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रायपुर@ छत्तीसगढ़ डीजीपी चयन को लेकर केंद्र ने दो नामों के पैनल पर दी सहमति

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रायपुर,23 मई 2025 (ए)। छत्तीसगढ़ पुलिस के महानिदेशक पद को लेकर चल रही अटकलों के बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार द्वारा भेजे गए चार वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नामों के पैनल में से दो नामों पर अपनी सहमति दे दी है। अब डीजीपी पद के लिए अरुणदेव गौतम और हिमांशु गुप्ता के नामों को हरी झंडी दी गई है। इससे यह लगभग स्पष्ट हो गया है कि प्रदेश का अगला डीजीपी इन्हीं दो अधिकारियों में से एक होगा। केंद्र ने दो नामों को दी सहमति,दो नामों को किया बाहर राज्य सरकार ने पहले चार वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों में अरुणदेव गौतम,पवन देव,जीपी सिंह और हिमांशु गुप्ता का पैनल केंद्र को भेजा था। लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इसमें से जीपी सिंह और पवन देव के नामों को हटाते हुए दो अधिकारियों अरुणदेव गौतम और हिमांशु गुप्ता के नामों को उपयुक्त माना है। अब राज्य सरकार को इन्हीं दोनों नामों में से एक को छत्तीसगढ़ पुलिस के नए डीजीपी के रूप में नियुक्त करना होगा। वर्तमान में अरुणदेव गौतम ही प्रदेश के कार्यवाहक डीजीपी के रूप में पदस्थ हैं।कौन हैं अरुणदेव गौतम? अरुणदेव गौतम एक वरिष्ठ और अनुभवी भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी हैं। वह लंबे समय से छत्तीसगढ़ पुलिस में विभिन्न पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वर्तमान में वह डीजीपी के तौर पर कार्यरत हैं और कानून व्यवस्था को बनाए रखने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में उनके कुशल नेतृत्व और रणनीतिक निर्णयों की काफी सराहना की गई है।
हिमांशु गुप्ता की प्रोफाइल भी मजबूत
वहीं दूसरी ओर,हिमांशु गुप्ता भी एक सुलझे हुए अधिकारी माने जाते हैं। प्रशासनिक दक्षता और पुलिसिंग के विभिन्न क्षेत्रों में उनके अनुभव को देखते हुए उनका नाम भी केंद्र द्वारा चुने गए पैनल में शामिल किया गया है। उनकी छवि एक सख्त और संवेदनशील अफसर की रही है। राज्य सरकार के सामने अब अंतिम निर्णय की चुनौती अब जब केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दो नामों को मंजूरी दे दी है,तो राज्य सरकार को इन दोनों में से किसी एक नाम को अंतिम रूप से डीजीपी पद के लिए चुनना होगा। सूत्रों के अनुसार,मुख्यमंत्री कार्यालय और गृह विभाग जल्द ही इस पर अंतिम फैसला ले सकते हैं। चूंकि अरुणदेव गौतम पहले से ही इस पद पर कार्यरत हैं,इसलिए उन्हें प्राथमिकता मिलने की संभावना अधिक मानी जा रही है,लेकिन अंतिम निर्णय पूरी तरह से राज्य सरकार के विवेक पर निर्भर करेगा।


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