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एमसीबी,@क्या नगर पंचायत खोंगपानी की राजनीति एक स्वागत द्वार पर अटक गई है?

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-रवि सिंह-
एमसीबी,30 मार्च 2025 (घटती-घटना)। राजनीति व भ्रष्टाचार में सारे प्रकाष्ठा पर करती है आगे बढ़ाने की सोच को जमीन दोज कर दिया गया है, एक ही जगह पर सुई अटक गई है, वह भी द्वेष की और गंदी राजनीति की जो इस समय देखने को मिल रहा है, एक स्वागत द्वार पर नगर पंचायत के अधिकारी सिर्फ नाम बदलने व चमकते हुए स्वागत द्वार को फिर से मरम्मत करने के नाम से पैसे खर्च हो रहे हैं, जिसका विरोध देखने को मिल रहा है जब पहली बार यह स्वागत द्वार बना था तो यह द्वार कांग्रेस की सरकार में बना था और उसे समय इस द्वार को स्वर्गीय स्व. बिसाहूदास महंत के नाम से बनवाया गया था, जिसमें उनका नाम अंकित हुआ था अब भाजपा की सरकार आते ही उसे चमकते हुए द्वार को फिर से एसीपी बोर्ड से दुबार उसकी सजावट किया गया, उसमें लाखों खर्च करके उसे नाम को बदल दिया गया है और वर्तमान विधायक का फोटो लगा दिया गया है अब ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर जब एक द्वारा बहुत अच्छा दिख रहा था फिर उसमें इतने पैसे खर्च करके दोबारा उसे द्वार को बनाने की क्या आवश्यकता पड़ गई? क्या पैसे न कम पाने की वजह से ऐसी तरकीब निकाला जाता है ताकि पैसा कमाया जा सके और शासकीय पैसे का दुरुपयोग किया जा सके?
आरोप लगाते हुए नगर पंचायत खोंगपानी उपाध्यक्ष विवेक चतुर्वेदी कहां की स्व. बिसाहूदास महंत का नाम स्वागत द्वारा से हटाया गया उपाध्यक्ष के साथ कांग्रेसी करेंगें आंदोलन नगर पंचायत खोंगापानी के नव निर्वाचित उपाध्यक्ष विवेक कुमार चतुर्वेदी द्वारा सीएमओ नगर पंचायत खोंगापानी को ज्ञापन देते हुए यह बताया कि खोंगापानी से नई लेदरी जाने वाले मार्ग पर अविभाजित मध्यप्रदेश के जननायक बांगो डेम एंव छत्तीसगढ़ राज्य के स्वप्नदृष्टा भारत के स्वतंत्रता संग्राम में वानरसेना का नेतृत्व करने वाले परम सम्माननीय स्व. बिसाहूदास महंत जी के स्मृति में स्वागत द्वार बनवाया गया था, जिसका लोकार्पण तत्कालीन राजस्व मंत्री छत्तीसगढ़ शासन जय सिंह अग्रवाल के द्वारा किया गया था परन्तु पूर्व नगर सरकार के द्वारा प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होते ही अपनी ओछी मानसिकता को प्रदर्शित करते हुए स्वागत द्वार से स्व. बिसाहूदास महंत के नाम एंव फोटो को हटवा दिया गया जो कि न्यायसंगत नहीं है, जिसका हम विरोध करते हैं 07 दिवस के भीतर यदि स्वागत द्वार में स्व. बिसाहूदास महंत जी का नाम एंव फोटो अंकित नहीं कराया जाता है तब कि स्थिति में हम कांग्रेसियों एंव जनमानस के द्वारा आंदोलन किया जायेगा आंदोलन की स्थिति की समस्त जवाबदेही शासन प्रशासन की होगी। सवाल यह उठता है कि क्या सरकार जब-जब बदलेंगे तब तक हर चौक चौराहे पर ऐसे स्मृतियों के नाम बदल जाएंगे जो भाजपा के विचारों के नहीं होंगे या फिर जो कांग्रेस के विचारों के नहीं होंगे क्या सत्ता परिवर्तन के साथ नाम परिवर्तन की राजनीति चलती?


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