नई दिल्ली,31 जनवरी 2026। भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने हरियाणा के फरीदाबाद में 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेले का उद्घाटन किया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त यह मेला भारत और विदेश के कारीगरों, शिल्पकारों और सांस्कृतिक कलाकारों को एक साथ लाता है,जो देश की समृद्ध कलात्मक विरासत और आत्मनिर्भर भारत की भावना का उत्सव मनाते हैं। उपराष्ट्रपति ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले चार दशकों में सूरजकुंड मेला भारत की सांस्कृतिक आत्मा, कलात्मक उत्कृष्टता और सभ्यतागत निरंतरता का जीवंत प्रतीक बनकर उभरा है। 30 से अधिक देशों की भागीदारी के साथ, यह मेला वास्तव में भारत के शाश्वत दर्शन ‘वसुधैव कुटुंबकम’ अर्थात् विश्व एक परिवार है, को दर्शाता है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत पर केंद्रित होने से इस आयोजन का महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि शिल्पकार सदियों पुराने ज्ञान और परंपराओं के संरक्षक हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें सशक्त बनाना एक समावेशी, टिकाऊ और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था के निर्माण के लिए आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री विश्वकर्मा कौशल सम्मान योजना जैसी पहल कौशल विकास, बाजार तक पहुंच और आर्थिक सहायता के माध्यम से हस्तशिल्प के क्षेत्र को मजबूत कर रही है। उत्तर प्रदेश और मेघालय को विषय बनाकर आयोजित मेले की थीम का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ये दोनों राज्य भारत की विविधता में एकता का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। उत्तर प्रदेश में वस्त्र, धातु शिल्प और कढ़ाई में उत्कृष्ट शिल्प की विरासत झलकती है, वहीं मेघालय के स्वदेशी शिल्प सतत विकास, प्रकृति के साथ सामंजस्य और सामुदायिक परंपराओं का उत्कृष्ट उदाहरण हैं, जो मिलकर ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मूर्त रूप देते हैं। उपराष्ट्रपति ने इस वर्ष के मेले के साझेदार देश मिस्र का हार्दिक स्वागत किया और कहा कि मिस्र की प्राचीन सभ्यता, कलात्मक परंपराएं और सांस्कृतिक गहराई भारत की ऐतिहासिक यात्रा से गहराई से मेल खाती हैं। उन्होंने इससे पहले मिस्र के पवेलियन का दौरा किया और देश की समृद्ध परंपराओं और कलात्मक उत्कृष्टता की सराहना करते हुए जन-जन संबंधों को मजबूत करने में सांस्कृतिक कूटनीति की भूमिका पर बल दिया।
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