सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला
बिलासपुर,02 जून 2025 (ए)। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान में संविदा पर कार्यरत ओटी टेक्नीशियन, एनेस्थीसिया टेक्नीशियन,सफाईकर्मी, वार्ड बॉय और रसोइयों की सेवा समाप्ति के खिलाफ दायर की गई याचिकाएं हाईकोर्ट ने खारिज कर दी हैं। न्यायमूर्ति रजनी दुबे की एकलपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि यदि नियुक्ति प्रक्रिया के तहत न हो, तो नियमितीकरण का दावा नहीं किया जा सकता। साथ ही, संविदा कर्मचारी सेवा विस्तार के हकदार नहीं होते। सिम्स बिलासपुर में यदुनंदन पोर्चे,जगदीश मुखी,सुनील सिंह, अनिल श्रीवास्तव समेत कुल 23 लोगों की संविदा पर नियुक्ति वर्ष 1996,2001,2002,2003,2005 और 2008 में की गई थी। एक जून 2015 को डीन द्वारा सभी संविदा कर्मचारियों को नोटिस जारी कर 30 जून 2015 से सेवा समाप्ति की सूचना दी गई। इसके बाद 15 जून 2015 को नए संविदा पदों के लिए विज्ञापन जारी कर दिया गया, जिनमें वे पद भी शामिल थे जिनसे याचिकाकर्ताओं को हटाया गया था।
नए लोगों की नियुक्ति को बताया गलत
याचिकाकर्ताओं ने बताया कि 7 जून 2012 को रायपुर में हुई बैठक में यह निर्णय हुआ था कि पांच वर्ष से अधिक समय से कार्यरत संविदा कर्मचारियों की सेवाएं नियमितीकरण तक जारी रहेंगी। डीन ने भी 5 अप्रैल 2011 को इस निर्णय पर सहमति दी थी, इसके बावजूद 1 जून 2015 को सेवा समाप्ति का आदेश जारी हुआ।याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि पुराने संविदा कर्मचारियों को हटाकर नए संविदा कर्मचारी नियुक्त करना सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के खिलाफ है।
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