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कोरिया,@जलजीवन मिशन का हवा में…वादे…कागजों में पानी…अफसरों की झूठी कहानी?

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-राजन पाण्डेय-
कोरिया,09 जून 2025 (घटती-घटना)। जल ही जीवन है, जल है तो कल है…ये स्लोगन काफी चर्चित है और जब भी जल की बात आती है, ये लाइन की चर्चा जरूर होती है, केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन भी लगातार सुर्खियों में है, वजह, योजना की बदहाली और योजना में भ्रष्टाचार और योजना के क्रियान्वयन में भारी लेट लतीफी। केंद्र सरकार ने जिस अच्छी मंशा के साथ योजना की शुरुआत की थी, उस मंशा पर पलीता लग गया है और अधिकतर जगहों पर जल जीवन मिशन योजना ने बुरी तरह दम तोड़ दिया है। पिछले विधानसभा चुनाव के पहले छग में जल जीवन मिशन योजना का मुद्दा खूब गरमाया था और विपक्ष में रहते बीजेपी ने सरकार बनने पर गड़बड़ी पर कार्रवाई की बात कही थी, जल जीवन मिशन योजना में भ्रष्टाचार का मुद्दा शुरू से सुर्खियों में रहा है, योजना में भ्रष्टाचार का मुद्दा आज भी गरमाया हुआ है, प्रदेश में सरकार बदल गई और विपक्षी बीजेपी, सत्ताधारी बन गई है, लेकिन जल जीवन मिशन की गड़बडि़यों पर कुछ नहीं हुआ, नतीजा, केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी और लोगों का जीवन बदलने वाली योजना का दावा खोखला साबित हुआ है, गांवों में जल की समस्या खत्म करने की मंशा थी, लेकिन यह योजना भ्रष्टाचार के मकड़जाल में फंस गई है।
कोरिया जिले में भी जल जीवन मिशन की बदहाली छिपी नहीं है, सोनहत और बैकुंठपुर ब्लॉक में गांव-गांव में करोड़ों खर्च कर टंकी बनाई गई है, लेकिन घरों तक पानी नहीं पहुंच रहा है, ज्यादातर जगहों में पानी का सोर्स नहीं है, ऐसे में करोड़ों की पानी टंकी, सफेद हाथी साबित हो रही है. योजना में गड़बड़ी का आलम यह है कि गांवों में 100 फीसदी हर घर जल देना है, किंतु घरों तक पाइप लाइन तक नहीं पहुंची है और वहां के रहवासियों को एक बूंद पानी का इंतजार है, जल जीवन मिशन योजना के क्रियान्वयन में बड़ी लापरवाही बरती गई है, जल के सोर्स की व्यवस्था के बिना, कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार के लिए योजना के तहत कार्य कराया गया है और करोड़ों खर्च के बाद भी लोगों को जल उपलब्ध नहीं है। योजना शुरू करने केंद्र सरकार की मंशा बेहद ही अच्छी रही है और ग्रामीणों के जीवन में बदलाव के लिए जल जीवन मिशन योजना की शुरुआत की थी, लेकिन बंदरबाट करने की मंशा रखने वालों के आगे योजना ने दम तोड़ दिया है. हर घर तक जल पहुंचाने की सोच को भ्रष्टाचार के दीमक ने खत्म कर दिया है, यह बात तय है कि जल जीवन मिशन योजना के क्रियान्वयन और मॉनिटरिंग में सरकार सजग नहीं रही. स्थिति यह रही है कि एक तरफ करोड़ों खर्च होते रहे और दूसरी ओर बंदरबाट होती रही, इस वजह से योजना का वैसा लाभ ग्रामीणों को नहीं मिला, जिस उम्मीद के साथ सरकार ने योजना की शुरुआत की थी. अब देखने वाली बात होगी कि सरकार, आगे क्या कदम उठाती है? लाखो की पानी टंकी, सफेद हाथी बनेगी रहेगी या फिर लोगों के घरों तक पानी पहुंचाने के लिए सरकार सार्थक पहल करेगी?
सप्लायर कर्ज में डूबे स्कूल आंगन बाड़ी में चार साल से लंबित है भुगतान
जल जीवन मिशन के के तहत रनिंग वाटर सप्लाई का कार्य कराया गया जिसका चार साल से सामग्री का भुगतान नही किया गया है सोनहत के प्रकाश ट्रेडर्स के संचालक सूर्य प्रकाश साहू ने बताया कि अकलासराई सोनहत नौगई, पोड़ी, भैसवार कछार सहित अन्य कुछ पँचायत में रनिंग वाटर सप्लाई के तहत सामग्री प्रदान किया था जिसका चार साल में भुगतान नही हो पाया। सूर्य प्रकाश साहू न बताया कि सिर्फ मेरे फर्म का लगभग 12 लाख का भुगतान लंबित है मेरे जैसे कई सप्लायर ने सामग्री दिया था, अब हम कर्जदार हो गए हैं काफी बुरी स्थित है। शासन प्रशासन को ज्ञापन दिया, एसडीएम, सीईओ, कलेक्टर कोरिया, जनदर्शन, कमिश्नर, सहित मुख्यमंत्री पोर्टल तक मे शिकायत किया पर भुगतान नही मिला, कोई सुनने वाला नही है हम जाए भी तो जाएं कहाँ कुछ समझ नही आ रहा है।
स्कूलों आंगन बॉडी में रनिंग वाटर का काम भी गुणवत्ता विहीन
जिले के स्कूलों आंगन बड़ी केंद्रों में करोड़ो रुपयों की लागत से कराया गया रनिंग वाटर सप्लाई का काम बदहाली के दौर से गुजर रहा है। काम इतना गुणवत्ता विहिन कराया गया कि वर्तमान में अधिकांस स्कूलों और आंगनबाड़ी में योजना ने दम तोड़ दिया और फेल हो गई, वर्तमान में अधिकांश स्कूल और आंगनबाड़ी में नल है तो जल नही और जल है तो नल नही की स्थित बन गई है, और बच्चो सहित स्कूल का स्टाफ पानी की बूंद के लिए तरस रहा है आंगनबाड़ीयों की स्थित तो और खराब हो गई है।
सोनहत विकासखण्ड में पीएचई का खुले कार्यालय:जयचंद
क्षेत्र के अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता जयचंद सोनपाकर ने पी एच इ विभाग का कार्यालय सोनहत विकासखण्ड स्तर पर खोले जाने की मांग प्रशासन से किया है। अधिवक्ता सोनपाकर ने कहा कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग का लॉक स्तर पर कोई कार्यालय संचालित नही है इससे ग्राम जनों को भारी परेशानी होती है यदि किसी ग्रामीण को कोई काम हो या कोई आवेदन देना हो तो सीधे जिला मुख्यालय बैकुंठपुर जाना पड़ता है जिससे भारी परेशानी होती है। जबकि नियमानुसार खण्ड स्तर पर ग्रामीणों की सुविधानुसार पी एच ई का एक कार्यालय तो होना ही चाहिए लेकिन अभी तक कोई कार्यालय नही है, पी एचई के अधिकारी और कमर्चारी भी सोनहत मुख्यालय में निवास नही करते जिससे ग्राम वासी जाएं भी तो जाए कहाँ सिर्फ दो तीन हैंड तकनीशियन के मत्थे पूरा लॉक निर्भर है और उनसे भी सम्पर्क ब मुश्किल ही हो पाता है। क्षेत्र के ग्रामीणों ने भी जिला प्रशासन से मांग किया है कि सोनहत विकासखण्ड स्तर पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग का एक कार्यालय खोला जावे।
सोनहत क्षेत्र में जल जीवन मिशन का हाल-बेहाल
ग्राम पंचायत सोनहत में जल जीवन मिशन का बुरा हाल है पहले नल का ठीहा बनाया गया और पूर्ण कर दिया गया इसके बाद धीरे धीरे पानी टँकी का काम लगभग 11 लाख की लागत से शुरू हुआ, पानी की टँकी बनते आधे से ज्यादा नल के ठीहे टूट गए, पाइप लाइन खराब हो गई। टँकी बनी तो कनेक्शन नही हुआ आलम यह हो गया कि अभी भी पुरानी पानी टँकी से महज दो से तीन वार्डो में पानी आ रहा जबकि यहाँ 20 वार्ड है नई टँकी में जहां नल है वहां जल नही और जहाँ जल है वहां नल नही की स्थिति है, सोनहत के ही भुनिहारिपारा में भी लगभग 12 लाख.की लागत से पानी की बडी टँकी बनाई गई है लेकिन फिलहाल एक बूंद भी पानी लोगो को नही मिला है। वही बगल के ग्राम ओर्गाई और कैलाशपुर में 12 लाख की लागत से पानी टँकी का निर्माण किया गया जिसमे विभाग द्वारा पानी चालू होने का दावा किया जा रहा है लेकिन ग्रामीणों की माने तो एक दिन पानी मिला उसके बाद से पानी की एक बूंद इतनी भारी भरकम टँकी से लोगो को नही मिल पाई है लोग पानी के लिए हलकान हो गए हैं। सलगवां पोड़ी केशगवां बलिया का हाल भी कुछ ऐसा ही है नल है जल नही और जल है तो नल।
रामगढ़ में क्रेडा काम पीएचई से बेहतर
रामगढ़ क्षेत्र में बड़ी टँकी तो नही बनाई गई है बिजली नही होने के कारण सौर संचालित प्लांट लगाया जा रहा रामगढ़ में आलम है कि स्टेडियम के सामने लगे प्लांट में टँकी नही लगी है इसके अलावा एक प्लांट सिंघाड़ी पारा में संचालित है जहां गिनती के 4 से 5 घरों को पानी मिल रहा है, अन्य मुहल्ले में कही कनेक्शन खराब हो गए कही मोटर नही लगाया गया है तो कही कनेक्शन ही नही हुआ है चुलदार नतवाही सिंघोर धनपुर सेमरिया अमृतपुर में कुछ जगह कुछ घरों में पानी मिल रहा है बाकी में कही खराब तो कही थोड़ा बहुत पानी मिल रहा है।
कटगोड़ी क्षेत्र में पीएचई की टँकीया सफेद हाथी साबित हो रही
कटगोड़ी के दमुज सब्जी में लगभग 12 लाख की लागत से टँकी बनाई गई पर पानी 2 साल से नही मिल रहा एक ग्रामीण ने सुशासन तिहार में आवेदन दिया तो विभाग ने आपके घर के सामने हैंड पम्प लगा है कहके आवेदन निराकरण कर दिया पर यह नही बताया कि पानी कब तक मिलेगा इसी तरह केराझरिया तर्रा बसेर रावत सरई लटमा सुंदरपुर में भी कुछ ऐसी ही स्थिति है कही नल नही लगा कही टँकी एकाद जगह जहां सोलर संचालित प्लांट लगे है वहां कुछ घरों को पानी मिलने की जानकारी मिली है। बाद बाकी जगहों का काफी बुरा हाल है।
पराडोल अकलासरई भैसवार बंशीपुर में नही मिल रहा पानी
जल जीवन मिशन के तहत ग्राम भैसवार में भी पानी के लिए नल कनेक्सन बनाये गए है जो पूरी तरह फिलहाल शो पीस बने हुए हैं रुपये लगभग 12 लाख की लागत से पानी की टँकी बनाई गई पर पानी का पता नही है ग्रामीण बताते हैं कि भैसवार जामटिकरा में में जल जीवन मिशन के तहत पानी नही मिल पा रहा है , अन्य ग्रामो की तरह यहां भी यही नल है तो जल नही और जल है नल नही की स्थिति बनी हुई है। भैसवार के अलावा ग्राम पराडोल और अकला सरई में टँकी बनाई गई पर पानी का पता नही है बंशीपुर कचोहर इत्यादि में क्रेडा ने प्लांट लगा दिया है , पानी भी चालू है लेकिन पी एच ई ने घर घर कनेक्शन नही किया है और नल भी नही लगाया गया है, गिधेर चंदहा कदना में कनेक्शन नही किया गया है, पाराडोल में बड़ी टँकी बन गई है लेकिन नल कनेक्शन नही हुआ है जिससे पिछले 2 साल से पानी नही मिल रहा है।


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