- दैनिक घटती-घटना अखबार व पत्रकार तब तक डॉ. प्रिंस जायसवाल के लिए सही है जब तक उनके मन मुताबिक खबर छपती थी?
- पूर्व सीएस के दो पत्र आये सामने…तमाम खरीदी पर खड़े हुए सवाल
-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर,03 जून 2024 (घटती-घटना)। कोरिया जिले के स्वास्थ्य विभाग में कांग्रेस के कार्यकाल में बीते दो वर्षों में जमकर वित्तीय अनियमितताएं बरती गई, जिसकी शिकायत वर्तमान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से हुई उन्होंने जांच के निर्देश दिए,परंतु कांग्रेस के कार्यकाल का जिला प्रशासन हर हाल में जांच में सीएमएचओ और पूर्व डीपीएम को बचाने में जुटा हुआ है, अब मामले में नया मोड़ आ गया है जिन तमाम खरीदी की जांच की जा रही है उंसमे क्रय समिति के एक सदस्य ने खरीदी पर ही दो पत्र जारी कर खुद को अलग कर लिया है। ये उन्होंने सेवानिवृत्त होने के एक महीना पहले ही सरकार को बता दिया था।
जानकारी के अनुसार जिला प्रशासन मुख्यमंत्री के निर्देश पर आई जांच को बड़े गुपचुप तरीके से जिला पंचायत में कर रहा है, जांच अधिकारी के पास सीएमएचओ और पूर्व डीपीएम लंबी लंबी बैठक कर अपनी गलतियों को सही करवाने में जुटे है, हैरानी की बात यह है तमाम एलोपैथिक दवाइयों की खरीदी की जांच आयुर्वेदिक चिकित्सक से करवाई जा रही है,पूर्व डीपीएम आये दिन कलेक्टर चेम्बर में देखे जा रहे है,जिससे आसानी से समझा जा सकता है कि जांच की दिशा क्या होगी,इधर घटती-घटना के पास दो पत्र ऐसे हाथ लगे है जो बीते दो वर्ष में एनएचएम और सीएमएचओ के कार्यकाल में हुई खरीदी की पोल खोल रहे है, जिसमे क्रय समिति के एक सदस्य ने साफ लिख कर बताया है कि उन्हें पता नही कि खरीदी क्या की गई दबाव देकर उनसे जबरन हस्ताक्षर करवा लिया गया है। जिससे साफ बीते दो वर्ष जो कांग्रेस के कार्यकाल के रहे उंसमे जमकर विाीय अनियमितता हुई है, यही कारण है वर्तमान जिला प्रशासन के अधिकारी जो कांग्रेस की सरकार से यहां पदस्थ है उन्होंने कांग्रेस के समय हुई शिकायतों पर बिल्कुल सज्ञान नही लिया, सरकार के बदलने पर मुख्यमंत्री के निर्देश पर आई जांच में भी लीपापोती करवाने में पीछे नही है।
पहले पत्र के अनुसार धमकाकर और दबाव में करवाया हस्ताक्षर
मात्र तीन सदस्यीय क्रय समिति के एक सदस्य जिला अस्पताल बैकुण्ठपुर के तत्कालीन सीएस ने संचालक संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएँ के साथ स्वास्थ्य मंत्री,एनएचएम के डायरेक्टर और संयुक्त संचालक को पत्र लिखकर बताया था कि विçाय वर्ष 2019-20 से 2022-23 तक उनके द्वारा कार्यालय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जिला कोरिया के अंतर्गत स्टोर शाखा द्वारा क्रय किये गए दवाओं एवं अन्य आवश्यक बिल वाउचर पर स्वेच्छा से हस्ताक्षर नहीं किया गया है। उक्त कार्यालय प्रमुख मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य जिला कोरिया के द्वारा दबावपूर्वक स्टोर प्रभारी के रूप में उनसे हस्ताक्षर कराया गया था। उनके द्वारा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जिला कोरिया को कार्य की अधिकता एवं स्वास्थ्य संबंधी समस्या उक्त कार्यालय में स्टोर प्रभारी का कार्य नही करने की मौखिक सूचना दी गई थी। किन्तु उनसे दबाव पूर्वक प्रकरण रोकने की धमकी देकर विçाय वर्ष 2019-20 से 2022-23 तक के समस्त बिल वाउचर पर हस्ताक्षर गया। उक्त सामग्रीयों के क्रय में उनका किसी भी प्रकार से भुमिका नहीं है। उन्होंने यह भी लिखा है की विाीय वर्ष 2019-20 से 2022-23 तक कार्यालय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जिला के अंतर्गत स्टोर शाखा द्वारा क्रय किये गए दवाओं एवं अन्य आवश्यक सामग्रीयों के क्रय की कोई जानकारी उन्हे नही है।
दूसरे पत्र के अनुसार एनएचएम अंतर्गत खरीदी में दबाव
दूसरे पत्र उन्होंने 14 फरवरी 2024 को लिखा जिसमे उन्होंने उल्लेख किया कि जिला चिकित्सालंक बैकुण्ठपुर में एन.एच.एम. मद में विगत वर्ष 2022 से 2024 से वर्तमान तक क्रय की गई समस्त सामाग्री,औषधि,चिकित्सकीय उपकरण एवं अन्य समस्त कार्यों की कार्यवाही हेतु समस्त नस्ती पर एन.एच.एम. कार्यालय के जिला अकाउंट मैनेजर,जिला कार्यकम प्रबंधक के टीप उपरांत जिला चिकित्सालय से मांगपत्र लेकर अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से अनुमोदन लेकर क्रय की कार्यवाही की जाती है। जबकि आर.ओ.पी. में उक्त बजट सिविल सर्जन को प्रदान की जाती है। नियमानुसार सिविल सर्जन को प्राप्त आबंटन के परिपालन में क्रय का अधिकार सिविल सर्जन को है,लेकिन एन.एच.एम. कार्यालय के निर्देशानुसार सदैव क्रय की प्रकिया जिला मुख्यालय से पूर्ण कर अधोहस्ताक्षरकर्ता को दबावपूर्ण भुगतान हेतु हस्ताक्षर कराया जाता है। जिस कारण से उक्त क्रय प्रकिया में अधोहस्ताक्षरकर्ता का किसी प्रकार की भूमिका भूमिका नहीं है। दोनो पत्र से साफ है कि जिला प्रशासन की धौस दिखाकर अधिकारियों कर्मचारियों से जबरन हस्ताक्षर करवाए गए है और जमकर विाीय अनियमितता बरती गई है,बताया जाता है कि यही कारण सीएमएचओ द्वारा सीएस को खूब परेशान भी किया गया, रिटायर मेंट के बाद भी तरह तरह के प्रयोजन कर उन्हें चुप रखने का प्रयास भी किया गया।
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