- कोरिया जिले की प्रशासनिक अमले में कोई फेरबदल नहीं…चर्चा का विषय।
- कलेक्टर एसडीएम की जोड़ी चर्चा में रही इसके बावजूद सत्ता बदलने के साथ प्रशासनिक फेरबदल में इनका नाम ना होना समझ के परे।
- कांग्रेस के सत्ता में इन्होंने जमकर किया लोगों को परेशान और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर भी रहे संदेह के घेरे में।
- क्या भाजपा की सत्ता आते ही बैकुंठपुर विधायक भईयालाल राजवाड़े ने इन अधिकारियों की गलतियों को किया नजरअंदाज..इन्हें आगे का कार्यकाल पूरा करने का दिया मौका?
-रवि सिंह-
कोरिया 06 जनवरी 2023 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ प्रदेश में एक बार फिर सत्ता परिवर्तन हो गया और कांग्रेस की सत्ता चली गई और अब भाजपा की सत्ता दोबारा छत्तीसगढ़ में आ गई, प्रदेश में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का मंत्रिमंडल भी गठित हो गया और सभी को अपना प्रभार दे दिए और अब प्रशासनिक बदलाव भी होने शुरू हो गए, पहले ही प्रशासनिक बदलाव के तहत 88 आईएएस की तबादला सूची आई जिसमें 19 जिलों के कलेक्टरों का तबादला हुआ, जबकि प्रदेश में 33 जिले हैं 33 जिले में से 19 जिले के कलेक्टर बदल गए पर नहीं बदले गए तो कोरिया कलेक्टर जबकि इनकी मनमानी कांग्रेस सरकार में खूब थी, आज भी कलेक्टर व एसडीएम कांग्रेस के लोगों का ही काम कर रहे हैं, भाजपा के लोगों को अभी भी दरकिनार करके चल रहे हैं, पर इसके बावजूद बैकुंठपुर विधायक भईयालाल राजवाड़े का इनकी तरफ इनको हटाने में ध्यान ना देना समझ के परे है, सूत्रों का ऐसा कहना है की भईयालाल राजवाड़े ने अपनी दरियादिली दिखाते हुए इनकी कमियों को नजरअंदाज कर आगे बढ़ने का मौका दिया है पर यह मौका भईयालाल राजवाड़े के कार्यकाल के लिए सही होगा या फिर इन्हीं की जनता परेशान होगी जिस तरह अभी तक होते आई है यह देखने वाली बात होगी।
वैसे कोरिया जिले के कलेक्टर का कार्यकाल बहुत उपलब्धियों भरा नहीं रहा है अब तक उनके कार्यकाल में कई मामलों में अनियमितता की बातें सामने आती रही हैं जिसमे वित्तीय अनियमितता के मामले भी शमिल रहे। कलेक्टर कोरिया के रूप में इनकी पदस्थापना कांग्रेस शासन काल में हुई थी और उस समय जब तक कांग्रेस की सत्ता थी भाजपा के लोगों को परेशान ही देखा जाता रहा है अब भाजपा की सत्ता में भी कलेक्टर वही रहने वाले हैं जो भाजपा के लोगों को नागवार गुजर रहा है। कोरिया कलेक्टर के अभी तक के कार्यकाल की बात करें तो इनका कार्यकाल जिले के लिए कतई बेहतर नहीं रहा इनके कार्यकाल में जहां राजस्व अमला मनमानी करता रहा वहीं स्वास्थ्य विभाग की खरीदी मामले में भी शिकायतें सुनने को मिली। कुल मिलाकर इनका कार्यकाल जिले में चर्चा का विषय रहा और माना जा रहा था की यह पहले स्थानांतरित किए जाने वाले कलेक्टर होंगे जैसा हुआ नहीं और यह जिले में ही बने रहने के सफल हो गए। वैसे एमसीबी जिले के कलेक्टर का जाना और कोरिया जिले के कलेक्टर का नहीं जाना भी सवाल खड़े करता है क्योंकि दोनो में ही एमसीबी जिले के कलेक्टर का कार्यकाल ज्यादा अच्छा था बशर्ते कोरिया केलेक्टर।
राजस्व अमले की मनमानी कोरिया कलेक्टर रोक पाने में नहीं हो पाए थे सफल
कोरिया कलेक्टर ने अपने अब तक के कार्यकाल में राजस्व अमले की मनमानियों पर रोक नहीं लगा पाई थी। कांग्रेस शासनकाल में कोरिया कलेक्टर का कार्यकाल राजस्व संबंधी समस्याओं के साथ जारी था जिसमे आम लोग परेशान थे। अब जब सत्ता परिवर्तन हुआ है तो उनका कार्यकाल कैसा होगा यह भविष्य में देखने वाली बात होगी ,वैसे राजस्व अमले को अब कैसे संचालित करने वाले हैं कलेक्टर कोरिया यह आगे देखने वाली बात होगी क्योंकि फिलहाल उन्हे अभयदान मिला हुआ है।
स्वास्थ्य विभाग खरीदी में भी हुई है अनियमितता,कलेक्टर रहते खरीदी में अनियमितता की जांच भी नहीं कर सके वर्तमान कलेक्टर
जिले के स्वास्थ्य विभाग में की गई खरीदी में भी अनियमितता की शिकायत सामने आई। खरीदी में जमकर भ्रष्टाचार हुआ शिकायत हुई लेकिन कलेक्टर कोरिया ने शिकायत की जांच में दिलचस्पी नहीं दिखाई। कुल मिलाकर उन्होंने शिकायत को ठंडे बस्ते में डाल दिया जो बताता है की वह जिले की स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर कितने गंभीर हैं।
बैकुंठपुर एसडीएम कार्यालय में भी फरियादी होते रहे परेशान,फिर भी सुध लेने कलेक्टर ने नहीं दिखाई रुचि
कलेक्टर कोरिया के कार्यकाल में एस डी एम कार्यालय बैकुंठपुर में फरियादी परेशान होते रहे फिर भी जिले के मुखिया होने के नाते कलेक्टर ने व्यवस्था दुरस्त करने में कोई रुचि नहीं दिखाई। एसडीएम कार्यालय में अधिकारी की अनियमित उपस्थिति साथ ही पटना तहसील में तहसीलदारों की मनमानी कई बार सुर्खियां बनी लेकिन कलेक्टर कोरिया अपनी धुन में ही चलते रहे कोई ध्यान उन्होंने नहीं दिया।
सत्ता बदलते ही जब जिला अस्पताल पहुंचे कलेक्टर डॉक्टरों की अनुपस्थिति सामने आई
कलेक्टर कोरिया कितने संवेदनशील थे या हैं जिले के लिए यह इसी बात से समझा जा सकता है की उन्होंने जब हाल ही में जिला चिकित्सालय का दौरा किया उन्हे अधिकांश चिकित्सक अनुपस्थित मिले जिन्हे उन्हे कारण बताओ नोटिस जारी करना पड़ा। अपनी जिम्मेदारी दूसरे के कंधे पर डालने का ही नतीजा था यह की उन्हे जिला चिकित्सालय में चिकित्सक नदारद मिले। उन्होंने कार्य विभाजन के तहत बताया जाता है की जिला पंचायत सीईओ को अस्पताल का जिम्मा दिया हुआ था जिसकी पोल तब खुली जब वह खुद अस्पताल पहुंचे।
निर्वाचन कार्य में भी सबसे पीछे नजर आए कोरिया कलेक्टर,कई त्रुटियां भी आई सामने
कलेक्टर कोरिया विधानसभा निर्वाचन 2023 के दौरान भी कई मामलों में अन्य जिलों के कलेक्टरों से पीछे नजर आए। निर्वाचन किसी तरह जिले में संपन्न हो सका। प्रशिक्षण, वाहन व्यवस्था, भोजन सहित मानदेय भुगतान में कोरिया जिला इस बार सबसे पिछड़ा जिला साबित हुआ जिसकी बानगी सोशल मिडिया में भी सुनाई दी। जिले में चुनाव भगवान भरोसे संपन्न हुए ऐसा लगातार सुनने को मिला।
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