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कोरिया,@क्या रेवडि़यों की तरह सांसद ने बांटा प्रतिनिधि का पद?

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-रवि सिंह-
कोरिया,29 मई 2025 (घटती-घटना)। कोरबा लोकसभा सांसद ने रेवडि़यों की तरह क्या सांसद प्रतिनिधि का पद बांट दिया? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि जिस तर्ज पर वह सांसद प्रतिनिधि पद बांट रही हैं उससे यही कहना सही लगता है कि जैसे भोग भंडारे का वितरण हो रहा है और लाइन लगाकर लोग भोग भंडारा ग्रहण कर रहे हैं स्वीकार कर रहे हैं। कोरबा लोकसभा सांसद के परिवार से भी जुड़ी जानकारियों अनुसार लाल बत्ती का मौखिक रूप से बंटवारा करने वाला यह परिवार उसी तर्ज पर सांसद प्रतिनिधि पद बांट रहा है जैसा यह पहले से करते आया परिवार है,वैसे कोरिया जिले एमसीबी जिले में कोरबा लोकसभा संसदीय क्षेत्र से सांसद ज्योत्सना चरणदास महंत ने जिस तरह से भंडारा भोग वितरण किया है सांसद प्रतिनिधि पद का उससे यह बात साबित हो रही है कि यह लॉलीपॉप वह अपने लिए आगामी चुनाव के लिए बांट रही हैं। वैसे पद कहें या रेवड़ी या भंडारा लोग ऐसे खुश हो रहे हैं जैसे उन्हें लालबत्ती मिल गई है,वहीं बताया जाता है कि कोरबा की वर्तमान सांसद जिस परिवार से हैं उस परिवार का छत्तीसगढ़ प्रदेश की राजनीति में हमेशा से दखल रहा है वहीं यह कहना भी गलत नहीं होगा कि उनका या उनके परिवार का संयुक्त मध्यप्रदेश काल से ही दखल रहा है और तभी से यह परिवार गाड़ी में लालबाी लेकर घूमता रहा है और इसी तरह इसी तर्ज पर उसे बांटता रहा है और लोगों को अपने अनुसार चलने बात मानने मानता रहा है,वैसे निर्वाचित और मनोनीत हर विभाग का अदना भी जानता है और कौन लालबत्ती लायक है और उसी अनुसार उसका सम्मान करना है यह सभी विभाग के लोग जानते हैं और वह इसी अनुक्रम में यह भी जान रहे हैं कि इस मनोनयन के लिए उन्हें क्या तैयारी करनी है और इन्हें किस हिसाब से जवाब देना है, यह मनोनयन सरकारी व्यवस्था के लिए एक जबरन जारी पत्र मात्र साबित होगा जिसका कोई अर्थ नहीं निकलेगा यह लोग कम से कम समझ चुके हैं।
सोशल मीडिया इस समय विधायक प्रतिनिधियों की नियुक्ति पर बधाई से भरा पड़ा है…
सोशल मिडिया में बधाई का दौर ऐसा चल रहा है जैसे सभी खुद सांसद बन गए हों जिन्हें सांसद ने प्रतिनिधि बनाया है। क्या करना है क्या काम होगा उनका इसके बजाय वह खुद को वीर बहादुर साबित कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर छाने का प्रयास कर रहे हैं,उनकी उपयोगिता वैसे शून्य होगी और यदि सांसद प्रतिनिधि पद इतना महत्वपूर्ण रहा होता पहले भी सांसद रहते हुए कोरबा लोकसभा सासंद ने ऐसी नियुक्तियां की होती और तब उनकी ही सरकार भी थी तब समझा जाता उनकी मंशा सही दिशा में है,वैसे यह पूरी नियुक्तियां केवल भोग भंडारा है मात्र यही कहना सही होगा। पहले उनका परिवार और वह खुद कई बार जनप्रतिनिधि निर्वाचित रह चुकी हैं लेकिन तब ऐसा उदाहरण उन्होंने पेश नहीं किया।
क्या जितने प्रतिनिधि कोरबा सांसद के हैं क्या उतने पूरे देश में किसी सांसद के होंगे?
कोरबा लोकसभा क्षेत्र की सांसद ने लंबी चौड़ी सूची जारी कर दी है जिन्हें उन्होंने अपना विभिन्न कार्यालयों के लिए प्रतिनिधि बनाया है,लगता ऐसे है कि कोई भी किसी विभाग का नाम लेकर जा रहा है और उसे वहां का प्रतिनिधि बना दिया जा रहा है,वैसे देश के किसी भी लोकसभा सांसद के पास इतने प्रतिनिधि नहीं होंगे जितने इन्होंने नियुक्त कर दिए हैं। अब ग्राम पंचायतों में भी यह शायद नियुक्तियां करें जिससे वहां भी एक एक इनका प्रतिनिधि उपस्थित हो सके। वैसे जितने लोगों को सांसद प्रतिनिधि बनाया गया है वह संख्या ऐतिहासिक संख्या है।
क्या कोरबा लोकसभा सांसद गिनीज बुक वर्ल्ड ऑफ़ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराना चाहती हैं सबसे अधिक सांसद प्रतिनिधि बनाने का?
वैसे क्या कोरबा लोकसभा सांसद गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराना चाहती हैं इसी बहाने इसलिए उन्होंने भोग भंडारा लगाया हुआ है सांसद प्रतिनिधि पद का यह भी प्रश्न सामने आ रहे हैं,लोगों का कहना है कि अधिक से अधिक प्रतिनिधि नियुक्त करने के पीछे यह एक ठोस कारण नजर आता है। वैसे वर्ल्ड रिकॉर्ड जैसा ही मामला भी बन रहा है क्योंकि इससे ज्यादा या इस संख्या के आसपास किसी सांसद के प्रतिनिधि नहीं होंगे।
समोसा चाय बैठकों में मिलेगा यह तय है,विषय संदर्भ भले ही बैठक का ना समझ आए
वैसे बैठकों में समोसा चाय तय है कि मिलेगा भले ही बैठकों में प्रतिनिधियों को विषय समझ में आए न आए, समोसा चाय की बात कुछ नाराज पार्टी के लोगों की ही जबानी सुनी जा रही है जो पूरे मामले को यह कहकर टाल रहे हैं कि अब कार्यकर्ता पार्टी का समोसा चाय बैठकों में पाएगा और इसीलिए पद बांटे गए भोग भंडारा लगाया गया।
कुछ कांग्रेसी हैं नाराज,उपेक्षा का लगा रहे आरोप
कुछ कांग्रेसी इस बीच नाराज भी हुए हैं जिनका कहना है कि उनकी उपेक्षा हुई है और जिलाध्यक्ष और पूर्व विधायक ने वरिष्ठ और कनिष्ठ का ध्यान नहीं रखा है और अपने अनुसार भोग भंडारा सांसद से पद स्वरूप में बंटवा दिया है,वह जल्द पार्टी छोड़ देंगे यह भी उनका कहना है।
इतनी ज्यादा तादाद में आखिर सांसद प्रतिनिधि बनाने की जरूरत क्यों पड़ी
कोरबा लोकसभा सांसद को इतने तादाद में प्रतिनिधि क्यों नियुक्त करना पड़ा यह बहुत बड़ा सवाल है,क्या उन्हें खुद की अनुपस्थिति का पूरा विश्वास है वह क्षेत्र से दूरी बनाना चाहती हैं इस वजह से उन्होंने हर कार्यालय के लिए प्रतिनिधि नियुक्त किया यह क्या सच है यह भी एक विषय है जो सवालों में है,वैसे उनके परिवार का राजनीतिक इतिहास पुराना है और वह जानती भी हैं कि वह प्रतिनिधि नियुक्त कर हर मामले का हल नहीं निकाल सकती फिर भी उन्होंने प्रतिनिधियों की बाढ़ ला दी भोग भंडारा जैसा वितरण किया पद जो सवालों का मामला बन गया है।
क्या किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि को जनता कार्यविभाजन कर घर बैठने के लिए चुनती?
किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि को जनता कार्यविभाजन कर घर बैठने के लिए नहीं चुनती यह भी अब तर्क सामने आ रहा है और यह लोग कहते सुने जा रहे हैं कि कोरबा लोकसभा सांसद ने कहीं न कहीं अपनी ही कार्यक्षमता को हाशिए पर डाला है और वाहवाही मात्र के लिए इस तादाद में सांसद प्रतिनिधियों की नियुक्ति की है जो हास्यास्पद मात्र कहा जा सकता है,पहले जिले में एक जहां प्रतिनिधि होता था किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि का अब सैकड़ों होंगे हो सकता है पंचायतों में भी अब नियुक्तियां हों यह लोगों में चर्चा है,शासकीय हर विभाग में प्रतिनिधि नियुक्त करना अपने निर्वाचन को भी चुनौती देना लोगों का मानना है क्योंकि यदि खंड खंड ही व्यवस्था होनी है क्यों सांसद की जरूरत यह भी प्रश्न खड़ा हो रहा है, वैसे कोरबा लोकसभा सांसद ने कहीं न कहीं लोकतांत्रिक व्यवस्था का मजाक बना दिया है और उन्होंने जनादेश को बांटने का काम किया अपनी जिम्मेदारियों से भागने का काम किया है यह जन चर्चा है। जनचर्चा यह भी है कि सांसद ने जिस तरह भोग भंडारा बांटा उससे जहां कार्यकर्ताओं को उत्साहित कम नाराज होना था इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए घातक बताना था सभी मनोनीत नेताओं ने इसे स्वीकार भी किया और इसके लिए बाकायदा सोशल मीडिया पर अपना टीम भी सक्रिय किया जो इसे बड़ी उपलçध साबित करें उनकी,वहीं वह यह भूल गए कि लोगों ने सांसद सैकड़ों हजारों प्रतिनिधि नियुक्त करने के लिए नहीं उन्हें चुना है उन्होंने प्रत्यक्ष सहयोग और हस्तक्षेप के लिए किसी को सांसद चुना है।
ऐसे-ऐसे लोगों को प्रतिनिधि बनाया गया है जो बैठक में बात भी नहीं रख पाएंगे सिर्फ बधाई संदेश तक ही रह जाएंगे सीमित
कोरबा लोकसभा सांसद ने जिन्हें अपना अनगिनत शासकीय कार्यालयों के लिए प्रतिनिधि नियुक्त किया है वह बैठकों में सही ढंग से विषय भी रख सकेंगे इसमें संदेह है,एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि को शासन विभिन्न प्रशिक्षण से बैठकों के लिए परिपम् बनाती है तब वह कहीं बैठकों में बेहतर अपनी उपस्थिति दर्ज कर पाते हैं और जन सामान्य की समस्याओं को उठा पाते हैं वहीं जिन्हें कोरबा सांसद ने अपना प्रतिनिधि नियुक्त किया है न वह शासन से ही प्रशिक्षित होंगे न ही वह विषय ज्ञान से ही अवगत होंगे,वह कहीं न कहीं बैठकों में केवल विरोध प्रदर्शन और बाधा बनेंगे यह तय है।


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