- वार्ड क्रमांक 8 एवं 11 की हार की मुख्य वजह टिकट वितरण,परिवारवाद और संघ के बेवजह दखल से भाजपा ने गवाया यह दो वार्ड
- योग्य और जिताऊ को टिकट देकर भाजपा जीत सकती थी कई और वार्ड,दूरदर्शिता का आभाव टिकट वितरण में नजर आया
- अध्यक्ष निर्वाचित गायत्री सिंह जिलाध्यक्ष भाजपा और अपनी टीम का साथ नहीं लेती तो वह भी जाती हार

-रवि सिंह-
कोरिया/पटना,18 फरवरी 2025 (घटती-घटना)। कोरिया जिले के नवगठित नगर पंचायत पटना के संपन्न चुनाव में भाजपा अध्यक्ष का पद तो जीत गई स्थिर नगर सरकार के लिए उसके पांच पार्षद भी जीतकर आ गए लेकिन उपाध्यक्ष का पद भी भाजपा का होता यदि टिकट वितरण में पार्षदों के परिवारवाद और संघवाद नहीं चला होता। दो वार्ड भाजपा परिवारवाद और संघवाद के कारण हार गई जिसमें वार्ड क्रमांक 8 और 11 शामिल हैं। वार्ड क्रमांक 8 को लेकर बताया जा रहा है कि वहां यदि प्रत्याशी कोई और होता चुनाव भाजपा जीत सकती थी लेकिन संघ के अनावश्यक दबाव के कारण ऐसे व्यक्ति को टिकट दिया गया जिसे आरम्भ से ही वार्ड वासियों का समर्थन मिलता नजर नहीं आया।
बताया यह भी जाता है कि जिसे वार्ड क्रमांक 8 से टिकट दिया गया था उसके लिए संघ का दबाव था और जिस कारण टिकट वितरण के लिए गठित समिति भी कुछ नहीं कह पाई कर पाई उसी तरह वार्ड क्रमांक 11 की बात की जाए तो यह वार्ड भाजपा परिवारवाद के कारण हार गई। वार्ड क्रमांक 11 के लिए भाजपा से टिकट के दो व्यक्ति प्रबल दावेदार थे जिनमें से एक पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष के परिवार के सदस्य थे और एक अन्य जिसके साथ भाजपा संगठन का कोई पैरोकारी करने वाला भले नहीं था लेकिन वह भाजपाई था। पूर्व जिलाध्यक्ष के रिश्तेदार को उनकी जिद पर भाजपा से 11 नंबर वार्ड से टिकट दिया गया और वह चुनाव हार गए वहीं एक अन्य प्रबल दावेदार भाजपा से रहे ने निर्दलीय चुनाव लड़कर यह वार्ड जीत लिया। वैसे पूर्व जिलाध्यक्ष ने कई जगह पर परिवारवाद का उदाहरण प्रस्तुत किया है नगरीय निकाय चुनाव सहित त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में। जातिवाद और परिवारवाद का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए पूर्व जिलाध्यक्ष ने भाजपा समर्थित प्रत्याशी के विरुद्ध अपने पुत्र को चुनावी मैदान में एक जनपद पंचायत क्षेत्र से चुनावी मैदान में उतार दिया है वहीं एक अन्य जनपद क्षेत्र से भी उन्होंने अपने ही परिवार के सदस्य को मौका दिया है जिसके जितने कि संभावना जीत हार परिणामों के बाद सामने आने वाली है।
पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष की दखलंदाजी मनमानी क्या रोक पाएंगे वर्तमान जिलाध्यक्ष भाजपा?
पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष कोरिया की पार्टी के निर्णयों में दखलंदाजी क्या वर्तमान जिलाध्यक्ष भाजपा रोक पाएंगे।पटना नगरीय निकाय चुनाव में पूर्व जिलाध्यक्ष भाजपा के मनमाने निर्णय परिवारवाद का उदाहरण प्रस्तुत करने वाले निर्णय के कारण पार्टी वार्ड क्रमांक 11 की सीट हार गई। पार्टी ने यदि पूर्व जिलाध्यक्ष का परिवारवाद से प्रेरित होकर लिया जा रहा निर्णय नहीं माना होता वार्ड क्रमांक 11 का जीतकर आया हुआ निर्दलीय पार्षद आज भाजपा का ही पार्षद होता। कुल मिलाकर भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष की मनमानी और परिवारवाद से प्रेरित निर्णय ने एक जगह पार्टी को निपटा दिया है और अब 23 फरवरी को जब त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के परिणाम आयेंगे तब यह पता चलेगा कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में उनके परिवारवाद से प्रेरित होकर लिए निर्णयों से पार्टी को फायदा हुआ या नुकसान। वैसे अब नए भाजपा जिलाध्यक्ष पुराने भाजपा जिलाध्यक्ष के निर्णयों को कैसे रोक पाएंगे क्या रोक पाएंगे भी की नहीं यह सवाल खड़ा है। वैसे नए जिलाध्यक्ष से उम्मीदें हैं पार्टी के लोगों को की वह पूर्व जिलाध्यक्ष के कार्यकाल जैसी भर्राशाही नहीं चलने देंगे पार्टी में।
पूर्व जिलाध्यक्ष का परिवारवाद भाजपा में कब तक चलने वाला है?
वैसे पूर्व जिलाध्यक्ष भाजपा की सहमति से एक ही टिकट या समर्थन भाजपा समर्थित होकर चुनाव लड़ रहे के साथ है एक पार्षद प्रत्याशी उनकी सहमति से जिसे टिकट मिला था वह हार चुका है वहीं एक उनका खुद का पुत्र भाजपा समर्थित प्रत्याशी के विरुद्ध चुनाव लड़ रहा है और अब परिणाम उपरांत ही यह साबित होगा कि उनका निर्णय सही था या गलत था। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष का परिवारवाद भाजपा में कब तक चलने वाला है यह अब वर्तमान जिलाध्यक्ष से भी प्रश्न है पार्टी के ही लोगों का जैसा सुनाई भी दे रहा है,पार्टी के लोगों का वर्तमान भाजपा जिलाध्यक्ष से यह प्रश्न है जैसा सूत्र बता रहे हैं कि कब तक वर्तमान जिलाध्यक्ष पूर्व जिलाध्यक्ष के इशारे और कहने पर पार्टी का संचालन जिले में करेंगे।
पूर्व जिलाध्यक्ष भाजपा का कार्यकाल जैसा ही हो जाएगा वर्तमान जिलाध्यक्ष भाजपा का कार्यकाल?
पूर्व जिलाध्यक्ष भाजपा का कार्यकाल जैसा ही हो जाएगा वर्तमान जिलाध्यक्ष भाजपा का कार्यकाल यदि पूर्व जिलाध्यक्ष भाजपा के निर्णयों के साथ वह आगे बढ़ेंगे यह भी भाजपाइयों का कहना है जो पार्टी के लिए भविष्य के लिए अच्छा नहीं होगा।पार्टी के निर्णय के लिए वर्तमान जिलाध्यक्ष भाजपा को अब पूर्व जिलाध्यक्ष से राय मशवरे की जरूरत नहीं होनी चाहिए यह भाजपाई चाहते हैं अंदर ही अंदर। वैसे पटना नगर पंचायत चुनाव के दौरान एक दो अन्य ऐसे वार्ड थे जहां टिकट वितरण में चुक हुई जिसमें वार्ड क्रमांक 5 भी एक उदाहरण है जहां अन्य वार्ड से प्रत्याशी मैदान में भाजपा ने उतारा और वह बाहरी होने के कारण वार्ड से वार्डवासियों का स्नेह नहीं प्राप्त कर सकी और चुनाव हार गई।
वार्ड क्रमांक 8 में संघ का था टिकट को लेकर दबावःसूत्र, हारा संघ के दबाव में टिकट पाने वाला प्रत्याशी
वार्ड क्रमांक 8 में भाजपा प्रत्याशी संघ के दबाव पर तय हुआ था ऐसा सूत्रों का कहना है। भाजपा ने जिसे वार्ड क्रमांक 8 में प्रत्याशी बनाया वह आरम्भ से ही जिताऊ नहीं था और उसकी हार तय है यह जानते हुए संघ के दबाव पर भाजपा ने उसे टिकट दिया और वह निर्दलीय प्रत्याशी से बुरी तरह हार गया। वैसे संघ का दबाव नहीं होता और टिकट किसी और को दिया गया होता टक्कर जरूर होती परिणाम जो भी आता यह अलग बात है। वैसे कई गलतियों के बाद केवल एक बात अच्छी रही और जिलाध्यक्ष का एक निर्णय जिसे दूरदर्शिता कहें अच्छा रहा की उन्होंने निवर्तमान सरपंच पर दांव लगाया और चुनाव में अध्यक्ष पद पर जीत हासिल कर ली।
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