क्या करूं प्रदेश में हमारी सरकार नहीं है…अगर जीते तो बोलेंगे डॉ विनय?

-रवि सिंह-
एमसीबी/चिरमिरी,31 जनवरी 2025 (घटती-घटना)। नगरीय निकाय 2025 में चिरमिरी नगर निगम कांग्रेस के महापौर प्रत्याशी डॉ विनय जायसवाल दो धारी तलवार से जूझ रहे है, एक तरफ कुआं और एक तरफ खाई। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में मनेंद्रगढ़ विधानसभा से विधायक रहे डॉ विनय जायसवाल का टिकट विधानसभा चुनाव में यह कहकर काट दिया था कि आपने अपने कार्यकाल में विरोध ज्यादा पैदा किया है, वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार कर हिटलरशाही राज चलाया था, कार्यकर्ताओं के भरोसे पर कुठाराघात किया था किंतु वही संगठन 2025 के निगम चुनाव में उन्हें प्रत्याशी बनाकर मैदान में उतार दिया। जिस वक्त कांग्रेस ने महापौर प्रत्याशियों की लिस्ट फायनल की उसी वक्त से कांग्रेस खेमे आस लगाए बैठे कई नेताओं के हाथ पांव फूल गए, विरोध का स्वर इस कदर गूंजा कि उन्हीं के नेता कांग्रेस को घर परिवार की पार्टी कहने लगी और अब यही विरोध संगठन के महत्वपूर्ण पद पर बैठे लाक अध्यक्ष ने निर्दलीय नामांकन दाखिल कर डॉ और महंत के लिए मुश्किलें बढ़ा दी है। बलदेव दास पनिका समाज से आते है और तीन बार निगम में पार्षद रह चुके है और समाज में उनकी बड़ी पैठ है लिहाजा कांग्रेस यानि डॉ साहब को बड़ा नुकसान झेलना पड़ेगा वहीं दूसरी ओर डॉ चरण दास महंत की करीबी मानी जाने वाली बबीता सिंह भी डॉ विनय जायसवाल के प्रत्याशी बनाए जाने से नाखुश है और उन्होंने भी अपना नामांकन महापौर प्रत्याशी के रूप में दाखिल किया था लेकिन बड़े नेता के प्रभाव के सामने घुटने टेक दी और अपना नाम वापस ले लिया है किंतु पार्टी के निर्णय से अभी असंतुष्ठ है, परिवारवाद के खिलाफ उनका विरोध अभी भी जारी है। कांग्रेस खेमे की एक और बड़ी परेशानी युवा नेता प्रेम शंकर सोनी भी है जो कई साल से महापौर और विधायक का टिकट मांग रहे थे, फिलहाल प्रेम शंकर सोनी ने भी नामांकन दाखिल कर चुनाव लड़ने के पूरे मूड में है। इस तरह से कांग्रेस खेमे में ही तीन प्रतिद्वंदी कांग्रेस के लिए बड़ी मुश्किल खड़ा करने वाले है।
डॉ विनय जायसवाल की मुश्किल यही खत्म नहीं होती है। कांग्रेस खेमे में बड़ी पैठ रखने वाले संगठन के महत्वपूर्ण अंग भी टिकट चयन को लेकर खफा है। उनकी माने तो महापौर प्रत्याशी का पैनल में नाम ही नहीं था लेकिन प्रत्याशी बना दिया गया और तो और संगठन के सुझाए पार्षद उम्मीदवारों के नाम पर भी मुहर नहीं लगी इसलिए कांग्रेस संगठन का एक बड़ा हिस्सा और भी नाराज चल रहा है वही दूसरी ओर बीते चुनाव में हार का सामना किए पूर्व प्रत्याशी भी अपनी नजर इस चुनाव में गड़ाए हुए है। माना जाता है कि पिछले चुनाव में कांग्रेस खेमे की हार की वजह यही डॉ साब रहे। चिरमिरी से एक बड़ा नाम और भी सामने आता है जिसका अपना एक कुनबा है, उनकी पहचान किसी पार्टी की मोहताज नहीं रही, अकेले अपने दम पर चुनाव जीतकर सामने आए थे उन्हें भी इस चुनाव से दरकिनार रखा गया लिहाजा ये सभी को मनाना अकेले डॉ साहब के बस के बाहर है किंतु आशंका अभी भी महंत की ओर है शायद वे इन पैनी नजर रखने वाले नेताओं को एक साथ लाने में कामयाब हो। ये रही कुआं वाली बात अब खाई का मतलब इन सभी परिस्थितियों के मद्देनजर चुनाव परिणाम डॉ के खिलाफ आता है तो महापौर की कुर्सी तो गई ही किंतु आने वाले विधानसभा में विधायक के लिए दावेदारी भी नहीं कर सकेंगे और नाराज चल रहे कांग्रेस नेता ऐसा ही चाहते है, फिलहाल परिवारवाद की राजनीति से झल्लाए कांग्रेस का एक बड़ा कुनबा इस चुनाव में निर्णायक मोड में पार्टी को खड़ा करने पर आमादा है।
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