- सांसद प्रतिनिधियों की सूची में पूर्व विधायक विरोधियों को मिली सबसे अधिक जगह?
- सांसद ने जहां प्रत्येक शासकीय कार्यालयों के लिए प्रतिनिधि नियुक्त किया वहीं उन्होंने अब उच्च विद्यालयों के लिए भी प्रतिनिधि नियुक्त किया
- यदि देश में सांसद प्रतिनिधियों की नियुक्ति की गणना की जाए तो क्या कोरबा सांसद के प्रतिनिधियों की संख्या सबसे अधिक होगी?
- क्या हाईस्कूलों के बाद अब मिडिल स्कूल व प्राथमिक स्कूल के लिए भी सांसद प्रतिनिधि की होगी नियुक्ति?
- क्या यह टीम पूर्व विधायक को फिर से प्रत्याशी बनाकर उनके लिए काम करने की तैयारी के लिए की जा रही है तैयार,या फिर सिर्फ यह टीम सांसद चुनाव में अपना काम करेगी?
- क्या स्कूलों में सांसद प्रतिनिधि बनने के बाद प्राचार्य का चाय नाश्ते का खर्चा बढ़ेगा?

-रवि सिंह-
कोरिया,07 जून 2025 (घटती-घटना)। कोरबा लोकसभा सांसद का प्रतिनिधि नियुक्ति पत्र आजकल काफी सुर्खियों में जो इसलिए भी सुर्खियां बटोर रहा है क्योंकि यह सतत जारी हो रही हैं और अब इसका अंत नजर नहीं आ रहा है कि यह किस स्तर कर जाकर रुकेगा कब यह स्थिर होगा। कोरबा लोकसभा सांसद ने अपना प्रतिनिधि नियुक्त करना जब आरम्भ किया तब प्रारंभ में जिला स्तरीय उच्च कार्यालयों के लिए उन्होंने नियुक्तियां की जिसे लेकर कोई चर्चा कहीं सुनने को नहीं मिली और इसे सामान्य और पूर्व परंपरा मानकर लोग इसे भूल बैठे वहीं जब नियुक्ति पत्रों की सीरीज जारी होनी शुरू हुई इसको लेकर यह चर्चा आम हुई कि एक सांसद आखिर क्यों इतने प्रतिनिधि नियुक्त कर रहा है आखिर क्या जरूरत आन पड़ी कि वह सतत जारी होने वाली एक सूची प्रकिया आरम्भ कर रही हैं जिसका अंत किस स्तर के प्रतिनिधियों की नियुक्ति तक होगी यह पता नहीं,कोरबा लोकसभा सांसद ने पहले जिला कार्यालयों के लिए प्रतिनिधि नियुक्त किया फिर उन्होंने विकासखंड कार्यालयों के लिए नियुक्तियां की फिर नगरीय इकाइयों के कार्यालयों में नियुक्तियां देखने को मिली और अब जारी नई नियुक्ति सूची उच्च विद्यालयों की सामने हैं जहां भी अलग अलग संस्था के लिए अलग अलग प्रतिनिधियों की नियुक्ति सांसद ने की है और यह नियुक्तियां अब यहीं रुकने वाली हैं इसमें भी संदेह है शायद यह नियुक्तियां मिडिल प्रायमरी स्कूलों तक होंगी यह लोगों के बीच चर्चा है। शासकीय विभागों के लिए पहले से चली आ रही व्यवस्था अनुसार वहीं जनप्रतिनिधि अपने प्रतिनिधि नियुक्त किया करते थे जहां सतत रूप से विभागीय बैठकें आयोजित हुआ करती हैं और जहां जन सामान्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर कोई योजना बनाने का काम होता है। कहने का तात्पर्य केवल जिला कार्यालयों के लिए ही जनप्रतिनिधि अपने प्रतिनिधि नियुक्त किया करते थे और यह भी देखने को मिलता था कि ऐसी संख्या इकाइयों में या जिले के लिए एकल हुआ करती थी। छोटे-छोटे कार्यालयों के लिए अलग अलग प्रतिनिधियों की नियुक्ति की नई परम्परा कोरबा लोकसभा सांसद द्वारा आरम्भ की गई वर्ष 2025 की योजना है यह शायद ऐतिहासिक एक अभियान कहलाएगा जिसका आरंभ किसने कब किया यह आगे सामान्य ज्ञान का एक प्रश्न होगा।
क्या सभी नियुक्त किए गए प्रतिनिधियों को खुद पहचानती हैं सांसद?
कोरबा लोकसभा सांसद ने कई दर्जन प्रतिनिधि कोरिया जिले के शासकीय कार्यालयों स्कूलों के लिए नियुक्त किए हैं,अभी भी सूची जारी हो रही है जो सतत जारी रहने वाली है ऐसा बताया जा रहा है,वैसे सवाल यह है कि क्या वह सभी को व्यक्तिगत रूप से जानती हैं या वह अन्य पहचान वालों से नाम पूछकर उन्हें बिना पहचाने ही नियुक्ति पत्र प्रदान कर रही हैं।वैसे लोगों का कहना है कि यह सूची जिले में उनके खास लोग तैयार कर रहे हैं जिसमें वह मात्र हस्ताक्षर कर रही हैं।
पूर्व विधायक बैकुंठपुर विरोधियों की संख्या अधिक जिन्हें बनाया गया सांसद प्रतिनिधि
सूत्रों ने बताया कि सांसद ने सबसे ज्यादा प्रतिनिधि उन कार्यकताओं को नियुक्त किया जो पूर्व विधायक बैकुंठपुर विरोधी हैं। पूर्व विधायक और सांसद को आपस में काफी करीबी माना जाता था जिसका कई बार उदाहरण भी देखने को मिला था जब कांग्रेस की सरकार थी या विधानसभा के लिए लोगों को टिकट की दरकार थी हर बार सांसद पूर्व विधायक के पक्ष में नजर आईं और उनकी तरफ ही उनका झुकाव रहा। आज ऐसा क्यों देखने को मिल रहा की पूर्व विधायक विरोधियों पर सांसद ज्यादा मेहरबान हैं यह विचारणीय है।
क्या लोकसभा चुनाव के लिए बन रही है टीम या फिर यही टीम पूर्व विधायक की भी होगी सहयोगी?
सांसद ने अपना प्रतिनिधि नियुक्त करने का अभियान जारी कर रखा है,अनगिनत प्रतिनिधि बनाए जा चुके हैं और अभी भी नियुक्तियां जारी हैं,अब सवाल यह है कि यह नियुक्तियां यदि कार्यकर्ताओं को ऊर्जावान बनाए रखने और आगामी चुनाव के लिए तैयार रहने समर्पित रहने के लिए तैयार की जा रही है तो क्या केवल यह सांसद के लिए चुनाव में काम करने वाली टीम रहेगी या फिर यह टीम पूर्व विधायक का टिकट के लिए नम्बर लगने पर उनके लिए भी काम करेगी।
वैसे पूर्व विधायक क्या इन नियुक्तियों से प्रसन्न हैं यह भी सवाल है…
जब साा और प्रभाव का दौर था तब सीमित थे प्रतिनिधि- सांसद अपने सरकार के कार्यकाल में ऐसी नियुक्तियां करतीं तब उनकी नियुक्तियों के लिए सवाल खड़े नहीं होते अब जब सभी जगह वह विपक्ष में हैं उनकी नियुक्तियों को लेकर यह सवाल खड़ा होना लाजमी है कि अब इसकी क्यों जरूरत पड़ी,वैसे लोगों का कहना है यह एक लॉलीपॉप है जो इसलिए बांटा जा रहा है जिससे कार्यकर्ता सांसद की गिरफ्त में रहें और उनके ऋणी रहें वहीं लोगों का यह भी कहना है कि जब प्रभाव और सत्ता का दौर था सांसद ने कार्यकताओं के उत्साहवर्धन के लिए ऐसे तरीके नहीं अपनाए जो उनकी प्रोत्साहन मंशा की समझ के लिए वर्तमान की काफी है।
कार्यालयों सहित स्कूलों के प्रभारी अब चाय नाश्ते की व्यवस्था के लिए चिंतितःसूत्र
वैसे सूत्रों का एक विचित्र दावा है उनका कहना है कि अब कार्यालयों के प्रभारी स्कूलों के प्रभारी इस चिंता में हैं कि वह सांसद प्रतिनिधियों के लिए नाश्ते की व्यवस्था करने मजबूर होंगे,सूत्रों का कहना है कई ऐसे कार्यालयों में स्कूलों में नियुक्तियां हुई हैं जहां नाश्ते का बजट ही नहीं और वह ऐसे में कैसे सांसद प्रतिनिधियों का सत्कार कर पाएंगे।
पत्रकार ने नियुक्तियों को लेकर दर्ज की आपत्ति,असंवैधानिक बताकर कलेक्टर के समक्ष दर्ज की आपत्ति
पत्रकार प्रदीप पाटकर ने नियुक्तियों को लेकर कलेक्टर कोरिया को आपत्ति पत्र प्रस्तुत किया है और नियुक्तियों को असंवैधानिक बताते हुए लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 का उलंघन इसे बताया है,इसे निरस्त करने की मांग उन्होंने की है।
प्राथमिक और मिडिल स्कूलों के लिए भी सांसद प्रतिनिधि नियुक्त होंगे… जो बने है क्या वह स्कूलों के प्रभारियों के लिए सिरदर्द का विषय बनेंगे?
कोरबा लोकसभा सांसद ने उन उन कार्यालयों के लिए भी विद्यालयों के लिए भी प्रतिनिधियों की नियुक्तियां की हैं जिनके लिए प्रतिनिधि नियुक्त करने की आवश्यकता नहीं थी और कहीं न कहीं यह कार्य में बाधाकारी नियुक्तियां होंगी क्योंकि विद्यालयों में अनावश्यक हस्तक्षेप शायद ही छात्रहितकारी कहा जा सकेगा। कोरबा लोकसभा सांसद ने अपना प्रतिनिधि नियुक्त करना ही केवल अपनी जिम्मेदारी मान लिया है वह खुद अब क्षेत्र में समय दे पाने में असमर्थ हैं यह नियुक्तियां यही जताने कारगर नजर आ रही हैं। वैसे कोरबा लोकसभा सांसद ने जितने प्रतिनिधि नियुक्त किए हैं उन्हें वह व्यक्तिगत रूप से पहचानती हैं यह मानना जल्दबाजी होगी क्योंकि पहचानकर भी किसी को इतनी बड़ी संख्या में याद रख पाना एक दुर्लभ मानवीय गुण वाला विषय है। पूरी नियुक्तियों में कोरिया जिले में उन्हें ज्यादा मौका मिला जो पूर्व विधायक विरोधी हैं यह भी एक आश्चर्य जता रहे हैं लोग क्योंकि सांसद पूर्व विधायक के लिए ढाल बनती आईं हैं जब कांग्रेस की सरकार थी और जब विधानसभा के लिए कांग्रेस से कईयों की बैकुंठपुर विधानसभा के लिए अपने लिए टिकट की मांग थी। अब वैसे जनचर्चा है कि प्राथमिक और मिडिल स्कूलों के लिए भी सांसद प्रतिनिधि नियुक्त होंगे और वह कहीं न कहीं ऐसे स्कूलों के प्रभारियों के लिए सिरदर्द का विषय बनेंगे क्योंकि वह स्थानीय होकर प्रतिदिन विद्यालय पहुंचेंगे और प्रभारी को उनका सत्कार करना अनिवार्य होगा। वैसे यह नियुक्तियां असंवैधानिक हैं यह एक पत्रकार का आक्षेप है उसने इसके लिए एक विरोध पत्र जिला कलेक्टर को दिया है जिसमें उसने नियुक्तियों को लेकर मान्यता के विरोध की बात कही है।
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