

- झुमका ओपन थियेटर में ‘जी राम जी’ जागरूकता कार्यक्रम,उद्देश्य पर उठे सवाल…
- रोशनी और मानव श्रृंखला के बीच‘जी राम जी’ अभियान,लेकिन सवाल बरकरार
- झुमका में जुटे अधिकारी-कर्मचारी, जागरूकता कार्यक्रम पर मचा सियासी शोर
- शासकीय योजना का प्रचार या मंच की उपयोगिता साबित करने की कोशिश?
- रात में जागरूकता कार्यक्रम : झुमका ओपन थियेटर बना चर्चा का केंद्र
- ‘जी राम जी’ योजना का आयोजन,
- प्रशासन की मंशा पर उठे प्रश्न
-रवि सिंह-
कोरिया,28 फरवरी 2026 (घटती-घटना)। कोरिया जिले के झुमका ओपन थियेटर परिसर में बुधवार रात जिला प्रशासन एवं पंचायत विभाग द्वारा ‘जी राम जी’ योजना के जागरूकता एवं प्रचार-प्रसार के लिए एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, रोशनी से जगमगाते मंच,अधिकारियों-कर्मचारियों की मौजूदगी और मानव श्रृंखला के माध्यम से योजना का संदेश देने की कोशिश की गई, कार्यक्रम के बाद जिला प्रशासन के सोशल मीडिया हैंडल पर इसकी तस्वीरें और वीडियो साझा किए गए,जिनमें व्यापक जन सहभागिता का दावा किया गया,हालांकि आयोजन की प्रकृति और समय को लेकर अब कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
क्या है ‘जी राम जी’ योजना और क्यों जरूरी है प्रचार?
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार ‘जी राम जी’ योजना शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देना और हितग्राहियों तक योजनाओं की जानकारी पहुंचाना है, ऐसी योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए आमतौर पर ग्राम पंचायत स्तर पर बैठकें,शिविर या जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं,लेकिन इस बार जागरूकता कार्यक्रम का मंच बना शहर का प्रमुख सार्वजनिक स्थल—झुमका ओपन थियेटर।
ओपन थियेटर की उपयोगिता पर भी चर्चा- झुमका क्षेत्र में विकसित ओपन थियेटर पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं, ऐसे में यह आयोजन कहीं न कहीं इस मंच की सक्रियता और उपयोगिता दिखाने का प्रयास भी माना जा रहा है,स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि क्या यह कार्यक्रम शासकीय योजना के प्रचार के साथ-साथ ओपन थियेटर में हुए निवेश को सार्थक साबित करने की पहल भी था, हालांकि प्रशासनिक अधिकारी इसे नियमित जागरूकता अभियान का हिस्सा बता रहे हैं और किसी अन्य उद्देश्य से इंकार कर रहे हैं।
जनसहभागिता बनाम प्रशासनिक उपस्थिति- कार्यक्रम में जिला प्रशासन और पंचायत विभाग के कई अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे, मंच की साज-सज्जा और प्रकाश व्यवस्था ने इसे एक औपचारिक आयोजन का स्वरूप दिया, कुछ नागरिकों का कहना है कि यदि उद्देश्य व्यापक जनजागरूकता था, तो इसे अलग-अलग ग्राम पंचायतों में आयोजित किया जाना अधिक प्रभावी होता, वहीं समर्थकों का तर्क है कि केंद्रीय स्थल पर आयोजन से अधिक दृश्यता मिलती है और संदेश तेजी से फैलता है।
सोशल मीडिया रणनीति
आधुनिक प्रशासनिक कार्यशैली में सोशल मीडिया का महत्वपूर्ण स्थान है। कार्यक्रम के तुरंत बाद तस्वीरें और वीडियो साझा कर इसे सफल बताया गया, आलोचकों का कहना है कि केवल डिजिटल प्रचार से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि योजना के वास्तविक लाभार्थियों को समय पर जानकारी और सुविधा मिले।
उद्देश्य स्पष्ट करने की जरूरत
झुमका ओपन थियेटर में आयोजित ‘जी राम जी’ योजना का जागरूकता कार्यक्रम प्रशासन की सक्रियता का संकेत अवश्य देता है, परंतु इसके समय, स्थान और स्वरूप को लेकर उठे सवालों का स्पष्ट उत्तर भी अपेक्षित है, क्या यह पूरी तरह से योजना के प्रचार का कार्यक्रम था, या ओपन थियेटर के विकास और उपयोगिता को प्रदर्शित करने का प्रयास—यह बहस अभी जारी है, फिलहाल इतना तय है कि इस आयोजन ने जिले में शासकीय कार्यक्रमों की प्राथमिकताओं और शैली को लेकर एक नई चर्चा जरूर छेड़ दी है।
रात में आयोजनः रणनीति या औपचारिकता?
सबसे अधिक चर्चा का विषय कार्यक्रम का समय रहा, यह आयोजन रात के समय किया गया, जब आमतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में शासकीय जागरूकता कार्यक्रम कम ही आयोजित होते हैं,प्रशासन का दावा है कि अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए शाम और रात का समय चुना गया,वहीं स्थानीय नागरिकों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या ग्रामीण स्वतः पहुंचे या उन्हें विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था,सोशल मीडिया पोस्ट में ग्रामीणों की उपस्थिति का उल्लेख किया गया,परंतु कार्यक्रम स्थल पर बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी भी नजर आए।
मानव श्रृंखलाः प्रतीकात्मक संदेश या वास्तविक जागरूकता?
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों,कर्मचारियों और उपस्थित लोगों ने मानव श्रृंखला बनाकर योजना के समर्थन और जागरूकता का संदेश दिया,यह दृश्य आकर्षक जरूर रहा, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तविक जागरूकता तब मानी जाएगी जब योजना के लाभार्थियों तक स्पष्ट जानकारी और सुविधाएं पहुंचें,मानव श्रृंखला जैसे आयोजन प्रतीकात्मक होते हैं,जिनका उद्देश्य सामूहिक संदेश देना होता है, परंतु सवाल यह भी है कि क्या ऐसे आयोजनों से जमीनी स्तर पर योजनाओं की समझ और पहुंच में ठोस वृद्धि होती है?
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