कोरबा,25 जुलाई 2025 (घटती-घटना)। कोरबा जिले के सिविल लाइन थाना क्षेत्र अंतर्गत एक बच्चे की गले में चना अटकने से जान चली गई। इस मामले में परिजनों ने मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय के चिकित्सको पर इलाज में लापरवाही का आरोप भी लगाया है। जबकि चिकित्सक ने इंटरनल लीडिंग होने से मृत्यु होना बताया है। जानकारी के अनुसार छोटू कुमार (37) मध्यप्रदेश के राजगढ़ यावरा के निवासी हैं। वे कोरबा में पानीपुरी बेचने का काम करता है। उसका भाई भी यही काम करता है। सुबह लगभग 8 बजे 2 वर्षीय दिव्यांश नामक बालक कुमार घर के आंगन में खेल रहा था। खेलते-खेलते वह कमरे में आ गया और वहां रखे चने को निगल गया। इसके बाद मासूम रोने लगा और उसे सांस लेने में दिक्कत होने लगी। जिसके बाद उसके चाचा उसे फौरन मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय ले गए। उसका आरोप है कि जब भी वे चिकित्सक से बच्चे की स्थिति के बारे में पूछते तो उन्हें कहा जाता था कि वरिष्ठ चिकित्सक आकर देखेंगे। उनका कहना है कि उपचार में देरी के कारण बच्चे की मृत्यु हो गई। इस मामले में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. हरबंश ने बताया कि जब बच्चा चिकित्सालय पहुंचा,तभी से उसकी हालत गंभीर थी। चिकित्सको की टीम ने तुरंत इलाज शुरू किया,लेकिन चना गले से होकर फेफड़ों में जाकर फंस गया था। साथ ही इंटरनल लीडिंग भी शुरू हो गयी थी। इसी कारण बच्चे की मृत्यु हुई। उन्होंने इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही से इंकार किया है साथ ही परिजनों को शव सौंप दिया गया जिसे परिजन अपने गृह ग्राम ले गए हैं।
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