- पुलिस अधीक्षक कार्यालय में पदस्थ गोपनीय शाखा के कर्मचारी ने कुछ ऐसा कहा कि सभी बिना शिकायत दिए लौटे:सूत्र
- कलेक्टर सहित महाविद्यालय प्राचार्य के कार्यालय के आवक जावक शाखा में आवेदन हुआ स्वीकार, पुलिस अधीक्षक कार्यालय में क्यों पुलिस अधीक्षक से ही मिलकर शिकायत देने की रखी गई शर्त?
- पुलिस अधीक्षक कार्यालय में सेवानिवृत्त प्राचार्य के रिश्तेदार हैं पदस्थ उन्हीं ने ऐसा कुछ कहा कि कर्मचारी लौटे बिना शिकायत पत्र सौंपे…
-रवि सिंह-
कोरिया,27 जुलाई 2025 (घटती-घटना)। कोरिया जिले के अग्रणी महाविद्यालय शासकीय रामानुज प्रताप सिंहदेव महाविद्यालय में सेवानिवृत्त प्राचार्य द्वारा सेवानिवृत्ति के छः माह बाद जाकर खुद बंद रखे गए कमरों से दस्तावेज निकालकर उन्हें आग के हवाले किए जाने के मामले में अब महाविद्यालय के कई कर्मचारी भी सेवानिवृत्त प्रभारी प्राचार्य के खिलाफ शिकायत करते नजर आ रहे हैं और उनकी शिकायत में इस बात का भी उल्लेख है कि उन्हें सेवानिवृत्त प्रभारी प्राचार्य से खतरा है और उनकी सहायक प्राध्यापक पत्नी से खतरा है और जिस मामले का संज्ञान लिया जाना आवश्यक है,महाविद्यालय के कर्मचारियों की लिखित शिकायत की प्रतियां दैनिक घटती घटना के हांथ लगी हैं और जिसमे साफ साफ लिखा है कि कैसे 12 जुलाई 2025 को सेवानिवृत्त प्रभारी प्राचार्य महाविद्यालय पहुंचते हैं और दो कमरों से दस्तावेज निकालकर वह उसे आग के हवाले करते हैं। कर्मचारियों के अनुसार सेवानिवृत्त प्रभारी प्राचार्य सभी कर्मचारियों से इस कार्य में सहयोग की भी बात करते हैं और सहयोग न करने पर किसी झूठे मामले में फंसाने की वह धमकी देते हैं। कर्मचारियों ने अपनी लिखित शिकायत कलेक्टर कोरिया और महाविद्यालय के वर्तमान प्राचार्य को तो सौंप दी और जिसे आवक-जावक के माध्यम से उन्होंने सौंपा वहीं उनके अनुसार जब वह पुलिस अधीक्षक कोरिया कार्यालय पहुंचे उन्हें वहां जो सलाह मिली वह उन्हें भयभीत करने वाली थी जिसके कारण वह बिना शिकायत किए लौट आए।
बताया जा रहा है कि पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आवक जावक में शिकायत स्वीकार नहीं की गई और उन्हें वहां से कर्मचारी ने बताया कि शिकायत सीधे पुलिस अधीक्षक के समक्ष हो सकेगी और बयान दर्ज करने के बाद ही आगे कुछ कार्यवाही संभव है,मामले में सवाल यह है कि क्या पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आवक जावक शाखा का कोई औचित्य नहीं है क्या जिसके कारण कर्मचारियों से जो शिकायत करने पहुंचे उनसे ऐसा कहा गया। बताया जा रहा है जिसने ऐसा कहा वह सेवानिवृत्त प्रभारी प्राचार्य का रिश्तेदार है जिसने ऐसा कहा या शिकायत करने पहुंचे कर्मचारियों को ऐसा कहकर भयभीत करने का प्रयास किया। वैसे मामले में महाविद्यालय कर्मचारियों का सामने आना और शिकायत करना यह बतलाता है कि यदि जांच हुई सेवानिवृत्त प्रभारी प्राचार्य की पोल खुल जाएगी और बहुत बड़े भ्रष्टाचार से पर्दा हट सकेगा।
क्या एसपी कार्यालय में कोई अग्रणी महाविद्यालय के सेवानिवृत्ति प्रभारी प्राचार्य का रिश्तेदार है कार्यरत…जिन्होंने अधिकारी व कमर्चारियों को शिकायत नहीं देने दिया
अग्रणी महाविद्यालय रामानुज प्रताप सिंहदेव के स्टाफ व अधिकारी सेवानिवृत्ति प्रभारी प्राचार्य की शिकायत लेकर एसपी कार्यालय पहुंचे थे जहां पर उनका कोई रिश्तेदार मौजूद था और उसने शिकायतकर्ताओं को यह कहकर गुमराह किया कि एसपी साहब के सामने आपको पेश होना पड़ेगा बयान होगा तब आपका शिकायत लिया जाएगा इसके बाद शिकायतकर्ता को वहां से वापस कर दिया गया क्या अब शिकायत करने के लिए एसपी साहब यदि छुट्टी पर रहेंगे तो क्या आवक जावक में शिकायत नहीं ली जाएगी क्या एसपी कार्यालय में ही पदस्थ गोपनीय शाखा देखने वाले कर्मचारी जो अपने आप को प्रभारी प्राचार्य का रिश्तेदार बता रहे हैं वह शिकायतकर्ताओं को शिकायत करने से रोक रहे हैं?
स्थानीय व्यक्ति के पास कैसे हैं एसपी कार्यालय के गोपनीय शाखा की जिम्मेदारी?
पुलिस अधीक्षक कार्यालय कोरिया में बैकुंठपुर निवासी एक कर्मचारी के पास गोपनीय शाखा की जिम्मेदारी मिली हुई है जिस व्यक्ति के पास इस शाखा की जिम्मेदारी है वह पदस्थ बलरामपुर में है और लंबे समय से कोरिया जिले में अटैच होकर काम कर रहे हैं अभी इनके पास पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में गोपनीय शाखा भी पुलिस अधीक्षक कार्यालय की देखने की जिम्मेदारी मिल गई थी पर जानकारों का ऐसा मानना है कि किसी भी स्थानीय व्यक्ति को गोपनीय शाखा नहीं दी जाती है पर यहां पर उन्हें गोपनीय शाखा की जिम्मेदारी दे दी गई है जहां पर इनकी मनमर्जी खूब चलती है नाम ना बताने की शर्त पर विभाग के ही पुलिस कर्मियों ने बताया कि उनके गोपनीय शाखा में आने से कई पुलिसकर्मी परेशान है जहां पर पहले थाना में पदस्थ कर्मचारियों छुट्टी लेने के लिए अपने थाना प्रभारी को आवेदन दिया करते थे और आवेदन सीधे एसपी तक पहुंच जाया करता था पर इस समय यह नियम बदल गया है जब से गोपनीय शाखा में स्थानीय निवासी गुप्ता जी आए हैं अब आवेदन आप अपने थाना के प्रभारी को दे दीजिए पर जब तक गुप्ता जी से नहीं मिलेंगे तब तक आपकी छुट्टी स्वीकृत नहीं होगी वह आवेदन बिना गुप्ता जी से मिले एसपी साहब के टेबल तक नहीं पहुंचेगा अब ऐसे में यह सवाल यह उठता है कि क्या ऐसे कर्मचारी की शिकायतें पुलिस अधीक्षक तक नहीं पहुंच पा रहे वैसे बताया जा रहा है कि पूर्व में भी ऐसे कार्यों को लेकर उनकी शिकायत आईजी साहब से की गई थी। सवाल तो यह भी है कि स्थानीय निवासी को आखिर बलरामपुर जिले से कोरिया जिले में कब तक अटैच कर कर रखा जाएगा?
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