सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि आदिवासी बच्चों के भविष्य के दरवाजे बंद करने की साजिश है, अमरजीत ने कहा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासन में केंद्रीय वन अधिनियम के तहत आदिवासी क्षेत्रों में बसाहट को कानूनी मान्यता दी गई थी, मगर अब बड़े पैमाने पर इन्हें ‘अवैध कब्जा’ घोषित किया जा रहा है। अमरजीत भगत ने कहा कि हसदेव, तमनार और बस्तर में हो रही पेड़ों की अंधाधुंध कटाई करा भाजपा सरकार अपने ही राज्य में हरे-भरे जंगल उजाड़ रही है। यह सिर्फ पेड़ काटना नहीं, बल्कि आदिवासियों के जीवन, संस्कृति और रोजगार पर सीधा हमला है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने दी तीखी प्रतिक्रिया
पूर्व मुख्यमंत्री और और कॉंग्रेस के महासचिव भूपेश बघेल ने रविवार को कोटा में आयोजित आदिवासी सम्मेलन में राज्य सरकार और आरएसएस पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ आदिवासी बहुल राज्य है और यहां आदिवासी मुख्यमंत्री भी हैं,फिर भी विश्व आदिवासी दिवस पर सरकार ने कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं किया। बघेल ने दावा किया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पहले आदिवासी दिवस मनाने का प्रोटोकॉल जारी किया था,लेकिन संघ कार्यालय से आदेश आने के बाद सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए गए। उन्होंने कहा,यह चिंता की बात है कि आदिवासियों को मिले अधिकारों का हनन हो रहा है,पेसा कानून का पालन नहीं हो रहा, वन अधिकार और पर्यावरण अधिनियम का उल्लंघन किया जा रहा है, और आदिवासियों का रोजगार छीना जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि उनकी सरकार ने 2019 में विश्व आदिवासी दिवस को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया था और हर साल इसका भव्य आयोजन होता था। उन्होंने कहा कि 2018 से 2023 तक उनकी सरकार ने जन-जंगल-जमीन और वनोपज के लिए कई बड़े फैसले लिए,जिनमें पेसा कानून लागू करना और 165 वनोपजों की खरीदी समर्थन मूल्य पर करना शामिल है। भाजपा की ढबल इंजन सरकार ने ये योज्ञनाएं बद कर दी गई।
सूरजपुर में भी नही पहुंचे सत्ता धारी दल के दिग्गज
सर्व आदिवासी समाज सूरजपुर द्वारा जिला मुख्यालय के रंगमंच मैदान में बुधवार को आदिवासी दिवस मनाया गया। समाज के लोगों द्वारा बिश्रामपुर रोड में साधु राम सेवा कुंज भवन के पास से रैली निकाली गई। रैली बाईपास रोड होते हुए भैयाथान रोड से अग्रग्रसेन भवन, मनेंद्रगढ़ रोड, केतका रोड होकर रंगमंच मैदान पहुंची। यहां समाज, प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में किसी भी बड़े नेता के नहीं पहुंचने पर लोगों ने नाराजगी व्यक्त की।
क्या भाजपा विधायकों ने आदिवासी दिवस कार्यक्रम से बनाई दूरी?
सरगुजा सम्भाग के अधिकांश जिला और कही कही ब्लॉक स्तर पर आयोजित कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक नही पहुचे इससे तरह तरह के सवाल खड़े होने लगे हैं,क्या क्षेत्रीय विधायको ने आदिवासी दिवस के कार्यक्रम से दूरी बनाए? जैसा कि पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया उसी तर्ज पर क्या वाकई विधायको पर भी कार्यक्रमो में न जाने का दबाव था इस तरह के सवाल क्षेत्रो में चर्चा का विषय बना हुआ है। जबकि सरगुजा सम्भाग की अधिकांश विधानसभा सीट पर आदिवासी समाज के ही विधायक निर्वाचित है बावजूद इसके क्या समाज पर राजनीति हावी हो गई। कोरिया एम सी बी में भी आयोजित कार्यक्रमो में विधायक व मंत्रियों की अनुपस्थिति कई सवाल खड़े कर रही है। सरगुजा जिले में तो सांसद चिंतामणि महाराज सहित कई प्रशासनिक अधिकारियों के पहुँचने की खबर है लेकिन बाकी जिलों में इस साल आदिवासी दिवस कार्यक्रम नेताओ की अनुपस्थिति में चर्चा का विषय बन गया।


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