कोरिया स्वास्थ्य विभाग की ऐसी कौन सी मजबूरी है कि अस्पताल से 8 किमी दूर किराया पर लेना पड़ा गोदाम?
एक बार फिर बढ़ाया गया गोदाम का अनुबंध इसके पीछे की क्या है वजह?
क्या पूर्व डीपीएम के खास को गोदाम के देकर किया जा रहा उपकृत?


-रवि सिंह-
कोरिया,17 जून 2025 (घटती-घटना)। अविभाजित कोरिया जिले के सबसे बड़े व महंगे पत्रकार जिओ के रिचार्ज की तरह करते हैं पत्रकारिता, जब तक आप दे रहे हैं तब तक आपकी तारीफ छप रही है देना बंद यानी की तारीफ भी छपना बंद, ऐसी पत्रकारिता जिले में एक बड़े मंहगे पत्रकार बहुत अच्छे तरीके से करते हैं,जिनके ऊपर एफआईआर दर्ज होने के बाद फजीहत वाली स्थिति निर्मित हो गई है। उनकी पत्रकारिता में सिर्फ तारीफ दिखती है तारीफ भी जबरदस्ती की तारीफ लोग मानते हैं। सत्ता जिनकी होती है यह पत्रकार भी उसके होते हैं, उस नेता की तारीफ छपती रहती है, जब तक उनकी तरफ से उनका पुरस्कार स्वरूप धन आता रहता है, चाहे वह नेता भाजपा का हो कांग्रेस का हो मंत्री हो विधायक हो तभी तक इनके हैं जब तक वह इन्हें पुरस्कार स्वरूप धन दे रहे हैं, जैसे ही धन देना बंद होता है उनकी तारीफ छापना भी बंद कर देते हैं। यही वजह है कि इन्हें जन सरोकार वाली पत्रकारिता करना नहीं आता है कमियां इन्हें नहीं दिखती हैं,और कमियां तब तक नहीं दिखती हैं जब तक वह वहां से लाभ अर्जित कर रहे हैं,जैसे ही लाभ अर्जित होना बंद होता है फिर वही कमियां उन्हें दिखने लगती हैं, कुछ ऐसा ही हाल इस समय सत्तापक्ष के नेताओं के साथ है उनका और कुछ ऐसा ही हाल स्वास्थ्य विभाग के साथ है, स्वास्थ्य विभाग की कमियां इन्हें इसलिए नहीं दिखती हैं,क्योंकि स्वास्थ्य विभाग इन्हें हर महीने फिजूल का 18000 रुपए गोदाम का किराया दे रहा है, जिस दिन यह पैसा मिलना बंद हो जाएगा उस दिन स्वास्थ्य विभाग की कमियां इन्हें दिखना शुरू हो जाएगी, जब तक वह पैसा आ रहा है तब तक इनके आंख पर पट्टी बंधी हुई है तब तक इन्हें स्वास्थ्य विभाग में जो चल रहा है सब चलने दीजिए सब सही है बस कोई अधिकारी आकर उनका यह 18000 रुपए जिस दिन बंद कर दिया,उस दिन स्वास्थ्य विभाग की ऐसी ऐसी कमियां निकलेगी और ऐसी ऐसी कमियां उनके अखबार में छपेंगी जो आज तक किसी को नहीं दिखा होगा।
ज्ञात हो की जिस डॉक्टर ने अपराध दर्ज कराया है उस डॉक्टर ने पत्रकार के ऊपर इतने एहसान किए हैं कि वह शायद इस एहसान के बदले उनसे दुश्मनी मोल ले बैठे हैं और वह चाह रहे हैं कि वह डॉक्टर हट जाए और उनकी भतीजी को उसके जगह नौकरी मिल जाए। डॉक्टर के क्लीनिक में उनकी भतीजी ने प्रेक्टिस किया,घर के लोगों ने उनसे फ्री में इलाज करवाया और डॉक्टर से सिर्फ एक गुस्ताखी यह हो गई कि उन्होंने यह कह दिया कि अखबार मेरे यहां कोई पढ़ने वाला नहीं है मेरे क्लीनिक में मत डालो और यह बोलना ही उस डॉक्टर के लिए समस्या खड़ी कर गया और पूरे प्रशासन को महंगे पत्रकार ने उस डॉक्टर के विरुद्ध कर दिया, वह भी सिर्फ एक अखबार न लेने की वजह से, मध्यस्थ के प्रयास भी इस बीच होता रहा पर बड़े पत्रकार इसे तूल देते रहे अब जब मामला अपराध दर्ज की स्थिति तक पहुंच गया तब अब पत्रकार खुद चाह रहे हैं कि इसमें बीचबचाव का रास्ता निकल जाए। वैसे पत्रकार जिन्हें बड़ा पत्रकार कहा माना जाता है उनका अखबार व्यवस्था की कमियों को उजागर तभी करता है जब मामला उनके अनुसार न चल रहा हो, उनकी बात यदि मानी जाए तो वह कोई खबर प्रकाशित नहीं करते।

सीएमएचओ कार्यालय के पास नया गोदाम
सीएमएचओ कार्यालय के पास सीजीएमएससी का अपना गोदाम है,वहीं बंद पड़े नर्सिग कॉलेज की कई विशाल भवनों को गोदाम बना कर उपयोग किया जा रहा है, उसमें से एक भवन को नया गोदाम बनाया गया है,काफी जगह होने के बाद भी 8 किमी दूर गोदाम किराए पर लेकर किसी को उपकृत करने के पीछे बड़ा खेल बताया जा रहा है। जबकि वहां रखे कुछ सामान को लाकर यहां रखा जा सकता है,बावजूद इसके वर्तमान सीएमएचओ ने उक्त गोदाम को 2024 तक रखने का अनुबंध बढ़ा दिया है। ताकि बंदरबांट से उसका फायदा उन्हें भी मिलता रहे।
खास से हर कोई रहता है भयभीत
पूर्व डीपीएम का जो खास व्यक्ति है,उससे राजनैतिक दलों के नेताओं में काफी भय व्याप्त है। कांग्रेस हो या भाजपा हर दल का नेता उसके आगे नतमस्तक है। स्वास्थ्य विभाग में गोदाम की राशि को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे है,आखिर इतनी राशि बेवजह क्यों खर्च की जा रही है,स्वास्थ्य विभाग की ऐसी कौन सी पोल उक्त व्यक्ति के पास है,जो सरकारी राशि से प्रतिमाह उसे उपकृत किया जा रहा है,आखिर ऐसी कौन सी मजबूरी है।
पूर्व डीपीएम की भ्रष्टाचार की परंपरा आगे बढ़ा रहे वर्तमान सीएमएचओ
पूर्व डीपीएम के कार्यकाल में उक्त गोदाम किराए पर लिया गया था और जो उनके जाने के बाद भी किराए पर बना हुआ है अनुबंध अवधि बढ़ा दी है है।देखा जाए तो पूर्व डीपीएम की भ्रष्टाचार की परंपरा को कोरिया जिले का स्वास्थ्य विभाग आगे बढ़ा रहा है और जो जारी है उनके जाने के बाद भी।
आदिवासी अत्याचार के कुछ मामलों में आजाक थाने की सुस्त कार्यवाही समझ से परे है…
जिले के हिसाब से साहब बड़े पत्रकार हैं और बड़े नेताओं के आगमन पर वह नजर भी आता है लेकिन जब बात जनसरोकार की सामने होती है बड़े पत्रकार मौन रहते हैं क्योंकि लाभ ही इनका मुख्य उद्देश्य होता है। वैसे आदिवासी समुदाय के डॉक्टर की रिपोर्ट पर कोरिया पुलिस आजाक पुलिस की सुस्त गति यह बतलाती है कि वह भी अत्याचार के इस मामले में गंभीर नहीं है वहीं यदि बड़े पत्रकार की जगह कोई और होता वह उसे पाताल तक ढूंढने जाती, कुछ लोगों का यह भी कहना है कि आदिवासी अत्याचार के कुछ मामलों में आजाक थाने की सुस्त कार्यवाही समझ से परे है जिसमें अपराध दर्ज करने वाला भी परेशान है क्योंकि उसे भी यह समझ में नहीं आ रहा है वह क्या करे।
सीएमएचओ कार्यालय से 8 से 9 किमी दूर उसके गोदाम का किराया देकर बड़े पत्रकार को उपकृत किया गया है?
जिला कोरिया स्वास्थ्य विभाग में मनमानियों का दौरा खत्म होने का नाम नहीं ले रहा, कारनामों की तो एक लंबी फेहरिस्त बनी हुई है यहां पर मुख्य चिकित्सा एवम स्वास्थ्य अधिकारी किसी को कुछ समझ ही नहीं रहे हैं, जैसा जी आ रहा है वैसा मनमानी जारी रखा है उन्होंने,तत्कालीन सीएमएचओ द्वारा जिला अस्पताल से 8 किलोमीटर दूर न जाने किस व्यवस्था के तहत गोदाम किराए पर लिया गया था और उस गोदाम की जरूरत जिला अस्पताल को क्यों थी? बताया यह भी जा रहा है कि उस गोदाम के आड़ में लाखों रुपए स्वास्थ्य विभाग के खर्च हो रहे हैं पर उसका उपयोग दिख नहीं रहा है,सवाल यह भी है कि आखिर क्या जिला चिकित्सालय के आसपास गोदाम की व्यवस्था नहीं खोज पाया स्वास्थ्य विभाग या फिर अपने किसी चहेते को लाभ देने के लिए 8 किलोमीटर दूर गोदाम बनाया गया? सूत्रों का कहना है कोरिया जिले का स्वास्थ्य विभाग अभी भी पूर्व डीपीएम के निर्देशों पर ही काम कर रहा है,भाजपा सरकार के सिरदर्द बने पूर्व डीपीएम के एक खास को जिला अस्पताल और सीएमएचओ कार्यालय से 8 से 9 किमी दूर उसके गोदाम का किराया देकर उपकृत किया गया है जिससे सरकारी राशि बिना वजह खर्च हो रही है,शासन को भारी भरकम राशि से आर्थिक नुकसान हो रहा है। कोरोना काल में शहर को छोड़ लगभग 8 किमी दूर पूर्व डीपीएम के खास पत्रकार के एक कॉम्पलेक्स को किराए पर लिया गया, हैरानी की बात तो यह है कि यदि उसमें रखे सामान को लाया जाता होगा और परिवहन खर्च अलग से लगता होगा। तत्कालिन सीएमएचओ का स्थानांतरण हो गया, उसके बाद बीते दो वर्ष होने को है उस समय के वर्तमान सीएमएचओ ने उक्त किराए के गोदाम को 2024 तक और बढा दिया,अभी की स्थति में भी उसी गोदाम का उपयोग हो रहा है, अभी जो सीएमएचओ वह भी पूर्व के बताए रास्ते पर आगे बढ़ रहे है, बताया जाता है किराए पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा भारी भरकम राशि दी जा रही है, इस तरह से गोदाम के किराए की राशि के नाम पर भी बड़ा बंदरबांट हो रहा है।
भ्रष्टाचार मुक्त भारत का प्रधानमंत्री का सपना कैसे होगा पूरा जब स्वास्थ्य विभाग जैसे विभाग में भाजपा शासित प्रदेश में जारी है भ्रष्टाचार
देश के प्रधानमंत्री ने अपने दूसरे कार्यकाल के बीच में ही घोषणा कर दी थी की देश को भ्रष्टाचार मुक्त करना उनकी प्राथमिकता होगी और वह लगातार इस दिशा में काम करते भी नजर आ रहे हैं वहीं भ्रष्टाचार के मामले में लगातार कार्यवाही भी देखने को मिल रही है वहीं अपने तीसरे कार्यकाल को लेकर भी उनका कहना है की भ्रष्टाचार के मामले बर्दास्त नहीं किए जायेंगे। अब जब प्रधानमंत्री जो की भाजपा से हैं का यह बयान है यह संकल्प है वहीं छत्तीसगढ़ प्रदेश में भाजपा की ही सरकार है और प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में खासकर कोरिया जिले के स्वास्थ्य विभाग में विगत पांच सालों से बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हो रहा है और फिलहाल भाजपा की सरकार में भी वह जारी है जो रुकने का नाम नहीं ले रहा है और ऐसे में प्रधानमंत्री का संकल्प कैसे पूरा होगा जब उन्हीं की दल की सरकार में ऐसा हो रहा है प्रदेशों में। देखा जाए तो कोरिया जिले का स्वास्थ्य विभाग भाजपा शासन और प्रधानमंत्री के भ्रष्टाचार मुक्त भारत अभियान को पलीता लगा रहा है चिढ़ा रहा है क्योंकि यहां गोदाम के नाम पर भी भ्रष्टाचार हो रहा है और स्वास्थ्य व्यवस्था वेंटीलेटर पर है।
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