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कोरिया@जिला चिकित्सालय बैकुंठपुर में मरीजों की स्थिति भगवान भरोसे वाली,डॉक्टर नहीं बैठते समय पर

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-रवि सिंह-
कोरिया,22 जुलाई 2025 (घटती-घटना)। कोरिया जिले का जिला चिकित्सालय अब मरीजों के लिए ऐसा सुविधा केंद्र हो चुका है जहां मरीज बीमारी में आते तो हैं समय पर इलाज की चाहत में जल्द आराम की उम्मीद में लेकिन उन्हें जब आकर यह पता चलता है कि डॉक्टर तो बैठे ही नहीं हैं जबकि उनके अपने कक्ष में बैठने का समय हो गया है और वह फिर भी कक्ष से नदारद हैं और उनसे इलाज और अपने कष्ट से आराम की चाहत में आया मरीज फिर इंतजार के लिए या तो डॉक्टर के मजबूर हो जाता है और कुछ समय तक और शारीरिक कष्ट झेलता है और या फिर निजी किसी अस्पताल या डॉक्टर के पास जाने निर्णय लेने विवश हो जाता है। जिला चिकित्सालय का यह हाल एक दिन का नहीं है यह प्रतिदिन का मामला हो गया है और अब बरसात के इस मौसम में जब बीमारियां बढ़ी हुई हैं मरीज भी इस कारण दिक्कत परेशानी झेलने मजबूर हैं। जिला चिकित्सालय के डॉक्टरों के विलंब से अस्पताल आने के पीछे की वजह उनका निजी प्रेक्टिस बताया जाता है और जिसको वह ज्यादा प्राथमिकता देते हैं। कई ऐसे डॉक्टर भी हैं जो विलंब से आते हैं जिन्हें लोग भगवान भी मानते हैं लेकिन वह अपना मूल कर्तव्य नहीं निभाना चाहते मन से वह निजी प्रेक्टिश को ज्यादा तवज्जो देते हैं क्योंकि यह उन्हें अतिरिक्त आय प्रदान करता है। जिला चिकित्सालय का वर्तमान में हाल ऐसा है कि मरीजों की संख्या काफी अधिक प्रतिदिन अस्पताल पहुंचती है और वह बड़ी उम्मीद से पहुंचती है क्योंकि बरसात के मौसम में बीमारियां बढ़ना आम है। जिला चिकित्सालय से आई तस्वीर इस बात की पुष्टि भी करती है और तस्वीर भेजने वाले ने बताया कि 11 बजे सुबह तक कोई डॉक्टर अपने कक्ष में बैठा नजर नहीं आया और न ही कब तक वह आयेंगे यह कोई बता सका,पूछने पर यही पता चला कि निजी प्रैक्टिस से जैसे ही वह खाली होंगे वह आयेंगे यह उनके खाली होने पर निर्भर है। वैसे शर्मनाक मामला यह है कि जिन डॉक्टरों को गरीबों मजबूरो के लिए उनके दुख तकलीफों के हरण की जिम्मेदारी मिली है जिसके लिए वह शान से महीने में लंबा वेतन ले रहे हैं वही कर्तव्य वह नहीं निभा पा रहे हैं।
डॉक्टर व स्टॉप की लापरवाही सीसीटीवी में देखी जा सकती है…
आपको बता दे कि मंगलवार के दिन यानी की 22 जुलाई जिला अस्पताल में मरीजों की भीड़ थी और मेडिसिन काउंटर से लेकर ओपीडी में कोई भी स्टाफ व डॉक्टर नहीं थे,मरीज बैठकर डॉक्टर का इंतजार करते देखे जा रहे थे जब वहां पर पता किया गया तो पता चला कि ऐसी स्थिति आए दिन देखने को मिलती है और यदि विश्वास नहीं है तो अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरे को खंगाल गया तो डॉक्टर के आने के समय और स्टाफ के आने को समय को उसमें साफ देखा जा सकता है, पर अब इतनी जहमत उठेगा कौन क्योंकि किसी में नही स्वस्थ व्यवस्था बेहतर करने की लालसा है ही नहीं?
जिन्हें कहते हैं लोग भगवान…मानते हैं भगवान…वह भी कर्तव्य चोरी में अव्वल…बाहरी सेटिंग की दवाइयों के एक एजेंट
जिला चिकित्सालय में पदस्थ कुछ डॉक्टरों को कुछ लोग भगवान की भी उपाधि से नवाजते हैं और सोशल मीडिया में उनकी महिमा का बखान करते हैं लेकिन वह कर्तव्य चोरी में सबसे अव्वल हैं,जहां से वेतन पाते हैं वहां समय कम देते हैं और घर पर पैसा लेकर वह कभी भी उपलब्ध रहते हैं,निजी रूप से वह जब देखते हैं मरीज को तो वह महंगी सेटिंग की दवाइयों के एक एजेंट की तरह काम करते हैं और वही दवाइयां लिखते हैं जो अन्य ब्रांड में सस्ती तो मिल सकती हैं लेकिन वह ऐसे ब्रांड की लिखते हैं कि जो महंगी भी होती है और वह वहीं मिलती है जहां डॉक्टर की सेटिंग होती है, वैसे इस मामले में सेटिंग वाली दवाई मामले में एक शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर का नाम सबसे ऊपर है जो सेवाभाव की बजाए स्व उत्थान भाव से काम करने के लिए विख्यात हैं और जिन्हें कुछ लोग भगवान कहते हैं सोशल मीडिया में।
बरसात का मौसम और बीमारियों की शुरुआत…डॉक्टर नदारद आम इंसान परेशान…
बरसात के मौसम में बीमारियों की शुरुआत हो जाती है और प्रायः हर व्यक्ति बीमार होता है यह एक माना विषय है,बीमार व्यक्ति अपने दुख तकलीफ से निजात पाने डॉक्टर के पास जाने का सोचता है और अपनी क्षमता अनुसार वह निजी या शासकीय अस्पताल का चयन करता है,शासकीय अस्पताल वह पहुंचकर केवल डॉक्टर के इंतजार में ही समय बिताता नजर आता है,वह एक तरफ बीमार होता है कष्ट में होता है दूसरी तरफ वह इसी समय उन डॉक्टरों के कारण और परेशान हो जाता है जिन्हें उनकी सुविधा के लिए सरकार ने वेतन पर रखा है। यह शासकीय अस्पताल की आम सी व्यवस्था बन चुकी है जो हरदम ऐसी ही नजर आती है,समय पर अस्पताल नहीं आने वाले कोई एक दो डॉक्टर नहीं हैं बल्कि सभी का एक जैसा हाल है जो ऐसा ही चला आ रहा है।
निजी प्रेक्टिस है वजह…वेतन से अधिक की चाह में सेवाभाव से दूर जा चुके डॉक्टर
निजी प्रेक्टिस इसकी वजह मानी जाती है,शासकीय अस्पताल के डॉक्टर निजी प्रेक्टिश में व्यस्त रहते हैं,वह सुबह हो या शाम हो हर समय वेतन से अधिक की चाह में लगे रहते हैं,डॉक्टरों के द्वारा अस्पताल का रुख तब किया जाता है जब उनके निजी अस्पताल से या घर से सुबह शाम आने वाले मरीज इलाज कराकर लौट जाते हैं,घर या क्लिनिक में पैसे से वह मरीजों का हाल चाल जानते हैं दवाईयां लिखते हैं और यही वजह है कि वह शासकीय कर्तव्य से चोरी करते हुए वहां पहुंचने के समय में ही कटौती कर देते हैं। प्रायः हर डॉक्टर प्रतिदिन विलंब से अस्पताल आता है और वह जल्द जाने की भी फिराक में रहता है।
ओपीडी कक्ष में नहीं मिलने पर राउंड पर जाने की बताई जाती है बात,झूठ बोलने के लिए अन्य कर्मचारी देते हैं साथ
किसी डॉक्टर का अस्पताल में आने का समय निर्धारित है और जाने का भी निर्धारित है,अब यदि कोई मरीज जब पहुंचता है ओपीडी कक्ष में और वह डॉक्टर को नहीं पाता है तो वह किसी न किसी से डॉक्टर के आने का समय पूछता है और तब उसे बताया जाता है कि डॉक्टर राउंड पर हैं, ऐसा बोलने के लिए ट्रेंड लोग अस्पताल के ही कर्मचारी होते हैं जो ऐसा बोलकर डॉक्टर की अनुपस्थिति को छिपा देते हैं जबकि डॉक्टर घर से आए नहीं होते हैं।


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