हम शुरू से कहते रहे कि यह राजनीतिक षड्यंत्र था
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस अरविंद वर्मा डिवीजन बेंच ने ट्रायल कोर्ट की सजा को बरकरार रखा
रायपुर,05 अप्रैल 2024 (ए)। 2003 में हुए रामावतार जग्गी हत्याकांड मामले में हाईकोर्ट चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस अरविंद वर्मा डिवीजन बेंच ने आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है। 4 जून 2003 को एनसीपी नेता की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में 31 अभियुक्त बनाए गए थे, जिनमें से दो बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे। अमित जोगी को छोड़कर बाकी 28 लोगों को सजा सुनाई गई थी, जिसके बाद आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील दायर कर निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट के दोषियों की अपील को खारिज किए जाने के बाद रामवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने कहा कि मुझे न्यायपालिका पर भरोसा था। सभी अभियुक्तों को सजा सुनाई गई। हमारा परिवार शुरू से कहता रहा कि यह राजनतिक षड्यंत्र था।आजीवन कारावास की सजा पाने वालों में तीन पुलिस अफसर थे। इसके अलावा कारोबारी याहया ढेबर, अभय गोयल, सूर्यकांत तिवारी, शूटर चिमन सिंह समेत अन्य शामिल हैं। आरोपियों को आपराधिक षड्यंत्र की धारा 120 बी, हत्या की धारा 302 के तहत सजा दी गई है।
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