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कोरिया@ ग्राम पंचायत सचिव उच्च अधिकरियों के भी आदेशों की कर रहे अवहेलना,उच्च अधिकारी के आदेश पश्चात भी नहीं छोड़ रहे प्रभार

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  • मामला कोरिया जिले के बैकुंठपुर विकासखंड से जुड़ा हुआ,ग्राम पंचायत बरदिया के सचिव का हुआ है तबादला
  • जिला पंचायत सीईओ ने किया है तबादला फिर भी ग्राम पंचायत बरदिया सचिव नहीं दे रहे दूसरे सचिव को प्रभार
  • सुशासन तिहार में हुई थी बरदिया ग्राम पंचायत सचिव की शिकायत,शिकायत के बाद ग्राम कटोरा लिए हुआ था आदेश
  • क्या सुशासन तिहार भी केवल एक समय तक के लिए था सीमित, अभियान खत्म महत्व हुआ खत्म?
  • ग्राम पंचायत बरदिया सचिव शाहिद खान हैं काफी प्रसिद्ध ग्राम सचिव, कार्यप्रणाली के लिए हैं विख्यात


-रवि सिंह-
कोरिया,12 जुलाई 2025 घटती-घटना)।
कोरिया जिले की प्रशासनिक व्यवस्था आजकल भगवान भरोसे है, उच्च अधिकरियों के निर्देशों की अवहेलना आम है, ऐसा हम ऐसे ही नहीं कह रहे हैं इसके पीछे की वजह भी है और वजह भी ऐसी है कि कोई भी यही कहेगा कि जिले के उच्च अधिकारियों का अपने ही अधीनस्थ कर्मचारियों पर नियंत्रण नहीं है और निचले स्तर के कर्मचारी अपनी ही मनमानी करते हैं और उच्च अधिकारी उनके सामने समर्पण की स्थिति में हैं,उच्च अधिकारी के आदेश की अवहेलना का वैसे तो कई मामले समय समय पर सामने आते रहते हैं लेकिन ताजा मामला एक ग्राम पंचायत सचिव से जुड़ा हुआ है जो सीईओ जिला पंचायत के आदेश की अवहेलना कर रहा है,बता दें कि सुशासन तिहार के दौरान ग्राम पंचायत बरदिया के सचिव शाहिद खान की शिकायत ग्रामीणों ने की थी और उसे अन्यत्र भेजे जाने की मांग की थी,ग्रामीणों की मांग पर ग्राम पंचायत सचिव शाहिद खान को ग्राम बरदिया से ग्राम कटोरा के लिए आदेशित तो जिला पंचायत सीईओ द्वारा किया गया लेकिन एक माह से भी अधिक समय बीत जाने के बाद भी शाहिद खान बरदिया में ही जमे हुए हैं और अन्य को प्रभार देने में आना कानी कर रहे हैं। वैसे शाहिद खान की गिनती उन ग्राम पंचायत सचिवों में होती है जिनकी कार्यप्रणाली हमेशा विवादित रही है और इनकी जहां भी पदस्थापना होती है वहां इनके जाते ही विरोध शुरू हो जाता है। अपने आज तक के कार्यकाल में इनके द्वारा अथाह संपत्ति अर्जित की गई है यह भी जहां जांच का विषय है वहीं जहां जहां इनकी पदस्थापना रही है वहां का निर्माण कार्य इनके कार्यप्रणाली को उजागर करने गवाह है। ग्रामीणों से भी उचित और प्रेम पूर्वक व्यवहार न करने वाले ग्राम पंचायत सचिव की शिकायतें कई बार हुईं लेकिन कभी भी ऐसी कार्यवाही नहीं हुई उनके ऊपर की अन्य ग्राम पंचायत सचिवों के लिए भी वह एक सीख बन सके और उनके खुद को भी भविष्य में खुद के व्यवहार में सुधार की आवश्यता महसूस हो, शाहिद खान की शिकायत सुशासन तिहार के दौरान हुई थी और उन्हें ग्राम बरदिया से सुशासन अभियान की सफलता बताने के हिसाब से ही हटाया गया था सीईओ जिला पंचायत ने आदेश जारी कर उनका तबादला किया था लेकिन आज भी वह बरदिया का प्रभार सौंपने तैयार नहीं हैं और इस तरह वह शासन के महत्वपूर्ण अभियान सुशासन तिहार की भी हवा निकाल रहे हैं और जिला अधिकारियों को आदेश पालन न करते हुए चुनौती दे रहे हैं। वैसे ग्राम पंचायत सचिव के तबादले मामले में प्रभार अन्य को दिलाना जनपद पंचायतों का काम है वहीं बैकुंठपुर जनपद पंचायत इस मामले में क्यों मौन है क्यों शाहिद सचिव पर मेहरबान है यह भी एक सवाल है।
आखिर ग्राम पंचायत सचिव कितने प्रभावशील है कि वित्तीय प्रभार देने में भी हीला-हवाली कर रहे हैं?
शाहिद खान बैकुंठपुर विकासखंड के ऐसे ग्राम पंचायत सचिव हैं जो मन के अपने मालिक हैं और कहीं न कहीं जनपद से जिला तक अपनी मुट्ठी में यह रखते हैं,ऐसा हम नहीं कह रहे हैं ऐसा आम जनमानस में चर्चा है कि शाहिद खान जनपद से जिले तक में इतने मशहूर हैं कि अधिकारी जल्द इन्हें मजबूर किसी मामले में कर पाने में असमर्थ रहते हैं भले मामला आवश्यक निर्देश पालन का ही क्यों न हो,ताजा मामले में वह उस ग्राम पंचायत का वित्तीय प्रभार अन्य को नहीं सौंप रहे हैं जहां से उन्हें हटाया गया है,यह इतने प्रभावशाली हैं कि यह उच्च अधिकारियों के आदेश की ही अवहेलना कर वित्तीय प्रभार देने में हिला हवाली कर रहे हैं यह भी एक सवाल है,वैसे इनके प्रभाव का आंकलन करने के लिए इतना ही जानना काफी है कि यह उंगली रखकर ग्राम पंचायत चुनते हैं और कई बार दो दो ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी अकेले पाने में सफल भी रहते हैं।
क्या उन्हें डर है कि वित्तीय प्रभार देने के बाद उनके कार्यकाल में किए गए वित्तीय अनियमिताओं की पोल खुल जाएगी?
वैसे ग्राम पंचायत सचिव शाहिद खान बरदिया ग्राम से कटोरा भेजे गए हैं,यह आदेश जिला पंचायत सीईओ ने जारी किया है,आदेश का पालन पूरी तरह आज भी इन्होंने नहीं किया है और वित्तीय प्रभार देने में इन्होंने एक महीने से भी ज्यादा का समय बीता दिया और अब तक प्रभार नहीं दिया है,वैसे क्या इन्हें भय है कि वित्तीय प्रभार देते ही इनके कार्यकाल की अनियमिताओं की पोल खुल जाएगी जो निर्माण कार्यों सहित अन्य मामले में की गई है इसलिए यह प्रभार नहीं दे रहे हैं,वैसे माना यही जा रहा है कि पिछली करनी छिपाने यह प्रयासरत हैं और इसी कारण यह प्रभार देने में विलंब कर रहे हैं।
ग्राम पंचायत के विकास के लिए नियुक्त ग्राम पंचायत सचिव हुए विकसित,ग्राम पंचायतों का हाल हुआ बेहाल
ग्राम पंचायत सचिवों की गाथा बड़ी मजेदार है,ग्राम पंचायत सचिवों को ग्राम विकास की जिम्मेदारी सरकार ने दी है और देखने में जिम्मेदारी उल्टी निभाते नजर आ रहे हैं ग्राम पंचायत सचिव,आज ग्राम पंचायतों की हालत क्या है जिले में किसी से छिपा नहीं है वहीं ग्राम पंचायत सचिवों की जिंदगी किस तरह चकाचौंध वाली बन चुकी है देखा जा सकता है,गरीबों के लिए जिन्हें काम करना था गरीबी मिटाने के लिए जिन्हें शासन की योजनाओं को जमीन पर उतारना था वह खुद के विकास के लिए इतने आतुर हुए कि वह स्व विकास लक्ष्य से साथ काम करते रहे और धनाढ्य बनते चले गए, आज कम वेतन पाने वाले ग्राम पंचायत सचिवों की आर्थिक स्थिति कैसे सुदृढ़ हुई इसका आंकलन यदि करना हो तो केवल उनका आंकलन इसी आधार पर हो जाएगा कि वह महंगी गाडि़यों में चलते हैं और उनके घर आलीशान हो चुके हैं सर्व सुविधायुक्त हो चुके हैं,एक एक ग्राम पंचायत सचिव कई गाडि़यों का महंगी गाडि़यों का शौक पाल रहा है घर महंगे से महंगे बनवा रहा है वहीं जिन ग्रामों में वह ग्राम विकास और सुविधा के लिए कोई निर्माण कार्य करा रहा है वह धराशाई या तो हो रहा है या जर्जर होता जा रहा है,कई जगह तो बिना निर्माण आहरण भी हो रहा है और जिम्मेदार मौन हैं। कुल मिलाकर देखा जाए तो ग्राम पंचायत सचिवों के मामले में जिला प्रशासन आत्म समर्पण कर चुका है और उन्हें मनमानी की भी छूट है और उन्हें किसी कार्यवाही का भय इसलिए नहीं है क्योंकि भ्रष्टाचार का पहला पायदान वही हैं और जिससे चढ़कर ही आगे अन्य को बढ़ना है और कुछ उन्हीं से पाना है।


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