सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी नजरें
रायपुर,25 जुलाई 2025 (ए)। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) में उप अभियंता सिविल,मैकेनिकल और इलेक्टि्रकल के 118 पदों पर निकाली गई भर्ती प्रक्रिया एक नए विवाद में फंस गई है। यह मामला अब डिप्लोमा बनाम डिग्री की तर्ज पर एक बड़ी कानूनी लड़ाई बन गया है, जिसकी अंतिम सुनवाई अब सर्वोच्च न्यायालय में होगी।
सरकार द्वारा जारी भर्ती विज्ञापन में स्पष्ट किया गया था कि इन पदों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता तीन वर्षीय डिप्लोमा होगी। लेकिन इस पर आपत्ति जताते हुए डिग्री धारकों ने बिलासपुर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की,जहां से उन्हें राहत मिली। इसके बाद पूरी भर्ती प्रक्रिया पर असमंजस की स्थिति बन गई। डिप्लोमा धारकों ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उनका कहना है कि देश की बड़ी-बड़ी तकनीकी संस्थाएं जैसे इसरो, डीआरडीओ और पीएसयू में भी पद की प्रकृति के अनुसार शैक्षणिक योग्यता निर्धारित की जाती है। चूंकि यह पद जूनियर इंजीनियर का है,इसलिए डिप्लोमा ही इस पद के लिए उपयुक्त योग्यता होनी चाहिए। इसके साथ ही डिप्लोमा अभ्यर्थी 7 नवंबर 2024 को आए सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले का हवाला दे रहे हैं, जिसमें कहा गया था कि किसी भी भर्ती प्रक्रिया के दौरान नियमों में बदलाव नहीं किया जा सकता। अब इस पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का इंतजार है, जो न केवल इस भर्ती के लिए बल्कि भविष्य की तकनीकी भर्तियों के लिए भी दिशा तय करेगा। लाखों डिप्लोमा धारक युवाओं की उम्मीदें अब शीर्ष अदालत के फैसले पर टिकी हैं।
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