- क्या अब पत्रकार धमकाकर लोगों को अखबार पढ़ने करेंगे मजबूर?
- अपराध दर्ज होने के बाद भी गिरफ्तारी में पुलिस की रुचि नहीं?
- कोरिया जिले के काफी बड़े व प्रतिष्ठित पत्रकारों में आती है गिनती और उनकी कृत्य का हो रहा है विरोध पत्रकार पर दर्ज हुआ अपराध
- समझौता कराने के लिए घंटे भर बैठ रहे हैं सीएमएचओ के पास और दबाव बना रहे हैं डॉक्टर पर
- मामला आदिवासी अत्याचार से जुड़ा हुआ,डॉक्टर ने अजाक थाने में दर्ज कराई है प्राथमिकी
- एक पत्रकार के खबर प्रकाशन मात्र को आधार बनाकर कोरिया पुलिस ने उस पत्रकार को आतंकवादी समझकर पकड़ने की पूरी प्रकाष्ठा पार की थी पर वहीं वर्तमान मामले में एक पत्रकार पर
-रवि सिंह-
कोरिया,10 जून 2025 (घटती-घटना)। खबर प्रकाशन के बाद अक्सर पत्रकारों पर आरोप लगते हैं क्योंकि खबर से क्षुब्ध होकर झूठा आरोप लगाया जाता है,ऐसे मामले अक्सर देखने को मिलते हैं पर इस बार कोरिया जिले में जो मामला सामने आया है वह बहुत ही अजीबो-गरीब है,कोरिया जिले के एक प्रतिष्ठित अखबार के सबसे बड़े पत्रकार कहे या सबसे महंगे पत्रकार तो शायद गलत नहीं होगा, इनके ऊपर आरोप जो लगा है वह काफी रोमांचक है, रोमांचक इसलिए है क्योंकि इन्होंने एक डॉक्टर पर जबरदस्ती अपने अखबार का पाठक बनने का दबाव डाला जा रहा था और उनके अखबार के पाठक बनने से जब एक डॉक्टर ने इनकार कर दिया तो उसके साथ उक्त पत्रकार ने जातिगत गाली गलौज के साथ धमकी भी दी, इसके बाद पत्रकार पर अपराध दर्ज हो गया पर उसकी गिरफ्तारी नही होगी, क्योंकि दोनों पार्टियों के नेताओं से पत्रकार के मधुर संबंध है और मधुर संबंध की वजह से पुलिस पर दबाव है कि उस पत्रकार की गिरफ्तारी नहीं होनी चाहिए, जबकि उसके कृत्यों पर ध्यान दिया जाए तो काफी निम्न स्तर का कृत्य है। यह एक इकलौते ऐसे पत्रकार है जो अपने आप को सुपर पत्रकार से कम नहीं समझते हैं, इन्हें लगता है कि इनके ऊपर कभी भी कोई उंगली नहीं उठेगी,दादागिरी के साथ विज्ञापन की भी वसूली होती है और जबरदस्ती विज्ञापन लगाया भी जाता है और जबरदस्ती डरा धमका कर विज्ञापन का पैसा वसूला भी जाता है, ऐसा कई नेताओं का आरोप है जिन्होंने नाम ना बताने की शर्त पर यह बात बताई है, खैर यह तो अलग बात है पर इस बार जिस डॉक्टर ने उन पर आरोप लगाया है उस आरोप पर अपराध दर्ज हो चुका है कई गंभीर धाराएं उसमें दर्ज हैं अब पत्रकार उस मामले का पटाक्षेप करने के लिए लगातार उस डॉक्टर की खबर प्रकाशित कर रहे हैं शिकायत कर रहे हैं सीएमएचओ के साथ घंटे बैठकर दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं सवाल यह उठता है कि जब उस डॉक्टर में इतनी ही कमियां थी तो उन्होंने फिर पहले इन कमियो का प्रकाशन क्यों नहीं किया? अब जब उनके ऊपर अपराध दर्ज हो गया है सारे सबूत उनके खिलाफ हैं तब वह अब छटपटाहट में नेताओं के पास जाकर उनकी गिरफ्तारी न हो इसके लिए गिड़गिड़ा रहे हैं जिसके ऊपर गंभीर अपराध है वह पूरे शहर में घूम रहा है नेताओं के साथ फोटो खिंचवा रहा है यहां तक की कलेक्टर के साथ भी फोटो खिंचवा रहा है, अब क्या ऐसे में प्रशासन की किरकिरी नहीं हो रही है? पर वही पिछली सरकार में एक पत्रकार के खबर को आधार बनाकर पुलिस तिलमिला गई थी उसे पकड़ने के लिए पूरा आपा खो बैठी थी ऐसा लग रहा था की पुलिस की कमियां प्रकाशित करके पत्रकार ने बहुत बड़ा गुनाह कर लिया है या फिर किसी आतंकवादी के साथ उसका संबंध है पुलिस ने पत्रकार को अपना जवाब देने का भी समय नहीं दिया था, गिरफ्तारी के लिए पूरी प्रकाष्ठा पार कर दी थी पर आज उन्हीं गंभीर धाराओं पर एक पत्रकार की गिरफ्तारी न होना कहीं ना कहीं यह साबित करता है कि किसी भी पत्रकार को निष्पक्ष नहीं होना चाहिए बेईमान होकर ही सभी पार्टी के नेताओं का उपयोग करना चाहिए और प्रशासनिक लॉबी को हमेशा अपने तरफ रखना चाहिए उसके बाद कुछ भी काम करो कोई नहीं कुछ करेगा?
आपको बता दें कि एक बहुत बड़े पत्रकार पर डॉक्टर को जातिसूचक गाली देने, धमकाने और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगा है, मामला दर्ज भी हुआ है अजाक थाने में, अखबार नही लेने पर डॉक्टर के साथ बदसलूकी हुई है,नगर के प्रतिष्ठित दंत चिकित्सक डॉ. रूद्र प्रताप सिंह ने एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र से जुड़े पत्रकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कोरिया पुलिस की अजाक शाखा में शिकायत दर्ज कराई है। डॉ. सिंह का आरोप है कि उन्हें बार-बार धमकाया गया, जातिसूचक शदों का प्रयोग कर गाली दी गई और मानसिक रूप से प्रताडि़त किया गया। डॉ. सिंह ने अपनी लिखित शिकायत में उल्लेख किया है कि उनके मना करने के बावजूद अखबार उनके घर पर डाला जा रहा था। जब उन्होंने अखबार के हॉकर से इस पर आपत्ति जताई तो कुछ समय बाद पत्रकार के कॉल आने लगे। डॉ. सिंह का आरोप है कि पत्रकार ने उन्हें फोन पर धमकी देते हुए कहा, तेरा जीना हराम कर दूंगा तेरी नौकरी खा जाऊंगा और जातिसूचक गालियाँ भी दीं। डॉ. सिंह ने बताया कि यह घटना 11 अप्रैल 2025 की है, जब शाम 4 से 5 बजे के बीच नगर पालिका कॉम्प्लेक्स के पास पत्रकार ने उन्हें रोका और खुलेआम धमकाया। इससे पूर्व भी कई बार उन्होंने इलाज के दौरान सेवा शुल्क नहीं चुकाया और बदले में डॉक्टर को धमकी दी जाती रही। डॉ. सिंह के अनुसार, वह पिछले 3-4 महीनों से मानसिक रूप से प्रताडि़त हैं और उनका परिवार भी तनाव में है। इस मामले में डॉ. सिंह द्वारा की गई शिकायत को गंभीरता से लेते हुए डीएसपी अजाक बैकुंठपुर ने संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। डॉ. सिंह ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि उचित कार्रवाई नहीं हुई, तो वह आत्महत्या जैसे कदम उठाने को विवश हो सकते हैं, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी आरोपी पत्रकार की होगी। पुलिस ने फिलहाल मामला दर्ज कर लिया है और जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस ने फिलहाल बीएनएस 2023 की धारा 296,126, 351, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (नृशंसता निवारण) अधिनियम, 1989 (संशोधन 2015) 3(1) (द), अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (नृशंसता निवारण) अधिनियम, 1989 (संशोधन 2015), (1)(ध) तहत मामला दर्ज कर लिया है और जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
बिकाऊ पत्रकारिता करने वाले पूरे सिस्टम को कर रहे खराब सिर्फ झोठी तारीफ छापकर पैसा कमाना मकसद कमियां दिखाना इनका नहीं रहा क्या कर्तव्य?
इस पूरे मामले के बाद अब फिर से सवाल यह उठने लगा है कि क्या बिकाऊ पत्रकारिता करने वाले पूरे सिस्टम को खराब कर रहे हैं, सिर्फ झूठी तारीफ छाप कर पैसा कमाना इनका मकसद है कमियां दिखाना इनका नहीं रह गया कर्तव्य? ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि अभी जो शिकायत हुई है और जिस पत्रकार की बात हो रही है उसकी अभी तक के लंबे कार्यकाल को देखकर यही पूरे शहर में चर्चा है कि बिकाऊ पत्रकारिता इनकी रही है और सत्ता जिधर आती है उधर यह हो जाते हैं। पत्रकारिता कम राजनीतिक नेताओं के डिफेंसकर्ता ज्यादा है।
केवल समाचार प्रकाशन पर एक पत्रकार को आदिवासी अत्याचार की धाराओं के तहत किया था कोरिया पुलिस ने परेशान…अब जब एक दूसरे पत्रकार पर सीधे हैं आरोप पुलिस है मौन?
कोरिया जिले में ही एक पत्रकार को कोरिया पुलिस ने केवल समाचार प्रकाशन के आधार पर आदिवासी अत्याचार अधिनियम की धाराओं के तहत दोषी बनाने का प्रयास किया था वहीं उसके खिलाफ गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज करते हुए प्रार्थी भी पुलिस के ही एक कर्मचारी को बनाया गया था, तब कोरिया पुलिस डेरा बिस्तर लेकर निर्दोष पत्रकार को ढूंढती थी उसे महीनों मानसिक प्रताडि़त होने मजबुर किया, अब जब एक दूसरे पत्रकार पर आरोप है आदिवासी अत्याचार का सीधा आरोप है जातिसूचक गालियों का आरोप है लेकिन कोरिया पुलिस मौन है शांत है क्योंकि मामला बड़े पत्रकार का है जो सभी दलों के नेताओं से करीब है,वैसे क्या कोरिया पुलिस आदिवासी अत्याचार अधिनियम की धाराओं के तहत दर्ज गंभीर मामले में जो एक डॉक्टर के अनुसार दर्ज की गई है उसके ऊपर हुए अत्याचार के विरुद्ध जो एक पत्रकार के द्वारा की गई है क्या इसमें कोरिया पुलिस कोई कार्यवाही नहीं करेगी मौन रहेगी, क्या पत्रकार को बचाने का निर्देश प्राप्त है कोरिया पुलिस को,सवाल उठेंगे क्योंकि डॉक्टर ने आरोप लगाते हुए खुद को बेहद प्रताडि़त बताया है।
डॉक्टर ने कार्यवाही नहीं होने की दशा में पत्रकार के विरुद्ध आत्महत्या करने की भी बात भी कही है…
कोरिया जिले के एक आदिवासी समुदाय के डॉक्टर ने एक पत्रकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं,आरोप है कि केवल समाचार पत्र नहीं लेने की वजह से पत्रकार उन्हें प्रताडि़त कर रहा है और जबरन निशुल्क चिकित्सा लाभ भी उनसे लेता है वहीं उन्हें बीच बाजार रोककर जातिसूचक गालियां भी देता है,डॉक्टर ने अजाक थाने में प्राथमिकी दर्ज कराकर कार्यवाही की मांग की है और कार्यवाही नहीं होने की दशा में आत्महत्या की भी बात कही है।
क्या कोरिया पुलिस दिखाएगी तत्परता,क्या प्रतिष्ठित पत्रकार की होगी गिरफ्तारी?
अब देखना यह है कि कोरिया जिले के जिस प्रतिष्ठित पत्रकार पर अजाक थाने में अपराध दर्ज हुआ है क्या कोरिया पुलिस उसे गिरफ्तार करती है,क्या वह उसे दंड देने आगे आती है,कोरिया पुलिस की तत्परता लोग देखना चाहते हैं क्योंकि कई बार निर्दोष पत्रकारों पर कार्यवाही के लिए तत्पर रहने वाली कोरिया पुलिस एक दर्ज प्राथमिकी के संबंध में कोई कार्यवाही नहीं कर रही है आरोपी खुलेआम घूम रहा है जो कोरिया पुलिस को सवालों के घेरे में खड़ी करती है।
डॉक्टर की कार्यप्रणाली यदि सही नहीं थी तो क्या पत्रकार ने शिकायत से पहले खबर प्रकाशित की?
यदि डॉक्टर के कार्यप्रणाली इतनी ही खराब थी तो फिर पत्रकार को उनकी कार्यपाली की खबर प्रकाशित करनी थी, आज जब एफआईआर व शिकायत हो रही है उसके बाद पत्रकार को उस डॉक्टर की कमी समझ में आ रही है, क्या पत्रकार ने यहां पर ईमानदारी के साथ अपना काम नहीं किया और डॉक्टर पर दबाव बनाना ही उन्हें महंगा पड़ा?
क्या आदिवासियों को नौकरी करना भी हो जाएगा दूभर?
क्या अब आदिवासियों को नौकरी करना हो जाएगा दूभर जिस तरह से एक एफआईआर दर्ज होने के बाद उसका दबाव बनाया जा रहा है नौकरी छोड़ने जिसे लेकर डॉक्टर काफी विचलित है और नौकरी छोड़ने की बात कहने लगे।
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur