- 6 माह से मजदूरी भुगतान भी लंबित वनांचल क्षेत्र के ग्रामीण मजदूरों को मौसम
- के साथ सरकार की भी दोहरी मार,
- विवाह के सीजन में आर्थिक संकट की स्थिति मजदूरी,हितग्राही मूलक कार्यो में भारी गिरावट खराब मौसम महुए की शुरुवात के
- समय हुई बारिश से प्रभावित हुआ हुआ महुआ सहित अन्य वनोपज
- क्षेत्र अधिकांश वनांचल क्षेत्र के ग्रामीणों की आय का मुख्य स्रोत है वनोपज

-राजन पाण्डेय-
सोनहत 24 अप्रैल 2025(घटती-घटना)। वनोपजों पर मौसम की मार इस बार ज्यादा रही प्रतिकूल मौसम की भेंट चढ जाने से इस बार वनांचल क्षेत्र के गरीब आदिवासी परिवारों की आय का मुख्य स्त्रोत चार व महुआ बर्बादी की भेंट चढ गया । वहीं तेंदूपत्ता की हालत भी बहुत अच्छी नही है जिससे ग्रामीण बेबस हो गए हैं। वनोपज पर आंधी, चक्रवती हवाएं और और खराब मौसम के कहर से ग्रामीणों की आय का स्त्रोत इस बार बर्बादी की भेंट चढ गया अब वनांचल वासियों के समक्ष आय के स्त्रोत की समस्या खडी हो गई जिससे कि वह अपने परिवार का जीविकोपार्जन कैसे बढ़ाएं।

महुए की पैदावार बेहद कम
इस बार खराब मौसम के कारण महुए व चार के पेडों में लगी कूचियां झड गई है जिससे महुआ के बेहद कम मात्रा में पेडों से गिरा जैसे-जैसे गर्मी शबाब पर आती है वैसे-वैसे महुए की फसल भी अच्छी होती है लेकिन इस बार हालत बिल्कुल विपरित बने थे जिससे ग्रामीण परिवार के लोग हैरान-परेशान नजर आए इस वर्ष बाजार में महुआ 50 रुपए किलो के आस पास बिक रहा है। लेकिन आवक नही होने से परेशानी बढी है। राम सिह सोना लाल सहित अन्य ग्रामीण बताते है कि बाजार में दाम तो अच्छे है लेकिन वनोपज ही नहीं है ऐसे में बढे हुए दाम भी उनके किसी काम में नहीं आ रहे हैं
प्रभावित होंगे अंचल के बाजार
ग्रामीण अंचलों में लगने वाले साप्ताहिक बाजार में मुख्य रूप से ग्रामीण ही खरीददारी करने के लिए पहुंचते हैं। जिस वर्ष वनोपज की पैदावार अच्छी होती है उस समय अंचलों के बाजारों में भी अच्छी खरीददारी होती है लेकिन इस वर्ष वनोपज बाजार पर प्रभावित होता दिखाई दे रहा है बाजारों में पहले जैसी रौनक नही है।
आती हैं समस्याएं…
वनोपज का संग्रहण साधारण कार्य नही है। बंशीपुर चंदहा के ग्रामीणों ने बताया कि तेदू पत्ते की एक हजार गड्डी तैयार करने में 4 से 5 दिन लग जाते है। इसके बाद कहीं जाकर वे संग्रहण राशी के हकदार हो पाते है। ग्रामीणों ने बताया कि बहुत सी समस्याएं उन्हें झेलनी पडती है। पत्तों को तोडना और फिर उनकी गड्डियां तैयार करना कठिन कार्य है। इन गड्डियों को सुखाया जाता है। और इसके बाद ठेकेदार उन्हें लेता है। नमीं के कारण कई बार अंदर के पत्ते खराब हो जाते है जिसे ठेकेदार अस्वीकृत कर देता हैं। परिणामस्वरूप मेहनत पानी में चली जाती है।
माता दाग से प्रभावित होगा तेंदू पत्ता संग्रहण
सोनहत क्षेत्र में में तेंदूपत्ता तुड़ाई व संग्रहण का कार्य मई में शुरू हो जाएगा। वन विभाग द्वारा इसकी तैयारियां तेजी से की जा रही है। इस बीच तेंदूपत्तों में माता दाग के बढ रहे प्रकोप से विभाग के साथ ठेकेदारों की भी चिंता बढ गई है। तेंदूपत्ता संग्रहण के लिए समितियां निर्धारित करने का कार्य भी जारी है। लक्ष्य भी लगभग पिछले वर्ष के मुताबिक ही बताया जा रहा है। उल्लेखनीय है की जहां विभाग इस बार तेंदूपत्ते का संर्ग्रहण लक्ष्य से अधिक होने की संभावना लगा रहा था,वही लक्ष्य की पूर्ति में माता दाग रोग असर डालता नजर आ रहा है। जिलेभर में बेमौसम बारिश के साथ कुछ क्षेत्रों में हुई ओलावृष्टि से तेंदूपत्ते पहले से ही प्रभावित हुए थे। अब माता दाग का असर जिले के सोनहत विकासखंड सहित भरतपुर क्षेत्र में भी दिख रहा है।
मनरेगा में भी 6 माह से नही मिली मजदूरी
कोरिया जिले में मनरेगा के तहत कराए गए कार्यो में पिछ्ले 6 माह से मजदूरों को मजदूरी भुगतान नही मिला है। आलम है कि सुशासन तिहार के समय मे मजदूरों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। एक तरफ विवाह का सीजन चल रहा है सभी मजदूरों पैसो की सख्त आवश्यकता है दूसरी तरफ मजदूरी भुगतान नही मिलने से क्षेत्र के मजदूरों में सरकार के प्रति आक्रोष का माहौल निर्मित हो रहा है। कोरिया जिले के सोनहत और बैकुंठपुर पटना तहसील के सभी पंचायतों में मनरेगा मजदूरों का हाल बेहाल है
मनरेगा के तहत रोजगार मूलक कार्यो में लगातार गिरावट
जिले के सोनहत विकासखंड में मनरेगा के तहत रोजगार मूलक एवं हितग्राही मूलक कार्यो में भारी गिरावट दर्ज की गई है सिर्फ अप्रैल माह की बात करें तो इस साल 23 अप्रैल तक कि स्थिति मेंजिले में अभी तक 3616 परिवार को रोजगार मिला जबकि यही आंकड़ा 2024 में 15668 था वही पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल मे सिर्फ अप्रैल महीने में 16468 परिवारों को रोजगार उपलध कराया गया था,अर्थात यह कहा जा सकता है कि डबल इंजन की सरकार आने के बाद कामो में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है और सम्भवतः ऐसा ही आंकड़ा पूरे प्रदेश में है। लोगो के सामने रोजगार का संकट तो है ही मगर जो काम मिला उसके भुगतान के लिए भी मजदूरों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है

डबल इंजन की सरकार में मजदूरी का संकट:पूर्व विधायक
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने मनरेगा के तहत 6 माह से मजदूरी भुगतान लंबित होने के मामले पर सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि डबल इंजन की सरकार मजदूरों को मजदूरी नही दे पा रही यह बहुत खेद का विषय है,रोजगार मूलक काम मे भी भारी गिरावट है, डबल इंजन की सरकार पूरी तरह फैल है। विवाह का सीजन चल रहा है मजदूरों को तत्काल मजदूरी भुगतान कराने नेता प्रतिपक्ष डा चरणदास महंत से मिलकर बात रखूंगा एवं मुख्यमंत्री जी से भी मांग की जावेगी

दिल्ली में सदन में मैंने मांग किया था: सांसद ज्योत्स्ना महंत
मनरेगा के मजदूरी भुगतान 6 माह से लंबित होने के मामले सांसद कोरबा ज्योत्स्ना महंत ने कहा कि पूरे प्रदेश में यही स्थिति है मैंने सदन में इस मामले पर बात रखा था तो बोले कि जल्द भुगतान कराएंगे पर नही हुआ, इसे पुनः मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ के संज्ञान में लाया जाएगा। सरकार कुछ कर नही रही है प्रधान मंत्री आवास भी सही ढंग से नही मिल पा रहे हैं आवास का मजदूरी भुगतान भी नही मिल पा रहा है। विवाह के इस सीजन में मजदूरों को अपने मजदूरी की जरूरत है जो सरकार इन्हें नही दे पा रही है, ऊपर से बढ़ती महंगाई से जनता पहले से ही त्रस्त है। प्रदेश में अपराध बढ़ रहा है भारत माला प्रोजेक्ट में भ्रस्टाचार हो रहा विकास कार्य ठप्प पड़े हुए हैं
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