अब तक मुख कैंसर से पीडि़त 61 लोगों का कर चुके हैं सफल ऑपरेशन
अम्बिकापुर 04 जनवरी 2022 (घटती-घटना)। कैंसर की बीमारी पिछले कुछ समय से भारत सहित पूरी दुनिया में बढ़ी है। इसका कारण जागरुकता की कमी भी है। जब तक लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं, कैंसर अंतिम स्टेज तक पहुंच जाता है। यह एक ऐसी बीमारी है, जो कोशिकाओं के अत्यधिक विकास का कारण होती है और शरीर के विभिन्न हिस्सों में फैलने की क्षमता रखती है।वही अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल के चिकित्सकों ने संसाधनों की कमी के बावजूद तीन और मुख्य कैंसर से पीडç¸त मरीजों का ऑपरेशन किया है। ऐसा भी मरीज पिछले कई महीनों से मुख कैंसर से पीडç¸त थे। सफल ऑपरेशन पूर्ण होने के बाद अब इन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कीमो थेरेपी की सुविधा ना होने के कारण इन्हें रायपुर जाना पड़ेगा।
जानकारी के अनुसार अंबिकापुर निवासी अंजनी केवट उम्र 35 वर्ष, सूरजपुर भैयाथान थाना क्षेत्र निवासी हीरामणि यादव उम्र 55 वर्ष व लखनपुर निवासी निर्मला मिश्रा उम्र 60 वर्ष ऐसे भी मुख्य कैंसर से पीडç¸त थे। यह तीनों पिछले दिसंबर महीने में अलग-अलग तिथि को ओपीडी दंत विभाग में आए थे। जांच के बाद पता चला कि मुख कैंसर से पीडç¸त हैं। डॉ अभिषेक हरीश ने मेडिकल कॉलेज अस्पताल डॉक्टर लखन सिंह को जानकारी दी। इसके बाद तीनों मरीजों का अलग-अलग तिथि में मुख कैंसर का सफल ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन में मुख्य रूप से एनेस्थीसिया विभाग से डॉक्टर मधुमिता मूर्ति डॉ शिवानी भगत व डेंटल सर्जन डॉ अभिषेक हरीश मुख्य रूप से शामिल रहे।
दिसंबर महीने में किया गया ऑपरेशन
सभी तीनों मरीज जबड़े की दर्द से पिछले कई महीनों से परेशान थे। ए तीनों अलग-अलग तिथि में दिसंबर महीने में ओपीडी में आने पर पता चला कि ऐसे भी मुख्य कैंसर से पीडç¸त हैं। डेंटल सर्जन डॉ अभिषेक हरीश ने बताया कि तीनों मरीजों का दिसंबर महीने में मुख कैंसर का ऑपरेशन किया गया था। सफल ऑपरेशन के बाद स्वास्थ्य में सुधार होने पर इन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया है।
अब तक 61 लोगों का किया जा चुका है ऑपरेशन
मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कीमोथेरेपी की सुविधा ना होने के कारण इन मरीजों को कीमो के लिए रायपुर जाना पड़ेगा। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में संसाधन व उपकरण की कमी के बावजूद भी डॉक्टरों की मेहनत व लगन से मुख्य कैंसर के अब तक 61 से ज्यादा मरीजों का ऑपरेशन किया जा चुका है। एक मरीज के मुख्य के ऑपरेशन में निजी क्लीनिक में लगभग तीन लाख से ज्यादा खर्च होते हैं।
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