नल-जल और पीएम जनमन योजना के दावों की खुली पोल

-विशेष संवाददाता-
बलरामपुर,31 मार्च 2026 (घटती-घटना)। एक ओर सरकार नल-जल योजना और पीएम जनमन योजना के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजातियों के विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं ज़मीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। बलरामपुर जिले के कुसमी जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत सबाग के वार्ड क्रमांक 10 (झालबासा) से सामने आई तस्वीरें बेहद चिंताजनक हैं।
यहाँ निवासरत करीब 14 से 15 परिवार,जो पहाड़ी कोरवा जनजाति से हैं-जिन्हें ‘राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र’ के रूप में जाना जाता है—भीषण जल संकट से जूझ रहे हैं। हालात इतने खराब हैं कि ग्रामीणों को खुद से खोदी गई ‘ढोंढ़ी’ (कच्चा गड्ढा) का सड़ा-गला और दूषित पानी कपड़े से छानकर पीना पड़ रहा है।
वीरान जगह से लाना पड़ रहा पानी : ग्रामीण जिस स्थान से पानी ला रहे हैं, वह शमशान जैसी वीरान जगह है,जहाँ न तो कुआं है,न तालाब और न ही कोई बोरवेल। हाथ से बनाए गए छोटे से गड्ढे (चूआं) में जमा गंदा पानी ही उनकी प्यास बुझाने का एकमात्र सहारा है।
दो साल से अधूरी नल-जल योजना : इस मामले में जब पंचायत सचिव से चर्चा की गई,तो उन्होंने बताया कि नल-जल योजना का कार्य पिछले दो वर्षों से जारी है, लेकिन अभी तक अधूरा है। साथ ही,पीएम जनमन योजना के तहत सड़क स्वीकृत होने के बावजूद निर्माण पूरा नहीं हुआ है,जिससे बोरिंग मशीन झालबासा पारा तक नहीं पहुँच पा रही है।
अब बड़ा सवाल यह है कि—
– आखिर कब तक सड़क निर्माण पूरा होगा?
– नल-जल योजना कब तक धरातल पर आएगी?
– और कब इन आदिवासी परिवारों को स्वच्छ पेयजल मिल पाएगा?
बीमारी फैलने का खतरा : जिस पानी का उपयोग ग्रामीण कर रहे हैं, उसमें पेड़ों की पत्तियां सड़ रही हैं और गंदगी साफ दिखाई देती है। ऐसे दूषित पानी के सेवन से बस्ती में गंभीर बीमारियों और महामारी फैलने का खतरा बढ़ गया है।
प्रशासन पर उठे सवाल : विशेष पिछड़ी जनजाति के रूप में चिन्हित और ‘राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र’ कहे जाने वाले इन पहाड़ी कोरवा परिवारों की यह स्थिति प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है। यह मामला जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। अब देखना यह होगा कि इस खबर के प्रकाशन के बाद प्रशासन कितनी तेजी से संज्ञान लेता है और क्या इन प्यासे आदिवासी परिवारों को उनका बुनियादी अधिकार—स्वच्छ पेयजल—मिल पाता है या नहीं।
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