Breaking News

अम्बिकापुर/कोरिया@क्या मैनपाट में राष्ट्रीय अध्यक्ष की नसीहत के बाद भी विधायको ने कुछ नही सीखा?

Share

भरतपुर सोनहत में सत्ता और संगठन के बीच लगातार देखने को मिल रही तकरार।
जेपी नड्डा ने ठेकेदारों से दूर रहने दी नसीहत,यहाँ कार्यकर्ता कर रहे बाहरी ठेकेदारों का विरोध
क्या भरतपुर सोनहत में बाहरी ठेकेदारों के हावी होने से मुख्य धारा के कार्यकर्ता हाशिए पर जा रहे हैं?
विधायक के कार्यक्रमो में नही दिख रहे संगठन के पदाधिकारी, क्या अंदर खाने सब कुछ ठीक नही है?
शाला प्रवेश उत्सव के कार्यक्रम में स्थानीय निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के नाम नही,सोशल मीडिया पर हुआ विरोध।

-न्यूज डेस्क-
अम्बिकापुर/कोरिया,11 जुलाई 2025(घटती-घटना)।
छत्तीसगढ़ सरगुजा के मैनपाट में आयोजित भाजपा के विधायक सांसदों के प्रशिक्षण शिविर में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पार्टी विधायकों और सांसदों को भ्रष्टाचार से दूर रहने नसीहत दी। उन्होंने कहा कि आप लोग ठेकेदारों और दूसरी अन्य व्यवस्थाओं से दूर रहें, उनके चंगुल में न फंसे, वरना दोबारा चुनाव नहीं जीत पाएंगे,बिना वजह मीडिया में बयानबाजी न करें,ऐसा न समझें कि आप ही प्रमुख हैं,राष्ट्र्र्र्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने यह बातें मैनपाट में सोमवार को भाजपा के सांसदों और विधायकों के प्रशिक्षण शिविर के उद्घाटन में कहीं, क्या इन नसीहत को मंत्री विधायक समझ पाएंगे या फिर सिर्फ वह तीन दिवसीय चिंतन शिविर केवल भ्रमण शिविर बनकर रह जाएगा? क्योंकि चिंतन शिविर खत्म होने के बाद कुछ ऐसी ही स्थिति अभी भी निर्मित है, चिंतन शिविर पर सवाल यह भी है की क्या छत्तीसगढ़ की जनता के लिए चिंतन शिविर में चिंता की गई या फिर सिर्फ विधायक मंत्री का परफॉर्मेंस कैसे सुधर सके इस विषय पर ही चिंतन हुआ या कहा जाए तो लाखों रुपए जिस शिविर में खर्च हुए वह शिविर सिर्फ एक पर्यटन स्थल पर सैलानी बनकर आकर ही खत्म हो गया? इस बार छत्तीसगढ़ में दो बड़े आयोजन देखने को मिले जहां भाजपा ने मंत्री विधायकों के लिए चिंतन शिविर का आयोजन किया सरगुजा संभाग में तो वहीं कांग्रेस ने किसान जवान संविधान सभा का आयोजन किया यह दोनों बड़े कार्यक्रम थे और यह दोनों के मायने अलग-अलग थे अब इन कार्यक्रमों का असर जनता पर कितना पड़ेगा यह तो समय के गर्भ में है पर सवाल यह है कि क्या दोनों ने ही जनता को आगामी चुनाव में कितना बेवकूफ बना सकते हैं इस पर ही यह कार्यक्रम आयोजित कर जनता को बेवकूफ बनाया है? दोनों आयोजन एक ही दिन हुए पर जगह अलग-अलग थे बस इतना ही अंतर है एक तरफ कांग्रेस आगामी चुनाव में फिर से कम बैक करने के लिए किसान जवान संविधान पर फोकस कर रही थी तो वहीं भाजपा अगले बार भी सरकार में बने रहने के लिए विधायकों सांसदों का चिंतन शिवर रखी थी।

विकास कार्य नही होने से कार्यकर्ता मायूस
सूत्रों की माने तो सोनहत क्षेत्र में अभी तक विकास कार्य नही होने से कार्यकर्ता मायूस हैं। कुछ कार्यकर्ता और पदाधिकारी तो अब यह स्वीकार करने लगे हैं कि क्षेत्र में अभी तक ऐसा कोई कार्य नही हो सका जिसे लेकर वो जनता के बीच जा सके और गौरवान्वित महसूस कर सके। सूत्रों से यह भी जानकारी मिली है कि जिन कार्यकर्ताओ ने अपना पूरा दम लगा कर चुनाव जिताने का काम किया था उन्हें सूरजपुर के कुछ लोगो ने चुनाव काल के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं से सम्पर्क कर इस तरह की स्थिति से आगाह किया था लेकिन कार्यकर्ताओ ने उनकी नही सुनी और चुनाव पर ही फोकस किया।
विधायक बनने के बाद नए मित्र और रिश्तेदार पैदा हो जाते हैं…
भाजपा के मैनपाठ में आयोजित प्रशिक्षण के अतिम दिन सांसदों और विधायकों की क्लास में राष्ट्रीय संगठन मंत्री वीएल संतोष ने ट्रिपल एस का फारमूला दिया। उन्होंने संयोजन, सेहत और संयम के सूत्र वाक्य को जीवन में उतारने की सीख दी। उन्होने कहा कि जिन कार्यकर्ताओं और जनता की बदौलतआप सांसद- विधायक बने हैं, उसके साथ बेहतर संयोजन रंखिए। उन्होंने कहा कि सांसद-विधायक बनते ही नए मित्र, नए रिश्तेदार पैदा हो जाते इनसे बचकर रहें। अपने आचरण, यवहार और कार्य शैली में संयम बरते, पर क्या वाकई विधायक और सांसद संयम बरत रहे हैं, भरतपुर सोनहत ही नही अधिकांस विधानसभा क्षेत्र यह समस्या देखने को मिल रही है और कार्यकर्ताओं का दर्द सामने आ रहा है कि नए और बाहरी लोग को प्राथमिकता मिल रही है और पुराने कर्मठ कार्यकर्ता हासिये पर जा रहे हैं।
क्या कहा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने…
उन्होंने सत्ता और संगठन के बीच समन्वय रखने की नसीहत भी दी। साथ ही संगठन के साथ अधिक तालमेल बैठाकर जमीनी स्तर पर काम करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि भाजपा की डबल इंजन की सरकार के विकास कार्यों और इनिशिएटिव को गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाएं, केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को जनता के बीच ले जाएं। उन्होंने सांसदों और विधायकों को आगामी कार्ययोजनाओं के लिए दिशा-निर्देश भी दिए। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, राष्ट्रीय संगठन के वी सतीश और प्रदेश प्रभारी नितिन नबीन भी मौजूद रहे, और चिंतन होता रहा चिंतन क्या हुआ नहीं हुआ कब हुआ क्यों हुआ यह सब सोशल मीडिया पर तो नहीं दिखा सोशल मीडिया पर सिर्फ यह दिखा की जो भी आए थे वह मैनपाट के प्राकृतिक सौंदर्य का लुफ्त उठा रहे थे योगा कर रहे थे तमाम तरह के एक्टिविटीज हो रहे थे,वीडियो शूटिंग कर रील बना रहे थे पर जिस कार्यक्रम में लाखों खर्च हुए उसके मायने क्या थे यह सिर्फ लोगों के लिए चिंतन करने का विषय रह गया।
क्या राष्ट्रीय अध्यक्ष की नसीहत से विधायक लेंगे सीख?
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने तो नसीहत दे दी लेकिन विधायक सांसद ने इससे क्या सीखा या आने वाले समय मे क्या सीख लेंगे यह अब भी सवाल बना हुआ है। क्योंकि ताजा मामला भरतपुर सोनहत विधानसभा से जुड़ा हुआ है जहां शाला प्रवेश उत्सव के कार्यक्रम के आमंत्रण कार्ड में भाजपा के ही स्थानीय व निर्वाचित जन प्रतिनिधियों का नाम आमंत्रण में नही छापा गया, जिसपर स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों के अलावा भाजपा कार्यकर्ताओ ने भी जमकर विरोध जताया है, मण्डल के पदाधिकारियों ने तो सोशल मीडिया पर भी कई पोस्ट लिख कर विरोध जताया। इससे भाजपा संगठन और सत्ता के बीच का विरोधाभास देखा जा रहा है । वहीं कार्यक्रम में भी मण्डल के पदाधिकारी सहित कुछ निर्वाचित जन प्रतिनिधि नही पहुचे, कुछ पहुचे भी तो जल्द वहां से चले गए, आम जनमानस में इस बात की खूब चर्चा रही कि क्या विधायक द्वारा भाजपा के कार्यकर्ताओं को अहमियत नही दी जा रही है, क्या उन्हें हासिये पर रखा जा रहा है।

विधायक प्रतिनिधि मनोज साहू ने क्यों दिया इस्तीफा,इसके मायने क्या है?
सोनहत मे इन दिनो राजनीतिक गर्मी तेज हो गई है। एक तरफ जहां भाजपा संगठन के कार्यकर्ताओ ने हासिये पर पहुचने के बाद स्थानीय विधायक के खिलाफ जंग छेड़ रखी है सत्ता व संगठन के बीच बारिश के मौसम का कोई प्रभाव नही पड़ रहा है। अब देखने वाली बात होगी की यह जंग कहा तक चलती है या इस जंग मे कौन हारता व कौन जीतता है। लेकिन आगे चाहे जो भी हो परंतु सत्ता और संगठन की लड़ाई मे कुल मिलाकर नुकसान तो भाजपा का होना तय है। सोनहत मे हाल ही मे हुए कई सियासी घटनाक्रम के बाद सोनहत की सियासत मे भूचाल तब आ गया था जब भरतपुर सोनहत विधायक रेणुका सिंह के प्रतिनिधि कद्दावर युवा नेता मनोज साहू ने सोशल मीडिया मे पद से इस्तीफा जारी कर दिया। अब विधायक प्रतिनिधि के इस्तीफ़े से लोगो के बीच कई सवाल होने शुरू हो गए तथा लोगो ने तरह-तरह के कयास लगाना शुरू कर दिया। हालांकि विधायक प्रतिनिधि ने शोसल मीडिया मे सिर्फ इस्तीफा दिया है लेकिन अचानक इस्तीफा देने का कोई स्पष्ट कारण नही बताया है।
क्या बाहरी ठेकेदारो से शुरू हुई लड़ाई…इस्तीफे तक आई?
आपको बता दे कि कुछ दिनो पूर्व सोनहत के भाजपाईयो ने बाहरी ठेकेदारो के नाम लिखकर सोशल मीडिया मे विरोध करते हुए नाराजगी जाहिर की थी। बाहरी ठेकेदारो के खिलाफ सबसे पहला सोशल मीडिया पोस्ट कर इस्तीफ़ा देने वाले विधायक प्रतिनिधी मनोज साहू थे. जिसके बाद अन्य कई भाजपाईयो ने मनोज साहू का समर्थन करते हुए अपना विरोध दर्ज किया था। इतना ही नही सोनहत के भाजपाईयो और संगठन पदाधिकारीयो की नाराजगी इतना तेज थी की उन्होने भरतपुर सोनहत विधायक के कार्यक्रम का बहिष्कार करते हुए विधायक से अपनी दुरी बना ली जिससे क्षेत्र मे कई सवाल भी उठने लगे, कुल मिलाकर देखा जाए तो बाहरी ठेकेदारो के सोनहत मे हावी होकर स्थानीय लोगो से किए गए अभद्र व्यवहार और बाहरी लोगो के स्थानीय स्तर पर बढ़ते हस्तक्षेप के कारण नाराज होकर विधायक प्रतिनिधि ने इस्तीफा दिया होगा यह लोगो का मानना है।
क्या राष्ट्रीय अध्यक्ष की नसीहत सही निकलेगी?
मैनपाट शिविर में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पार्टी विधायकों और सांसदों को भ्रष्टाचार से दूर रहने नसीहत दी। उन्होंने कहा कि आप लोग ठेकेदारों और दूसरी अन्य व्यवस्थाओं से दूर रहें। उनके चंगुल में न फंसे,वर्ना दोबारा चुनाव नहीं जीत पाएंगे। वही सोनहत में सत्ता और संगठन की लड़ाई बाहरी ठेकेदारों को लेकर ही है ऐसे में राष्ट्रीय अध्यक्ष की नसीहत का ध्यान विधायको देना होगा और मेहनती कार्यकर्ताओ को पहचानना होगा।


Share

Check Also

अम्बिकापुर@यूजीसी नियमों के खिलाफ स्वर्ण समाज का ऐलान,1 फरवरी को अंबिकापुर बंद

Share अम्बिकापुर,29 जनवरी 2026 (घटती-घटना)। यूजीसी के नए नियमों के विरोध में प्रस्तावित 1 फरवरी …

Leave a Reply