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मनेंद्रगढ़@एमसीबी नया जिला तो बना अब मुख्यालय कहां रहेगा उसे तय करने के लिए आंदोलन करने की मिल रही चेतावनी

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मनेंद्रगढ़,20 जुलाई 2025 (घटती-घटना)। नवीन जिला एमसीबी अस्तित्व में आ चुका है इसके बनने से लेकर इसके अस्तित्व में आने तक काफी संघर्ष देखने को मिला था, फिर भी अंततः कांग्रेस की सरकार में यह जिला अस्तित्व में आ गया था, यह जिला हमेशा ही कांग्रेस की देन मानी जाएगी,पर आज इस जिले का मुख्यालय कहां स्थित होगा इसे लेकर लड़ाई चल रही है, मुख्यालय को स्थाई रूप से जगह देने का अब समय आ गया है, पर यह जगह कौन सा होगा इसे लेकर संशय बरकरार है,लड़ाई भी जारी है एक वर्ग चाह रहा है कि मुख्यालय राष्ट्रीय राजमार्ग पर ही रहे ताकि दूर-दराज से आने वाले लोगों को इसका लाभ मिल सके, वही दूसरा वर्ग इसे राष्ट्रीय राजमार्ग से पृथक रखना चाह रहा है अब देखना यह है कि आखिर एमसीबी जिले का मुख्यालय स्थाई रूप से कहां स्थापित होगा?
जिला मुख्यालय निर्माण को लेकर पुरानी ज्वाला भड़का दी है। अब व्यापारी वर्ग और आमजन खुलकर अपनी आवाज उठा रहे हैं। अधिकांश नागरिकों का कहना है कि कलेक्टर कार्यालय का निर्माण राष्ट्रीय राजमार्ग-43 पर ही होना चाहिए, अन्यथा विरोध की लहर तेज हो सकती है। व्यापारी हेमंत सोनी ने सोशल मीडिया पोस्ट में पुरानी यादों को ताजा करते हुए लिखा,जब मनेंद्रगढ़ एमपी में था, तब 1984 से जिला बनाओ आंदोलन की नींव डाली गई। उस दौर में भाजपा नेता स्वर्गीय शशि भूषण अग्रवाल के नेतृत्व में नगर बंद, क्रमिक भूख हड़ताल और 1998-99 में जेल भरो आंदोलन तक चला। मनेंद्रगढ़ वासियों ने बैकुंठपुर, शहडोल, अंबिकापुर और रामानुजगंज तक की जेलें भर दीं। आज जब मनेंद्रगढ़ को उसका हक मिलना चाहिए, तो संदेह क्यों? क्या हमारे ही क्षेत्र के मंत्री (जो खड़गवां निवासी हैं) इस विषय पर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखा रहे? साथ ही जिले का नाम विकृत कर दिया गया है, जिससे असंतोष और गहराता जा रहा है।
पूर्व विधायक गुलाब कमरों की चेतावनी
एमसीबी जिले में कलेक्टर कार्यालय के निर्माण स्थल को लेकर पूर्व विधायक गुलाब कमरों ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने कलेक्टर को लिखे पत्र में कहा, चयनित स्थल एनएच-43 से दूर और असुरक्षित है। दूरस्थ ग्रामीणों के लिए यहां तक पहुंचना कठिन होगा। पहले उन्हें हाईवे तक आना पड़ेगा, फिर अतिरिक्त साधन (रिक्शा या ऑटो) से सफर करना होगा। यह न केवल समय साध्य होगा बल्कि आर्थिक बोझ भी डालेगा।
स्थानीय संगठनों का दबाव बढ़ा…
शहर के कई सामाजिक संगठन,व्यापारी संघ और जागरूक नागरिक अब एक स्वर में कह रहे हैं,कलेक्टर कार्यालय का निर्माण राष्ट्रीय राजमार्ग-43 के किनारे ही होना चाहिए। उनका मानना है कि यह स्थान जिले के सभी हिस्सों के लिए सुविधाजनक और सुगम रहेगा। अब सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन जनभावनाओं को समझेगा या विरोध की चिंगारी आंदोलन का रूप लेगी?


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