बिलासपुर,06 अक्टूबर 2024 (ए)। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के जस्टिस संजय के अग्रवाल व जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की डिवीजन बेंच ने बैंक में जमा धन और इनकम टैक्स के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। हाई कोर्ट ने आयकर की धारा 68 और 69 ए का हवाला देते हुए कहा है कि अगर कोई खातेधारक बैंक में जमा राशि के संबंध में सही जानकारी नहीं देता है तो संबंधित जमा राशि को इनकम टैक्स में दायरे में लाया जा सकता है। बैंक में जमा राशि के स्रोत को बताने की जिम्मेदारी संबंधित व्यक्ति की है जिनके खाते में धन राशि जमा है।
डिवीजन बेंच ने याचिकाकर्ता के उस दावे को भी खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने 11,44,070 की राशि को मेसर्स श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस कंपनी लिमिटेड का बताते हुए नक्सल प्रभावित क्षेत्र से फाइनेंस के एवज में
बतौर किश्त एकत्रित किया था। राशि वसूलने के बाद अपने बैंक अकाउंट में जमा करा दिया था।
हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा कि जब जमा राशि किसी तीसरे पक्ष के नाम पर हो तो उस व्यक्ति से जमा धन राशि के स्रोत के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी जानी चाहिए। जमा राशि के स्रोत को बताने और सही
साबित करने की जिम्मेदारी उस व्यक्ति का है जिसका नाम खाते में दर्ज है। दिनेश सिंह चौहान की याचिका पर हाई कोर्ट ने यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
क्या है मामला
याचिकाकर्ता दिनेश सिंह चौहान के खिलाफ कर निर्धारण अधिकारी, आयकर आयुक्त (अपील) और आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ढ्ढभ््रभ्) ने यह कहते हुए फैसला सुनाया कि बैंक में जमा धनराशि के स्रोत के संबंध में विश्वसनीय दस्तावेजी साक्ष्य के साथ प्रमाणित नहीं कर पाया है। अपीलकर्ता ने आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण के निर्णय को चुनौती देते हुए कहा कि आयकर अधिनियम की धारा 44 ए के अंतर्गत वह लेखा बही रखने के लिए उत्तरदायी नहीं है। उसने थर्ड पार्टी से वसूली की जानकारी भी दे दी है।
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