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एमसीबी/चिरमिरी@पुलिसकर्मियों पर गश्त के दौरान लुट का लगा आरोप,आरोप सही तो क्या रक्षक बने भक्षक?

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रात्रि गश्त क्या आम लोगों को लूटने के लिए एक नायाब तरीका,आरोप सही तो मामला काफी गंभीर

एमसीबी/चिरमिरी,23 जुलाई 2025(घटती-घटना)। क्या रक्षक ही भक्षक बन गए हैं? क्या पुलिस की रात्रि गश्त आम लोगों को लूटने का एक नायाब तरीका? ऐसे सवाल इसलिए क्योंकि नवीन जिले एमसीबी के नगर निगम चिरमिरी के कोरिया कॉलरी वार्ड निवासी गोपाल महराज नाम के व्यक्ति ने पुलिस अधीक्षक एमसीबी को एक शिकायत पत्र प्रेषित किया है जिसमें उन्होंने इस बात का उल्लेख किया है उनके साथ जिले के पोड़ी पुलिस थाने के दो पुलिसकर्मियों ने मारपीट भी की है और उनके द्वारा उनके पास रखे गए पैसे की भी लूटपाट की गई है एटीएम भी छीन लिया गया है और इन घटनाओं के समय उन्होंने एक विरु नाम के व्यक्ति को भी साथ रखा था उसने भी मारपीट की थी,यह घटना उसके साथ रात के समय घटित हुई है जब वह एक ढाबे से खाना खाकर लौट रहा था और घर जा रहा था और तब पुलिसकर्मी रात्रि गश्त पर थे और वह कहीं न कहीं असामाजिक या अपराधी तत्व से आम लोगों की हिफाजत के लिए तैनात थे और वह काम उसके विपरीत करते हुए आम आदमी को ही लूट रहे थे। कोरिया कॉलरी निवासी गोपाल महराज ने शिकायत पुलिस अधीक्षक सहित पोड़ी पुलिस थाना प्रभारी से तो की ही है उन्होंने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, गृहमंत्री सहित पुलिस विभाग के उच्च अधिकारियों से भी शिकायत की है। अब देखना है कि इस मामले में दोषी पुलिसकर्मियों पर क्या कार्यवाही होती है और क्या इस मामले में पुलिस मामला जांच में डालकर मामले को निपटाने का प्रयास करती है अपनी छवि बिगड़ने से बचाने का वह प्रयास करती है,वैसे पुलिस विभाग के मामले में जांच और जांच के नाम पर मामले को दबाने का पूरा खेल आम है और चूंकि पुलिस की जांच पुलिस करती है इसलिए कार्यवाही होगी यह बिल्कुल तय नहीं है। शिकायतकर्ता गोपाल महराज ने शिकायत में इस बात का भी उल्लेख किया है कि पुलिस वालों के साथ जो युवक था वह खुद को सांसद प्रतिनिधि बता रहा था और सभी मिलकर शिकायतकर्ता को पैसा नहीं देने पर गांजा,शराब या अन्य किसी मामले में फंसाने की बात भी कर रहे थे।
प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, गृहमंत्री सहित पुलिस के आला अधिकारियों को लिखित शिकायत की शिकायतकर्ता ने…
शिकायतकर्ता चिरमिरी कोरिया कॉलरी निवासी गोपाल महराज ने शिकायत में यह बात लिखी है कि वह रात 11:30 बजे अपने ऑफिस से काम निपटाकर और एक ढाबे में खाना खाकर वापस घर लौट रहा था,इसी दौरान जब वह जगन्नाथ मंदिर के पास पहुंचा तब उसे दो पुलिसकर्मी मिले जिन्होंने उसे रोक लिया और पूछताछ करने लगे,उनके द्वारा पूछे सवालों के उसने सही जवाब दिए और बियर पीने की बात भी उसने स्वीकार की,पुलिसकर्मियों ने उसके साथ गाली गलौज की अपशब्द कहे और पैसे की मांग की और कई एटीएम भी उसे लेकर गए जहां पैसा नहीं निकला जबकि पुलिसकर्मी तीन हजार की मांग कर रहे थे,इस बीच पुलिसकर्मियों ने हल्दीबाड़ी निवासी विरु खान को बुलाया और जिसने शिकायतकर्ता का हांथ मरोड़ा,हांथ मरोड़कर तीनों ने उसके साथ मारपीट की और उसे झूठे मामले में फंसाने की बात भी की,इस दौरान उसकी जेब से उन्होंने 20000 रुपए भी निकाल लिए और उसका एटीएम कार्ड भी अपने पास रख लिया। शिकायतकर्ता ने यह भी लिखा है शिकायत में की उसे पोड़ी पुलिस थाने की पुलिस पर भरोसा नहीं है इसलिए वह कई जगह शिकायत लिखकर भेज रहा है और कार्यवाही की मांग कर रहा है।
क्या पुलिस के नाकेबंदी और गश्त अभियान के पीछे का उद्देश्य अवैध वसूली लूटपाट?
चिरमिरी कोरिया कॉलरी के गोपाल महराज की शिकायत यदि सही है तो क्या पुलिस की नाकेबंदी और गश्त अभियान केवल अवैध वसूली और लूटपाट के लिए एक माध्यम है,गोपाल महराज ने शिकायत में मारपीट और गाली गलौज का भी आरोप लगाया है और इससे यह भी सवाल उठता है कि क्या गश्त और नाकेबंदी आम व्यक्ति में ही भय उत्पन्न करने के लिए एक अभियान है, पुलिस की कार्यप्रणाली और ऐसे मामले जो शिकायत स्वरूप सामने आ रहे हैं उससे पुलिस की छवि धूमिल हो रही है।


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