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सूरजपुर,@परेशानी प्रकाश इंडस्ट्रीज ओपन कास्ट प्रबंधन से…समाधान कर रहे हैं जिला पंचायत सदस्य,कैसे?

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-ओंकार पाण्डेय-
सूरजपुर,11 मई 2025 (घटती-घटना)। सूरजपुर जिले के भैयाथान विकासखंड में ग्राम भास्करपारा में प्रकाश इंडस्ट्रीज को ओपन कास्ट खदान आवंटन किया गया है, जहां पर कोयला निकालने का काम शुरू हो चूका है,उससे पहले वहां पर इंफ्रास्ट्रख्र का कार्य चल रहा है जमीन अधिग्रहण हो चुका है पूरी प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद वहां से कोयला उत्पादन का कार्य शुरू हो गया है, पर इसके बाद भी यहां पर समस्याओं का अंबार है समस्या पर कोई बात नहीं करता है साथ ही वहां पर नौकरी लगाने के नाम पर एजेंट सक्रिय हो गए हैं, जिसे लेकर बड़ी प्रमुखता के साथ दैनिक घटती-घटना ने खबर प्रकाशित की थी,उसके दूसरे दिन ही जिला पंचायत सदस्य अखिलेश प्रताप सिंह ने चौपाल लगाकर ग्रामीणों की समस्या सुलझाने की बात कही पर सवाल यह उठता है कि आखिर अखिलेश प्रताप सिंह प्रकाश इंडस्ट्रीज ओपन खदान के क्या है, प्रबंधन है? मैनेजर हैं या फिर वहां के कोई अधिकारी हैं? जिनका हस्तक्षेप वहां पर देखने को मिला जो समस्या वहां प्रबंधन व प्रशासन को सुलझाना चाहिए था,वहां पर वह क्या चौपाल लगाकर खबरों का खंडन कर रहे थे या फिर अपना राजनीति चमका रहे थे? उनकी इस चौपाल से जो जानकारी सूत्रों के माध्यम से आ रही थी कि उनके हस्ताक्षर वहां देखने को मिलता है तो क्या सही में उस ओपन कास्ट खदान में इनका हस्तक्षेप है जिस वजह से वहां के लोगों को उनकी मर्जी से ही नौकरी मिलेगी और वहां की दशा व दिशा दोनों उनके मर्जी से बदलेगी? क्या जो प्रशासनिक गाइडलाइन है उसके तहत प्रकाश इंडस्ट्रीज काम नहीं करेगा या फिर जिन शर्तों पर वहां पर खदानें खुली है क्या उन शर्तों का पालन नहीं होगा जो राजनीतिक दल के नेता चाहेंगे वह प्रकाश इंडस्ट्रीज करेगा? प्रकाश इंडस्ट्रीज के इशारे पर नेता चल रहे हैं या फिर नेता के इशारे पर प्रकाश इंडस्ट्रीज चल रहा है?
जानकारी के अनुसार जमीन अधिग्रहण में भी काफी कुछ नया देखने को मिला था पर वहां के कुछ स्थानीय नेता को अपने गिरफ्त में लेकर प्रकाश इंडस्ट्रीज ने अपने सारे मामले निपटारा करके काम शुरू कर लिया, और यह क्या कोई उन्होंने जनता के हित के लिए नहीं अपने स्वार्थ के लिए किया, जिसके लिए उन्हें मोटी रकम भी मिली ऐसा सूत्रों का दावा है, अब जब काम शुरू हो गया है तो वहां पर भर्राशाही की खबरें सामने आ रही हैं नौकरी लगाने के नाम पर सबसे बड़ा ठग गिरोह वहां पर सक्रिय है,बताया जाता है की नौकरी लगाने का सबसे ज्यादा वहां पर वह लोग आश्वासन दे रहे हैं जिनकी सबसे ज्यादा जमीन उस खदान के लिए अधिग्रहित हुई है वहां के नेता अपने आप को प्रकाश इंडस्ट्रीज का मालिक मान बैठे हैं? बेरोजगार लोग इस समय उन्हीं के पैर पकड़ रहे हैं की नौकरी दिला दें इसके लिए पैसे के डिमांड भी खूब हो रही है। ऐसी जानकारी सूत्रों के माध्यम से आ रही थी,जिसे लेकर खबर प्रकाशन भी किया गया और आगे भी इस मामले की जानकारी आने पर खबर प्रकाशित होती रहेगी, पर इस खबर प्रकाशन के बाद जो चौपाल लगाया गया वह भी एक बड़ा सवाल खड़ा करता है और उस चौपाल में जो फैसले लिए गए व ऐसा बताया गया कि किसी एक व्यक्ति के पहल से ही यह सारी चीज हो रही है, सारी समस्या वही दूर करेंगे, जबकि कोई उद्योग स्थापित होता है तो उसके लिए नियम पहले से तैयार हो जाते हैं और उसके नियम व शर्तें सब कुछ तय है और उस नियम व शर्तों पर ही काम करना होता है,पर यहां पर उस नियम व शर्तों का पालन नहीं हो रहा था और अब फिर से ग्रामीणों को अपने बातों में लाकर प्रकाश इंडस्ट्रीज को कार्य में कोई दिक्कत ना हो और नियम विरुद्ध तरीके से उनका कार्य होता रहे, इस पर ज्यादा वहां के नेताओं का दिलचस्पी है,जिस वेतन वृद्धि की बात उन्होंने चौपाल में कही है उसमें यह भी लोगों को पता होना चाहिए कि हर खदान के कार्य के लिए जो मजदूर होते हैं उनका वेजेस तय होता है उस वेजेस के तहत ही कोई भी कंपनियां भुगतान करती हैं उसी दर पर ही कंपनी भुगतान करेगी पर वहां के नेता यह बता रहे हैं कि उन्होंने उनका वेतन बढ़ा दिया है, इसका श्रेय वह लेना चाह रहे हैं पर ऐसा बिल्कुल भी नहीं है क्योंकि खनिक संस्था द्वारा मजदूरों का वेजेस तय किया गया है जो वेजेस एसईसीएल में है वही वेजेस प्रकाश इंडस्ट्रीज को भी मजदूरों को देना है।


क्या मजदूरों का सीएमपीएफ अकाउंट खोला गया?
किसी भी मजदूर के लिए उसके कार्य के मजदूरी का भुगतान जितना जरूरी होता है उतना ही जरूरी उसके भविष्य उसके परिवार की सुरक्षा भी होती है,क्या प्रकाश इंडस्ट्रीज के मजदूरों का सीएमपीएफ अकाउंट खोला गया है कि नहीं यह भी पता करना आवश्यक है, मजदूरों का यही खाता उनका भविष्य है और इससे उनके परिवार का भी भविष्य जुड़ा हुआ होता है।
क्या वेजेस के आधार पर प्रकाश इंडस्ट्रीज ओपन कास्ट खदान में मजदूरों का भुगतान हो रहा है?
वैसे जिला पंचायत सदस्य की जन चौपाल संपन्न हो गई वह राजनीति अपनी चमका लिए ऐसा लोगों का मानना है वहीं अब असल सवाल यह है कि क्या प्रकाश इंडस्ट्रीज में काम करने वाले मजदूरों को वेजेज के आधार पर वेतन भुगतान हो रहा है यह फिर मनमाना वेतन प्रकाश इंडस्ट्रीज मजदूरों को प्रदान कर रहा है,सवाल काफी बड़ा इसलिए है क्योंकि मजदूर जो मेहनत कर रहे हैं उन्हें शासन के द्वारा तय वेजेज के आधार पर वेतन मिलना चाहिए और वह मिल रहा है कि नहीं इसका पता जिला प्रशासन स्थानीय प्रशासन को लगाना चाहिए जिससे मजदूरों का शोषण किसी भी हाल में न हो क्योंकि नेता अपनी राजनीति चमकाने के अलावा कुछ नहीं सोचेंगे जबकि मजदूरों के साथ न्याय तब होगा जब उन्हें सही वेतन मिलने लगेगा।
गंभीर बीमारी होने पर उनके लिए इलाज की क्या व्यवस्था है?
किसी भी उद्योग और खनन क्षेत्र में काम करने वाली कोई इंडस्ट्री इस बात के लिए भी जवाबदेह होती है कि उसके कार्य क्षेत्र में उसके इंडस्ट्री में काम करने वाले लोगों का इलाज आवश्यकता पड़ने पर बेहतर हो सके वह इसका ध्यान रखे,अब क्या प्रकाश इंडस्ट्रीज के मामले में ऐसा हो रहा है क्या प्रबंधन इस बात का ध्यान रख रहा है यह भी देखना होगा प्रशासन को क्योंकि यह देखना न तो जनप्रतिनिधि का कार्य है और न ही वह देखेंगे वह केवल अपनी राजनीतिक रोटी ही सेकते रहेंगे यह तय है।
कुछ समाचार से पता चला कि भास्करपारा खदान में जिला पंचायत सदस्य ने लगाई चौपाल
दैनिक घाटती-घटना खबर प्रकाशन एक समाचार सामने आया की भास्करपारा खदान में जिला पंचायत सदस्य की चौपाल लगाकर ग्रामीणों की समस्याओं का सार्थक समाधान उन्होंने निकाल दिया,त्वरित निर्णय सार्थक परिणाम है,चौपाल में अखिलेश ने ग्रामीणों की समस्याओं को बिंदुवार सुना और प्रबंधन से सीधी बात कर समाधान निकाला। उनकी पहल पर अकुशल मजदूरों का वेतन 12 हजार से बढ़ाकर 15 हजार रुपये करने,प्रभावित भूस्वामियों को उचित मुआवजा और नौकरी देने, तथा हैवी लाइसेंस धारक वाहन चालकों को खदान में प्राथमिकता के साथ रोजगार देने का फैसला हुआ। इसके अलावा, सीएसआर फंड से दलौनी में मंदिर निर्माण के लिए 2 लाख रुपये का चेक,पेयजल के लिए बोरिंग,स्वास्थ्य सुविधा के लिए एम्बुलेंस और कुर्रीडीह बांध के गहरीकरण का वादा किया गया। पर उनके इस समाधान के बाद जो सवाल खड़े होते हैं वह यह है कि सीएसआर मद् से उस क्षेत्र का एक विकास होना चाहिए,उसपर उन्होंने कोई बात नहीं की सारे निर्णय उन्होंने ऐसे दिए जैसे लगा कि वह उस प्रकाश इंडस्ट्रीज के कोई बड़े अधिकारी हो जबकि यह सब बाते प्रकाश इंडस्ट्रीज के प्रबंधन को लिखित में देना चाहिए था,जो वहां पर ऐसा देखने या सुनने को नहीं मिला, जिस वेतन वृद्धि की बात की गई वह भी शासन का तय किया गया वृद्धि है जो प्रकाश इंडस्ट्रीज को देना ही है,क्योकि वेजेस से वह कम वेतन देंगे तो उन पर भी श्रम विभाग द्वारा कार्यवाही किया जा सकता है या फिर कोल इंडिया द्वारा उसपर कार्रवाई हो सकती है, साथ ही रही रोजगार की बात तो उन्होंने पैसे देकर नौकरी लगने की बातों पर कोई भी जोर नहीं दिया,उनके इस चौपाल में समस्या सुलझाने की नियत कम राजनीति चमकाने ज्यादा देखने को मिला, क्योंकि यह आगे के भविष्य को देखते हुए अपने विधायक का ख्वाब शायद देख रहे हैं? ऐसा अब जन चर्चा का विषय बनने लगा है यदि सही में वह अपने क्षेत्र की जनता का भला सोचते सोचता वह स्वार्थ से परे होकर वहां के समुचित विकास की बात जरूर करते और उस क्षेत्र के लोगों को रोजगार मिल सके इस पर ज्यादा फोकस करते साथ ही उस क्षेत्र में काम करने जाने वाले लोगों की सुरक्षा की बात करते।
जमीन अधिग्रहण वाले को कब मिलेगा मुआवजा और कब मिलेगी नौकरी…
प्रकाश इंडस्ट्री ओपन कास्ट खदान खुल चुका है और कोयले का उत्पादन शुरू हो चुका है जमीन का अधिकरण भी हो चुका है,जहां तक कोयला खनन करना है वहां तक की जमीन पर खरीदी-बिक्री रोक दिया गया है पर सवाल यह है कि जहां तक की जमीन को खरीदी बिक्री से रोका गया है वहां तक का मुआवजा का भुगतान कब मिलेगा और उसके एवरेज में मिलने वाली नौकरी कब मिलेगी? इसका कहीं पर भी इस समय सीमा निर्धारित नहीं किया गया है,सिर्फ कुछ नेताओं के दम पर प्रकाश इंडस्ट्रीज के प्रबंध लोगों को बरगलाकर सिर्फ अपना दोहन कर रहे हैं,बाकी समस्या तो उन लोगों की है जो जमीन बेच नहीं सकते और जो जमीन अधिग्रहित हो गई है उसके मुआवजा के इंतजार में वह बैठे हुए हैं, यदि जमीन वह बेच नहीं सकते इसका मतलब यह है की जमीन अधिग्रहित हो चुकी है और जब जमीन अधिग्रहित हो चुकी है तो उसका मुआवजा का भुगतान क्यों नहीं किया जा रहा? उसके लिए एक समय अवधी क्यों नहीं तय की गई? क्या जब वह कोयला खोद कर चले जाएंगे तब उसका मुआवजा मिलेगा…तब तक वह भू-स्वामी भटकते रहे?


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