- बड़े पैमाने पर मध्यप्रदेश की शराब एमसीबी जिले की सीमा पार करके पहुंचाई जाती है छत्तीसगढ़ में
- एमसीबी जिला मुख्यालय में भी बड़े स्तर पर खपाई जाती है मध्यप्रदेश की शराब,शहर के कई होटलों में भी परोसी जाती है मध्यप्रदेश की शराब
- कांग्रेस शासनकाल में भी मामला उठा था छत्तीसगढ़ के विधानसभा में,दो तत्कालीन विधायक आपस भी उलझते नजर आए थे…
- मनेंद्रगढ़ शहर में राट्रीय राज्यमार्ग पर स्थित कई होटल भी शराब परोसने की खबर होती रही है प्रकाशित
- एमसीबी जिले ने नए पुलिस अधीक्षक के लिए मध्यप्रदेश की शराब को छत्तीसगढ़ में प्रवेश होने देने से रोकना बड़ी चुनौती

-रवि सिंह-
एमसीबी,10 फरवरी 2024 (घटती-घटना)। प्रदेश में पुलिस मुख्यालय ने बड़े स्तर पर आईपीएस अधिकारियों की पदस्थापना बदलने का काम किया है और ऐसा नई सरकार के गठन होने के बाद किया गया है जिसके अंतर्गत एकसाथ 46 आईपीएस अधिकारी इधर से उधर किए गए हैं। बड़े स्तर पर आईपीएस अधिकारियों का तबादला प्रदेश की कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से किया गया जो माना जा रहा है। प्रदेश में पांच साल तक कांग्रेस की सरकार थी वहीं पांच साल जैसे ही विधानसभा निर्वाचन 2023 के बाद प्रदेश में भाजपा की सरकार पूर्ण बहुमत से बनी उसने यह तबादला आवश्यक माना और पुरवर्ती कांग्रेस शासनकाल में पदस्थ किए गए कई जिले के पुलिस अधीक्षकों को उनके वर्तमान पदस्थापना स्थल से हटाकर नई जिम्मेदारी प्रदान करते हुए यह उम्मीद जाहिर की की प्रदेश की कानून व्यवस्था इस तरह बेहतर होगी और पुलिस विभाग में बेहतर कसावट आ सकेगा। प्रदेश में कई जिलों के पुलिस अधीक्षक अब नए होंगे जिनमें एमसीबी नवीन जिले के भी पुलिस अधीक्षक अब चंद्रमोहन सिंह होंगे जो पूर्व में अविभाजित कोरिया जिले के पुलिस अधीक्षक रह चुके हैं और यह जिला कोरिया जिले से ही अलग होकर नवीन गठित हुआ है।
एमसीबी नवीन जिला प्रदेश का एक ऐसा जिला भी है जो मध्यप्रदेश की सीमा से लगा हुआ है जिसके कई क्षेत्रों से मध्यप्रदेश राज्य की सीमा से लगती हैं और इन्ही सीमाओं से मध्यप्रदेश की शराब छत्तीसगढ़ खासकर एमसीबी जिले में लाई जाती है। यह शराब एमसीबी जिले में तो अवैध रूप से परोसी ही जाती है साथ ही यही शराब इन्ही रास्तों से होकर प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी भेजी जाती है। अब एमसीबी जिले के नए पुलिस अधीक्षक के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होगी की वह अवैध शराब को जिले की सीमा में प्रवेश होने से कैसे रोकें। वैसे एमसीबी जिले के जिला मुख्यालय में भी यह शराब जमकर परोसी जाती है। कई होटल ढाबों में खुलेआम यह अवैध शराब शराब प्रेमियों को बड़ी आसानी से मिल जाती है।
घुटरीटोला बेरियर,खोंगापानी सहित भरतपुर के कई क्षेत्र जो हैं एमसीबी जिले के क्षेत्र जहां से मध्यप्रदेश की शराब लाई जाती है छत्तीसगढ़ में
एमसीबी जिले का घुटरीटोला बेरियर,भरतपुर का कई क्षेत्र साथ ही खोंगापानी का क्षेत्र मध्यप्रदेश की सीमा से लगता है। मध्यप्रदेश की अवैध शराब इन्ही सीमा क्षेत्रों से एमसीबी नवीन जिले में लाई जाती है। शराब कई बार पकड़ी जाती है और अधिकांश बार शराब प्रदेश खासकर एमसीबी जिले में प्रवेश भी करा दी जाती है। यह सबकुछ लंबे समय से चल रहा है वहीं इसको पूरी तरह रोकने का प्रयास कभी नहीं हुआ यह कहा जा सकता है। इन सीमाओं से कई माध्यम से शराब छाीसगढ़ में लाई जाती है जिसमे बड़े वाहन छोटे वाहन साथ ही दो पहिया वाहन माध्यम बनाए जाते हैं। नए पुलिस अधीक्षक को यह देखना होगा और इस मामले में कड़ा रुख अपनाना होगा तब जाकर ऐसा होने से रोका जा सकेगा।
मध्यप्रदेश की शराब मनेंद्रगढ़ शहर के कई होटल ढाबों के लिए है फायदेमंद व्यापार,अवैध रूप से परोसी जाती है जहां शराब
मध्यप्रदेश की सीमा से लगे हुए एमसीबी जिले के जिला मुख्यालय में कई होटल ढाबे ऐसे हैं जहां मध्यप्रदेश की अवैध शराब परोसी जाती है। इन होटल ढाबों का मुख्य व्यापार ही यह अवैध शराब है। जहां शराब प्रेमियों के लिए बैठने और शराब के साथ खाए जाने वाली सामग्रियों की भी व्यवस्था प्रदान की जाती है। शहर से लगे राष्ट्रीय राज्यमार्ग की बात की जाए या शहर के अंदर के कई होटलों की,कई ऐसे होटल ढाबे हैं जहां यह अवैध शराब बेकौफ होकर परोशी जा रही है। इन पर अंकुश लगाना नए पुलिस अधीक्षक के लिए बड़ी जिम्मेदारी होगी।
कांग्रेस शासनकाल में विधानसभा में गूंजा था मामला,दो कांग्रेसी विधायक अवैध शराब मामले में विधानसभा में हुए थे आमने-सामने
कांग्रेस शासनकाल में भी मध्यप्रदेश की अवैध शराब मनेंद्रगढ़ में खपाई जाती थी और कई होटल ढाबे इस मामले में शामिल बताए जाते थे तब विधानसभा में भी यह मामला उठा था। तब विधानसभा में जिले के दो कांग्रेस विधायक आमने सामने भी नजर आए थे जिन्होंने एक दुसरे पर आरोप लगाया था। तब भी यह स्पष्ट हुआ था की मध्यप्रदेश की शराब एमसीबी जिले में परोसी जा रही है। जब विधानसभा में सत्ताधारी दल के दो कांग्रेस विधायक इस मामले में आमने सामने हुए थे जिले के तब यह भी समझ में आया था की सब कुछ संरक्षण के माध्यम से चल रहा है जिसे रोकने की मंशा तब की सरकार की शायद इसलिए नहीं थी क्योंकि विधायक ही क्षेत्र के इसके पक्ष में थे ऐसा उन्होंने प्रदर्शित किया था। वर्तमान में सत्ता परिवर्तन के फलस्वरूप प्रदेश में भाजपा की सरकार है वहीं जिले के दोनों विधायक भी भाजपा से ही हैं ऐसे में वह इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं यह भी देखना होगा। नए पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी इस मामले में अधिक है क्योंकि नवीन जिले में यह व्यवसाय ज्यादा फलफूल रहा है।
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