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बलरामपुर@बलरामपुर में जंगल कटाई का बड़ा खुलासा…शंकरगढ़ वन परिक्षेत्र में हजारों पेड़ों की अवैध कटाई,विभाग पर उठा गंभीर सवाल

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-संवाददाता-
बलरामपुर,01 अप्रैल 2026 (घटती-घटना)। जिले के शंकरगढ़ वन परिक्षेत्र अंतर्गत बेलकोना गांव से जंगलों की अंधाधुंध कटाई का गंभीर मामला सामने आया है। इस घटना ने न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण की पोल खोल दी है, बल्कि वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों और स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र में हजारों की संख्या में बेशकीमती पेड़ों की अवैध कटाई कर वन भूमि पर कब्जा किया जा रहा है। कभी घने और हरे-भरे जंगलों से आच्छादित बेलकोना का इलाका अब तेजी से उजाड़ में तब्दील होता जा रहा है। बताया जा रहा है कि सैकड़ों से लेकर हजारों एकड़ वन भूमि पर धीरे-धीरे अतिक्रमण कर लिया गया है। इस दौरान बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की गई और जमीन की सौदेबाजी किए जाने की भी आशंका जताई जा रही है।
लंबे समय से चल रहा था खेल, अधिकारियों ने नहीं ली सुध : ग्रामीणों का आरोप है कि यह अवैध गतिविधियां लंबे समय से जारी थीं,लेकिन संबंधित अधिकारियों ने इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या यह सब उनकी जानकारी में हो रहा था या फिर जानबूझकर अनदेखी की गई।
ग्रामीणों में भारी आक्रोश,जंगल बचाने की मांग : मामले को लेकर स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल उनके जीवन का आधार है—यहीं से उन्हें जल, ईंधन और रोजगार मिलता है। एक ग्रामीण ने आक्रोश जताते हुए कहा, ‘अगर अभी भी कार्रवाई नहीं हुई, तो पूरा जंगल खत्म हो जाएगा। ‘
वन विभाग की भूमिका पर उठे सवाल : इतने बड़े पैमाने पर जंगल की कटाई होने के बावजूद विभाग की निष्कि्रयता ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
– क्या अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं थी?
द्द या फिर यह सब मिलीभगत से हो रहा था?
– आखिर निगरानी तंत्र इतना कमजोर क्यों साबित हुआ?
निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराकर क्षेत्र में पुनः हरियाली बहाल करने की अपील भी की गई है।
पर्यावरण पर बड़ा खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस तरह की अवैध कटाई पर रोक नहीं लगाई गई, तो इसका सीधा असर पर्यावरण, जल स्रोतों और स्थानीय जनजीवन पर पड़ेगा।


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