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बैकुंठपुर@क्या एसईसीएल बैकुण्ठपुर क्षेत्र में श्रमिकों का श्रमिक संघों से उठ रहा भरोसा ?

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-रवि सिंह-
बैकुंठपुर,24 जुलाई 2025 (घटती-घटना)। एसईसीएल सरकार के नियंत्रण में संचालित ऐसा उपक्रम जिसके अंतर्गत कोयला खदानों की जिम्मेदारी आती है और उसमें कार्यरत हजारों श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए एसईसीएल अंतर्गत कार्य करने वाले श्रमिकों के संगठन भी हैं जो समय समय पर श्रमिक हितों की रक्षा और श्रमिकों के विभिन्न हितों लाभ की पूर्ति उद्देश्य से गठित हैं जो प्रबंधन और श्रमिकों के बीच संवाद का जरिया बनते हैं और समाधान का मार्ग ढूंढकर किसी तरह भी प्रबंधन और श्रमिक टकराव की स्थिति को दूर करते हैं और जिनके गठन का मुख्य उद्देश्य अंत में श्रमिक हित ही होता है और वह श्रमिकों के लिए ही प्रतिद्भता से कार्य करते हैं। यह एक परम्परा भी चली आ रही है एसईसीएल उपक्रम में और यह एक संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार भी है श्रमिकों का जो उन्हें संगठित होकर संघों के माध्यम से अपने हितों की रक्षा का अधिकार देता है। एसईसीएल में श्रमिक संघों की संख्या यदि देखी जाए तो कई संघ हैं जो श्रमिकों को अपने संघ से जुड़ने प्रेरित करते चले आए हैं और ऐसा तबसे जारी है जबसे एसईसीएल की स्थापना हुई है या कोयला खदानों का संचालन शुरू हुआ है। आरम्भ में या आरम्भ से लगातार कई दशकों तक श्रमिक संघों की स्थिति और श्रमिक संघों पर श्रमिकों का विश्वास बढ़ा हुआ नजर आता रहा था जो आज की स्थिति में कमजोर हुआ है जो श्रमिक संघों की सदस्यता सूची और बनाए गए सदस्यों की संख्या देखकर समझा जा सकता है। जहां पहले या पूर्व में श्रमिक संघों की तरफ स्वयं आकर्षित हुआ करते थे और एक एक श्रमिक कई बार कई संघों की सदस्यता ग्रहण कर लेता था आज या वर्तमान के सदस्यता अभियान की सूची देखी जाए तो यह देखने को मिल रहा है कि श्रमिकों का विश्वास संघों के प्रति कमजोर हुआ है। यह विषय या बातें ऐसे ही नहीं बताई जा रही हैं इसका प्रमाण भी सामने आया है जो बैकुंठपुर एसईसीएल क्षेत्र के श्रमिक संघों की सदस्यता अभियान की सूची देखकर समझा जा सकता है। बैकुंठपुर एसईसीएल क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कोयला खदानों में कार्यरत श्रमिकों का इस वर्ष जो सदस्यता अभियान संघों द्वारा चलाया गया उसमें यह देखने को मिला कि नोटा ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है। बैकुंठपुर एसईसीएल क्षेत्र में कुल चार श्रमिक संघ सदस्यता अभियान के दौरान श्रमिकों के लिए पसंद बतौर सामने थे और एक अन्य विकल्प के तौर पर नोटा भी अभियान में एक चुनाव माध्यम था जिसके तहत श्रमिकों को चारों में से किसी के पसंद न होने की स्थिति में नापसंद का विकल्प दिया गया था, सदस्यता अभियान के दौरान नोटा को तीसरे पायदान पर स्थान मिला जो सभी संघों के लिए विचारणीय और चिंता का विषय होना चाहिए क्योंकि 4847 कुल श्रमिकों जिन्होंने सदस्यता अभियान में चार श्रमिक संघों और एक नोटा स्वरूप में नापसंद के विकल्प में से 816 श्रमिकों ने नोटा के विकल्प का चयन किया जो प्रतिशत में सख्या के कुल का 16 प्रतिशत है,वहीं दो श्रमिक संघ जहां प्रथम और द्वितीय स्थान पर सदस्यता अभियान में प्राप्त कर सकें हैं वहीं दो अन्य को नोटा ने पछाड़ दिया है और वह पंद्रह पंद्रह प्रतिशत सदस्यों के साथ चौथे और पांचवे स्थान पर हैं। कुल मिलाकर नोटा ने श्रमिक संघों के लिए एक चिंता का कारण छोड़ा है जो उन्हें यह सोचने पर मजबूर करेगा कि क्यों आखिर ऐसी स्थिति आई कि 16 प्रतिशत से भी ज्यादा श्रमिकों ने चार में से एक भी श्रमिक संघ को अपने हितों की सुरक्षा के लिए योग्य नहीं माना।पूरे मामले में यदि कोई यह कहे कि यह गलती से हुई कोई घटना है मामला है तो वह भी संख्या और प्रतिशत देखकर खारिज करने वाला मामला होगा क्योंकि इतनी बड़ी संख्या में गलती की गुंजाइश होना असंभव है। वैसे ऐसी स्थिति के पीछे की वजह क्या श्रमिक संघों से श्रमिकों का उठ रहा भरोसा है?
क्या श्रामिक संघों के नेतृत्वकर्ता ठेकेदारी या राजनीति में व्यस्त हैं?
क्या श्रामिक संघों के नेतृत्वकर्ता जो ठेकेदारी में या राजनीति में ही व्यस्त हैं कि स्वार्थ परक व्यक्तिगत लाभ उद्देश्य को श्रमिक भांपने लगे हैं इसलिए 16 प्रतिशत से ज्यादा श्रमिकों ने सदस्यता अभियान में तो भाग लिया लेकिन उन्होंने खुद को श्रमिक संघों से जोड़ने की बजाए उनसे दूरी बनाने में विश्वास जताया। कुल मिलाकर देखा जाए तो विषय ऐसा ही की श्रमिक अब संघ के नेताओं की कार्यप्रणाली से अवगत हो चुके हैं और वह जानने लगे हैं कि उनकी संख्या का भय या एक दबाव समूह का भय दबाव समूह के सदस्यों के हित के लिए उपयोग नहीं कर रहे श्रमिक संघ बल्कि वह अपने लिए इस दबाव समूह का उपयोग कर रहे हैं और अपने हित साधने में वह लगे हैं, कोई संघ नेता ठेकेदारी कर रहा है कोई राजनीति में रास्ता ढूंढ रहा है और श्रमिक हित से किसी का कोई सरोकार नहीं रह गया है। वैसे निश्चित ही यह आंकड़ा सदस्यता का यह बतलाता है कि पहले की अपेक्षा अब श्रमिक संघों के प्रति श्रमिकों का विश्वास कमजोर हुआ है जिसका कारण श्रमिक संघों के नेता हैं जिन्हें श्रमिक हित की बजाए स्व हित साधना ज्यादा महत्वपूर्ण लगता है और वह स्व हित उद्देश्य पूर्ति में ही व्यस्त हैं।
बैकुंठपुर क्षेत्र में बीएमएस प्रथम और एसएमएस द्वितीय स्थान पर है सदस्यता अभियान में…
बैकुंठपुर क्षेत्र अंतर्गत आने वाली कोयला खदानों में कार्यरत श्रमिकों,क्षेत्र अंतर्गत आने वाले अस्पताल और क्षेत्रीय भंडार गृह में कार्यरत श्रमिकों के लिए चलाए गए सदस्यता अभियान में पहला स्थान बीएमएस को मिल सका है वहीं दूसरे स्थान पर एसएमएस है,बीएमएस को कुल 4847 सदस्य जो अभियान में भाग लेने वाले हैं में से 1487 श्रमिकों का समर्थन मिला है जिन्होंने बीएमएस की सदस्यता ग्रहण की है,वहीं एसएमएस को 1086 सदस्य मिल सके हैं। श्रमिकों ने अपनी पसंद अनुसार श्रमिक संघों से जुड़ना स्वीकार किया है और यह पूरी प्रकिया पारदर्शी तरीके से सम्पन्न हुई है, बीएमएस और एसएमएस ने कुल में से प्रतिशत अनुसार 50 प्रतिशत से जरा ज्यादा समर्थन श्रमिकों का अपनी तरफ प्राप्त किया है जहां बीएमएस 29 प्रतिशत के साथ प्रथम स्थान पर है वहीं एसएमएस 22 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर।
नोटा ने तीसरे पायदान पर दर्ज की अपनी उपस्थिति, अन्य दो श्रमिक संघों को नोटा ने पछाड़ा…
सदस्यता अभियान के दौरान नोटा ने चार संघों के मुकाबले में खुद अंतिम विकल्प बतौर अपनी उपस्थिति के दौरान तीसरा स्थान प्राप्त किया है,नोटा ने कुल 816 मत अपने खाते में दर्ज किए और जो कुल का 16 प्रतिशत है लगभग,अन्य दो श्रमिक संघों की स्थिति इतनी खराब रही उनका प्रदर्शन इतना निचले क्रम पर रहा कि नोटा ने ही उन्हें पछाड़ दिया जो उनके अस्तित्व के हिसाब से ही चुनौती वाला मामला बन गया। कुल मिलाकर यदि नोटा की स्थिति और उसके विषय में बात की जाए तो उसने सभी श्रमिक संघों को आयना दिखाने का काम किया उनके लिए एक चिंता का विषय छोड़ा।
चरचा,झिलमिली सहक्षेत्र सहित हैडक्वाटर में बीएमएस एचएमएस पर रहा भारी,कटकोना में एचएमएस की स्थिति बीएमएस से मजबूत
श्रमिकों के मतदान को और श्रमिक संघों के लिए उनका समर्थन यदि अलग अलग सहक्षेत्र या अन्य एसईसीएल कार्यालय या अस्पताल के हिसाब से देखा जाए जहां श्रमिक कार्यरत हैं तो यह देखने को मिलेगा कि चरचा सहक्षेत्र,झिलमिली सहक्षेत्र सहित हैडमटर में बीएमएस ने सबसे अधिक श्रमिकों का समर्थन प्राप्त किया उन्होंने अधिक सदस्य बनाए वहीं कटकोना मात्र में एसएमएस ने बढ़त बनाए रखी अन्य सभी जगह वह पिछड़ी नजर आई। बीएमएस पर कई जगहों के श्रमिकों ने एचएमएस से ज्यादा विश्वास जताया है। असली प्रतियोगिता तीन में नजर आई जिसमें एक नोटा शामिल है।


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