बिलासपुर,25 मार्च 2026। स्थित छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने पेंशन से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में राज्य सरकार को राहत नहीं देते हुए उसकी रिट अपील खारिज कर दी है। अदालत ने साफ कहा है कि यदि कोई कर्मचारी पहले दैनिक वेतनभोगी के रूप में कार्यरत रहा हो और बाद में उसकी सेवा नियमित हो गई हो,तो उसकी पूर्व सेवा अवधि को भी पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभों में शामिल किया जाएगा। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने यह निर्णय सुनाया। मामला लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) बेमेतरा के उन कर्मचारियों से जुड़ा था, जो 31 दिसंबर 1988 से पहले दैनिक वेतन पर काम कर रहे थे और वर्ष 2008 में नियमित किए गए थे। सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें केवल नियमित सेवा अवधि के आधार पर पेंशन दी गई थी,जिसे कर्मचारियों ने अदालत में चुनौती दी। इससे पहले एकलपीठ ने भी अपने फैसले में कहा था कि नियमितीकरण से पहले की सेवा को पेंशन में जोड़ा जाए और संबंधित अभिलेखों का सत्यापन कर लाभ प्रदान किया जाए। राज्य सरकार ने इस आदेश के खिलाफ अपील करते हुए तर्क दिया था कि दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी पेंशन के पात्र नहीं होते और नियम केवल स्थायी कर्मचारियों पर लागू होते हैं।
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