Breaking News

मनेंद्रगढ़@ मनेंद्रगढ़ वन मंडल बना तस्करों का अड्डा, लाखों की लकडि़याँ रोज पार, विभाग मौन

Share

  • जंगलों की खुली लूट,बिहारपुर से बड़गांवकला तक तस्करों का साम्राज्य…
  • वन विभाग की ‘कुंभकर्णी नींद’ में कट रहे सागौन,करोड़ों का खेल जारी…
  • मनेंद्रगढ़ वन मंडल में बढ़ती अवैध कटाई,बिहारपुर और आसपास के क्षेत्र बने हॉटस्पॉट…
  • लकड़ी तस्करी पर लगाम क्यों नहीं? वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल…
  • घने जंगल,कमजोर निगरानी और सक्रिय सिंडिकेट : मनेंद्रगढ़ में तस्करी का नेटवर्क उजागर
  • कटते जंगल,बढ़ता संकटःमनेंद्रगढ़ में अवैध लकड़ी तस्करी से पर्यावरण खतरे में…
  • सागौन पर संगठित वार : जंगलों की सेहत पर मंडराता खतरा…
  • वन संपदा की लूट या तंत्र की चूक? मनेंद्रगढ़ में जंगल असुरक्षित…


-रवि सिंह-
मनेंद्रगढ़,28 फरवरी 2026 (घटती-घटना)।
छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़ वन मंडल में इन दिनों अवैध लकड़ी कटाई और तस्करी का खेल संगठित तरीके से चल रहा है, स्थानीय ग्रामीणों, पर्यावरण प्रेमियों और सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बिहारपुर वन परिक्षेत्र अब तस्करों के लिए सुरक्षित गलियारा बन चुका है, बेशकीमती सागौन, साल और अन्य प्रजातियों के पेड़ रात के अंधेरे में काटे जा रहे हैं और सुबह होने से पहले ही जंगल से बाहर पहुँचा दिए जाते हैं, वन विभाग की निष्कि्रयता पर सवाल उठ रहे हैं,आरोप है कि शिकायतों के बावजूद नियमित गश्त और ठोस कार्रवाई का अभाव तस्करों के हौसले बढ़ा रहा है।
हॉटस्पॉट बनते क्षेत्र : बिहारपुर, सोनहरी और बड़गांवकला
बिहारपुरःतस्करों का ‘खुला बाजार’-बिहारपुर वन परिक्षेत्र में हालात सबसे ज्यादा गंभीर बताए जा रहे हैं, ग्रामीणों का कहना है कि जंगल के भीतर कई स्थानों पर बड़े-बड़े पेड़ों के ठूंठ दिखाई दे रहे हैं,कटाई इतनी व्यवस्थित ढंग से हो रही है कि यह किसी संगठित गिरोह की संलिप्तता की ओर इशारा करती है,रात के समय छोटे पिकअप और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के जरिए लकड़ी मुख्य सड़कों तक पहुँचाई जाती है, वहाँ से बड़े वाहनों में लोड कर आगे खपाया जाता है।
सोनहरीः घने जंगलों की आड़- सोनहरी क्षेत्र के घने जंगल तस्करों के लिए ढाल बने हुए हैं,यहाँ रात में आरी और मशीनों की आवाज सुनाई देना आम हो गया है,स्थानीय सूत्रों का दावा है कि कई बार लकड़ी को अस्थायी डंप बनाकर छिपाया जाता है और फिर एक साथ ट्रकों में भरकर बाहर भेजा जाता है।
बड़गांवकलाःअंदरूनी नेटवर्क– बड़गांवकला के जंगलों में तस्करों का नेटवर्क गहरा बताया जा रहा है,यहाँ जंगल के अंदर अस्थायी आरा मशीनें चलने की सूचना है,ग्रामीणों के अनुसार, कटाई के बाद लकडि़यों को पास के गाँवों में छिपाकर रखा जाता है और फिर रात के समय खपाया जाता है।
अधिकारियों की भूमिका पर उठते सवाल-वन विभाग पर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं,स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार मौखिक शिकायतें करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, सूत्रों का दावा है कि कुछ जिम्मेदार कर्मचारियों की उदासीनता या संभावित मिलीभगत के कारण यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है,हालांकि,विभागीय स्तर पर इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है,यदि आरोप सही हैं तो यह केवल वन संपदा की लूट नहीं,बल्कि सरकारी राजस्व और पर्यावरण सुरक्षा तंत्र की भी बड़ी विफलता है।
बाहरी सिंडिकेट और सप्लाई चेन-जानकारी के अनुसार, नागपुर और उजियारपुर क्षेत्र से जुड़े बड़े तस्कर इस नेटवर्क को संचालित कर रहे हैं,ये लोग स्थानीय ग्रामीणों को थोड़े पैसों का लालच देकर कटाई करवाते हैं,अमृतधारा, महाराजपुर,सोनवर्षा और राधारमण नगर जैसे क्षेत्रों को कथित रूप से ‘सप्लाई जोन’ के रूप में चिन्हित किया गया है, यहाँ से रोजाना लाखों रुपए की लकडि़याँ अवैध रूप से बाहर भेजी जा रही हैं, इन लकडि़यों को स्थानीय फर्नीचर बाजारों में खपाने के साथ-साथ अन्य राज्यों में भी सप्लाई किए जाने की चर्चा है,यदि यह सच है,तो यह अंतरराज्यीय तस्करी का मामला बन सकता है।
पर्यावरण और आजीविका पर खतरा
अंधाधुंध कटाई का असर केवल पेड़ों तक सीमित नहीं है,इसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं,वर्षा चक्र और जल स्रोतों पर असर,वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास का विनाश,स्थानीय आदिवासी समुदायों की आजीविका पर संकट,क्षेत्रीय जलवायु असंतुलन,विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए,तो आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र पारिस्थितिक असंतुलन का गंभीर शिकार हो सकता है।
जनता में आक्रोश,कार्रवाई की मांग…
स्थानीय सामाजिक संगठनों और पर्यावरण प्रेमियों ने मांग की है कि विशेष संयुक्त जांच दल का गठन किया जाए,संदिग्ध अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच हो,नियमित रात्रि गश्त और चेकपोस्ट निगरानी बढ़ाई जाए,जब्त लकडि़यों और मामलों की सार्वजनिक जानकारी जारी की जाए।
क्या टूटेगी ‘कुंभकर्णी नींद’?
अब नजरें वन विभाग और प्रशासन पर टिकी हैं,क्या खबर के प्रकाशन के बाद तस्करों पर नकेल कसी जाएगी? या फिर जंगलों की यह लूट यूँ ही जारी रहेगी? मनेंद्रगढ़ वन मंडल के जंगल केवल संसाधन नहीं,बल्कि इस क्षेत्र की पारिस्थितिकी और संस्कृति की धरोहर हैं,यदि इन्हें बचाने के लिए तत्काल और कठोर कार्रवाई नहीं की गई,तो नुकसान अपूरणीय होगा।


Share

Check Also

एमसीबी,@ चिरमिरी-नागपुर नई ब्रॉडगेज रेल लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पूर्ण

Share 16.93 करोड़ रुपये मुआवजे का अंतिम अधिनिर्णय पारितएमसीबी,28 फरवरी 2026 (घटती-घटना)। कार्यालय कलेक्टर एवं …

Leave a Reply