- क्या ट्रिपल इंजन की सरकार होने के बाद भी नगर निगम चिरमिरी में सब कुछ अच्छा नहीं चल रहा है?
- विधायक समर्थित व भाजपा समर्थित लोगों में आक्रोश, कांग्रेस समर्थित लोग ही हो रहे अभी भी उपकृत
- क्या नगर निगम चिरमिरी को भ्रष्टाचार का चारागाह समझ लिया गया है?
- महापौर मूकदर्शक बनकर सब देख रहे हैं पर कुछ कर नहीं सकते…उनके हाथ एहसान तले दबे हैं?
- पूर्व विधायक व पूर्व महापौर के खास लोग एक नहीं 15 शासकीय उचित मूल्य की दुकान का जिम्मा संभाल रहे हैं
- अपने ही सरकार में भाजपा के लोगों का विरोध अब सोशल मीडिया पर झलकने लगा
- जितनी गाडि़यां हैं उनके ड्राइवर का वेतन भुगतान नहीं हो पा रहा…उतनी गाडि़यां चल नहीं पा रही हैं फिर पांच ट्रैक्टर व दो जेसीबी खरीदने की क्या आवश्यकता पड़ी?
- नगर निगम के पार्षद भी जन सरोकारों से दूर घमंड में हैं चूर,वार्डवासियों की समस्याओं के निराकरण की जगह अपना चेहरा चमकाने में हैं व्यस्त?
- नगर निगम चिरमिरी का हाल हुआ बेहाल,न महापौर न पार्षद सभी सत्ता घमंड में मदमस्त?


-रवि सिंह-
एमसीबी/चिरमिरी, 25 जून 2025 (घटती-घटना)। सत्ता का घमंड जब सर चढ़कर बोलने लगता है तब सत्ताधारी दल का कर्मठ कार्यकर्ता जो कंधे पर झंडा उठाकर सत्ता प्राप्ति कराने में सहयोगी होता है और जनता जो मतदान कर अपने भविष्य की बेहतरी के लिए उम्मीद लगाए बैठी रहती है दोनों ही त्रस्त हो जाते हैं दोनों ही भगवान भरोसे वाली स्थिति में पहुंच जाते हैं और फिर वह निराश होकर कुंठित होने लगते हैं और जल्द से जल्द वर्तमान सत्ता के वर्तमान समय और भविष्य काल के समय के व्यतीत होने की कामना करने लगते हैं और पूरी तरह सत्ता परिवर्तन का मन वह बना लेते हैं। ऐसा ही कुछ आजकल एमसीबी जिले के एकमात्र नगर निगम में चल रहा है, वैसे यह हाल एमसीबी जिले के दोनों विधानसभाओं का भी है जहां कार्यकर्ता और जनता अब केवल दिन बचे हुए गिन रही है और वर्तमान सत्ताधारियों को सत्ता से बेदखल करने की मंशा अपने मन मस्तिष्क में स्थिर कर रही है। एमसीबी जिले के चिरमिरी नगर निगम का तो नगरीय निकाय चुनाव पश्चात हाल ही बेहाल है, चिरमिरी नगर निगम क्षेत्र के भाजपा के कर्मठ कार्यकर्ता हों या फिर वहां की मतदाता जनता दोनों की मानसिक स्थिति हाल फि़लहाल में सत्ता विरोधी हो चुकी है और वह वर्तमान सत्ता के बचे समय के जल्द बीत जाने की कामना कर रहे हैं और वह सत्ता परिवर्तन के लिए खुद आगे आयेंगे भविष्य में यह उनके मनोभाव से स्पष्ट समझ में आने लगा है जो सोशल मीडिया के माध्यम से वह जाहिर कर रहे हैं।
महापौर तो मौन है क्योकि एहसान में दबे है?

चिरमिरी नगर निगम की भाजपा सरकार को लेकर वहां के लोगों की लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं सोशल मिडिया में जिसमें कुछ कर्मठ भाजपा कार्यकर्ताओं का भी सोशल मीडिया पोस्ट सामने है जिसमें वह अपना दुखड़ा सामने रखकर यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर उनका काम या उनसे जुड़े लोगों का काम नहीं होने के पीछे की वजह क्या है? उनका कहना है कि केवल उनका भाजपा के लिए समर्पित होना ही उनके लिए घातक हो रहा है उनके लिए असफलता का कारण बन रहा है वहीं जो विपक्षी दल के हैं वह लगातार उपकृत हो रहे हैं और उन्हें गले से गले मिलाकर सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों द्वारा रखा जा रहा है। चिरमिरी नगर निगम को लेकर वहां के निर्वाचित भाजपा नेताओं जिसमें महापौर और विभिन्न वार्डों के पार्षद शामिल हैं का व्यवहार और कार्यप्रणाली भी चर्चा का विषय है और बताया जा रहा है आरोप लग रहा है कि महापौर तो मौन धारण कर बैठे हैं क्योंकि उनके साथ एहसान का मामला है और उनका निर्वाचित होना केवल एक एहसान है वरना वह चुनाव नहीं जीत रहे थे वहीं भाजपा के पार्षदों को लेकर बताया जा रहा है चर्चा हो रही है कि पार्षद अब महापौर से भी बड़े कद के खुद को मान बैठे हैं और वह अपने वार्ड वासियों से सीधे मुंह बात नहीं करते और न ही उन्हें वार्ड की समस्याओं से कोई लेना देना है, विभिन्न शासकीय गैर शासकीय आयोजनों में जाकर फोटो सेशन मात्र चिरमिरी के नगर निगम निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का एकमात्र काम रह गया है वहीं वार्ड वासी नगर निगम वासी परेशान रहे इससे किसी को कोई लेना देना नहीं है।
ट्रिपल इंजन सरकार मिलने के बाद भी चिरिमिरी की जनता परेशान?
चिरमिरी नगर निगम की बात की जाए तो ट्रिपल इंजन सरकार के वादे के साथ भाजपा को लोगों ने समर्थन दिया और पूर्ण बहुमत वाली सरकार वहां बन पाई, भाजपा के झंडाबरदार कर्मठ कार्यकर्ताओं ने भी दिन रात एक किया और खून पसीना जलाया तब जाकर भाजपा की सरकार बन पाई महापौर और कई पार्षद चुनाव जीतकर पार्टी के निगम के दहलीज तक पहुंच सके लेकिन अब वही कर्मठ झंडाबरदार कार्यकर्ता यह आरोप लगा रहा है कि उसका और उससे जुड़े लोगों का पूरे निगम क्षेत्र के भाजपा के झंडाबरदार कर्मठ कार्यकर्ताओं और उनसे जुड़े लोगों का कोई काम कोई सुनवाई इसलिए नहीं हो पा रही है क्योंकि वह भाजपाई हैं। आरोप लगाने वाले दुख और पीड़ा जाहिर करने वाले अब यह भी कहते सुने जा रहे हैं कि कांग्रेस शासनकाल वाले लोग भाजपा में भी उसी स्थिती में हैं मजे में हैं और सत्तासुख भोग रहे हैं जबकि भाजपा वाला कर्मठ कार्यकर्ता आवेदन निवेदन करता थक जा रहा है कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
कांग्रेसी को केवल उपकृत किया जा रहा है?
एक कर्मठ कार्यकर्ता के सोशल मिडिया पोस्ट को समझें तो समझ में आएगा कि कैसे एक पूर्व कांग्रेसी भाजपाई बन बैठा और पूरे निगम क्षेत्र के शासकीय उचित मूल्य दुकान का इकलौता संचालक कांग्रेस शासनकाल से ही चला आता रहा और अभी भी है जबकि शासकीय उचित मूल्य की दुकान का संचालन कार्य जिम्मा बांटा जा सकता था और जिससे कई लोगों को रोजगार का अवसर मिल सकता है, वहीं ऐसा न करते हुए एक पूर्व कांग्रेसी को केवल इसलिए लगातार उपकृत किया जा रहा है भाजपा में शामिल कराकर क्योंकि वह दुकान संचालन करता रहे और अकेला वह धनाढ्य बनता रहे। संदीप चटर्जी नाम के उक्त दुकान संचालक को लेकर लिखा यह भी गया है कि लोगों को कई कई दिन केवल इसलिए राशन नहीं मिल पाता और दुकान से लौटना पड़ जाता है क्योंकि वह कई जगह का इकलौता संचालक है जिसे समय नहीं मिल पाता और राशन वितरण में विलंब होता है लोग दुकान आकर लौटने मजबूर होते हैं।
सत्ता की कुर्सी महापौर पार्षदों बैठने के लिए नहीं समस्याओं को देखने और दूरदृष्टा होने के लिए खड़े होकर दूर तक नजर दौड़ाने के लिए मिली थी पर आंख मूंदकर सुख भोग रहे है…
चिरमिरी की कहानी और सत्ता की कुर्सी पर बैठे महापौर पार्षदों की दास्तान सुनकर अब ऐसा लगने लगा है कि जो कुर्सी बैठने के लिए नहीं समस्याओं को देखने और दूरदृष्टा होने के लिए खड़े होकर दूर तक नजर दौड़ाने के लिए मिली थी उस कुर्सी पर निर्वाचित महापौर पार्षद चिपककर बैठ गए हैं और दूरदृष्टा होने की बजाए वह आंख मूंदकर सत्ता सुख भोगने में लगे हैं और वह केवल उद्घाटन, शिलान्यास,जयंती और अन्य उत्साह आयोजन तक ही अपनी जिम्मेदारी मान लिए हैं। जनता और वार्ड वासियों से किसी को कोई लेना देना नहीं उनसे सीधे मुंह बात करने की भी फुर्सत अब उनके पास नहीं यह आरोप भी लग रहे हैं देखने को भी मिल रहा है। वैसे क्या चिरमिरी नगर निगम में सबकुछ अच्छा नहीं चल रहा है यह भी एक सवाल खड़ा है जिसका जवाब तो हां में है लेकिन अब क्या महापौर पार्षद भाजपा के इसे स्वीकार करते हैं यह देखने वाली बात होगी।
ट्रिपल इंजन की सरकार होने के बावजूद क्या नगर निगम चिरमिरी में सबकुछ अच्छा नहीं चल रहा है?
नगर निगम चिरमिरी में भाजपा की सरकार है,प्रदेश में भी भाजपा की सरकार है वहीं केंद्र में भी भाजपा की सरकार है,इस तरह ट्रिपल इंजन सरकार का मामला है चिरमिरी नगर निगम में,अब उसके बावजूद निगम से और चिरमिरी से भाजपा के लिए सुखद संदेश नहीं सामने आ रहा है,नगर के लोग नाराज हैं वहीं भाजपा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी नाराज हैं,अब ऐसा क्यों है यह तो कहना मुश्किल है लेकिन सवाल यह है कि क्या नगर निगम चिरमिरी में ट्रिपल इंजन की सरकार होने के बावजूद सबकुछ अच्छा नहीं चल रहा है।
महापौर मौन हैं पार्षद फोटोग्राफी में व्यस्त हैं,जनता नगर की त्रस्त है,आखिर ऐसा क्यों है?
नगर निगम चिरमिरी में महापौर बिल्कुल निष्कि्रय नजर आ रहे हैं कुल मिलाकर मौन हैं और इसके पीछे की वजह जो बताई जा रही है वह चुनाव जीतने में सहयोग का है और यह प्रत्याशी चयन से लेकर जीत दर्ज होने तक का एहसान है जो उन्हें मौन बनाता है,वहीं भाजपा पार्षदों को लेकर बताया जा रहा है आरोप लग रहा है कि वह अब केवल अपनी छवि बनाने में लगे हैं तस्वीर खिंचाने में लगे हैं वार्डवासियों से उनकी समस्याओं से उन्हें कोई सरोकार नहीं है उनके निराकरण का उनके पास समय नहीं है,वार्ड की जनता समस्याओं के साथ पार्षदों के पास जाने से भी भयभीत है क्योंकि उन्हें अपमानित होने की भी स्थितियों से गुजरना पड़ रहा है जैसी सूचनाएं हैं। महापौर बड़े ओहदे पर हैं उनसे लोग मिलने से हिचकिचाते भी हैं वहीं पार्षदों का अहम महापौर से भी ज्यादा होने के कारण अब उनसे भी वार्डवासी मिलने कतराने लगे हैं और अपनी स्थिति में रहने ही वह तैयार हैं। ऐसा क्यों है क्या भाजपा का अनुशासन महापौर पार्षदों पर लागू नहीं है यह बड़ा सवाल है।
एक पूर्व कांग्रेसी जो बन बैठा भाजपाई को लेकर ज्यादा विरोध,राशन दुकान संचालक भी है वह
चिरमिरी की कई उचित मूल्य राशन दुकान एक ही व्यक्ति के नियंत्रण में है,वह व्यक्ति कांग्रेस शासनकाल में कांग्रेसी था और तब भी वह नगर निगम की अधिकांश उचित मूल्य राशन दुकान का संचालन करता था वहीं अब भाजपा शासनकाल में भी वही पूरे राशन दुकान का संचालन कर रहा है और वह भाजपा का सदस्य बन गया है, संदीप चटर्जी नाम के उक्त व्यक्ति को लेकर भी भाजपाई नाराज हैं, बताया जा रहा है कि वह अकेले कई राशन दुकान का अकेला संचालक है जबकि यदि कईयों को दुकान आबंटित की जाए तो कईयों को रोजगार मिल सकता है। उक्त व्यक्ति को लेकर भी भाजपा कार्यकताओं में आक्रोश है और उनका कहना है कि विपक्ष में रहते हुए डंडा खाने और झंडा लगाने के समय वह आगे होते हैं मेहनत करते हैं और जब सत्ता मिलती है बड़े नेता अपने चहेतों को लाभ दिलाने उन्हें दूसरे दल से अपने दल में प्रवेश दिलाते हैं और उन्हें भाजपाइयों से आगे के क्रम में खड़ा कर देते हैं।
चिरमिरी में भाजपा कार्यकर्ताओं की नाराजगी मनेंद्रगढ़ विधायक के लिए नुकसानदायक साबित होगा
चिरमिरी भाजपा का गढ़ रहा है,इसबार के चुनाव में साथ ही नगर निगम चुनाव में भाजपा को स्पष्ट बहुमत भी मिला, अब वहीं के भाजपाई नाराज हैं, कार्यकर्ता उदास हैं, कार्यकर्ता इसलिए नाराज हैं क्योंकि चिरमिरी में भाजपाइयों की बजाए कांग्रेसी उपकृत किए जा रहे हैं वहीं जातिवादी स्थितियां भी सामने हैं जो अन्य को वर्तमान विधायक से दूर कर रही हैं, एक बात यह तय है कि चिरमिरी की नाराजगी का असर विधानसभा चुनाव में स्पष्ट नजर आएगा और वर्तमान विधायक की दिक्कतें बढ़ेंगी, आज चिरमिरी की स्थिति यह है कि चिरमिरी में भाजपाई सीधे विरोध करते नजर आ रहे हैं नगर निगम का और साथ ही विधायक का भी, विधायक जो मंत्री भी हैं उनका विरोध करते उनके खास आज सोशल मीडिया में सामने हैं। भाजपा के लिए ऐसी स्थिति चिरमिरी में कभी नहीं बनी थी जब सत्ता में रहते हुए उसका या उसके नेताओं का विरोध हो,भाजपा संघ के माध्यम से भी चिरमिरी में मजबूत हुआ करती थी जो भी अब भाजपा से खफा है ऐसा बताया जा रहा है और सबका कारण है एकला चलो नीति, भाजपाइयों का साफ कहना है सत्ता में भी जब विपक्ष हावी हो ऐसी स्थिति में विपक्ष में बैठना बेहतर इसलिए वह अब आगे चुनावों में भाजपा के लिए काम करने से पहले सोचेंगे, वैसे अब स्थिति में सुधार की गुंजाइश भी कम है क्योंकि सत्ता के दो साल बीतने को हैं और भाजपाई अब निराश हैं जिन्हें अब मरहम भी राहत कोई देगी लगता नहीं। वर्तमान विधायक अपने कार्यकाल में मंत्री रहते हुए न ही महापौर को सक्रिय कर पा रहे हैं और न पार्षदों पर उनका कोई नियंत्रण है, सबकुछ राम भरोसे है वहीं हाल उनके कार्यकाल के विषय में भी अच्छा नहीं है, आलोचना अब प्रसिद्धि का कारण नहीं नुकसान का कारण बनने वाली हैं।
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