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नई दिल्ली@वकील के खिलाफ आपराधिक मामला रद्द,कोर्ट ने कहा…पेशेवर काम को डराना-धमकाना नहीं कहा जा सकता

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नई दिल्ली,30 जनवरी 2026। सुप्रीम कोर्ट ने एक वकील के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को शुक्रवार को रद्द कर दिया। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि वकील के सलाह देने जैसे पेशेवर काम को डराना या धमकाना नहीं कहा जा सकता। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने कहा कि बिना ठोस सबूत के अस्पष्ट और बेबुनियाद आरोप भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 506 (आपराधिक धमकी) के तहत अपराध नहीं बनाते। शीर्ष कोर्ट ने यौन अपराध से बच्चों का का संरक्षण (पॉक्सो) मामले में आरोपी के चाचा,वकील बेरी मनोज के खिलाफ आईपीसी की धारा 506 के तहत दर्ज आपराधिक मामले को खारिज कर दिया। बेंच ने गौर किया कि पीडि़ता ने जो बयान दिया था, उसमें बाद में बदलाव आया। पहला बयान दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 161 के तहत पुलिस के समक्ष दिया गया था। दूसरा बयान सीआरपीसी की धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट के सामने दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब कोई वकील अपने पेशेवर काम में होता है, तो उसे डराने-धमकाने के तौर पर नहीं देखा जा सकता और इस मामले में यह जरूरी तथ्य (कि वकील धमकी दे रहा था) पूरी तरह गायब था।


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